DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

Lok Sabha Election: सोशल मीडिया ने चुनाव प्रचार को नया रंग दिया

social media

सोशल मीडिया ने देश में चुनाव प्रचार के लिहाज से एक नया रंग दे दिया है। चाहे बात खबरों की हो, विरोधियों पर निशाना साधना हो या फिर किसी के बारे में फेक न्यूज फैलाना, इस माध्यम के जरिए चुनावी माहौल में नेता हर तरह का हथियार मजबूती से चला रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक भारत में औसतन हर नागरिक हफ्ते में 17 घंटे सोशल मीडिया पर बिताता है। आलम ये है कि सोशल मीडिया इस्तेमाल के मामले में भारतीयों ने चीन और अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत में कुल 56 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर हैं। इनमें युवाओं की तादाद सबसे ज्यादा है और उन युवाओं में ज्यादातर पहली बार वोट करने वाले नागरिक भी रहे हैं।

देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नवीन चावला ने चुनावों में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर हिंदुस्तान को बताया कि ये माध्यम देश में पहली बार के वोटर्स को मतदान केंद्र तक ले जाने में कामयाब रहा है। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया में इस्तेमाल हो रही फेक न्यूज को लेकर चिंता भी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि चुनावों में ‘मनी पावर’ की तरह इस माध्यम ने भी चुनाव में सभी को एक ‘समान अवसर’ नहीं दिया है और उन्हें प्रभावित किया है।

सोशल मीडिया को राजनीतिक दल कितना जरूरी मानते हैं, इसका इसका अंदाजा उनके सोशल मीडिया बजट से ही लगा सकते है। इस पूरे चुनाव में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला राजनीति दल भारतीय जनता पार्टी रही है। पार्टी ने फेसबुक, गूगल और उनके सहयोगी प्लेटफॉर्म्स पर आधिकारिक तौर पर अब तक 20 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं। गूगल और यू ट्यूब पर कुल राजनीतिक विज्ञापन 27 करोड़ रुपए आए हैं उनमें से 60 फीसदी यानि करीब 17 करोड़ रुपए सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ने ही खर्च किए हैं।

भाजपा के मुकाबले कांग्रेस 500 फीसदी पीछे रही है। उसने इस प्लेटफॉर्म पर महज 2.7 करोड़ रुपए ही खर्च किए। फेसबुक की बात करें तो यहां भाजपा ने कांग्रेस के 1.3 करोड़ से 200 फीसदी ज्यादा करीब 4 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के समर्थन वाले फेसबुक पेज जैसे भारत के मन की बात, माइ फर्स्ट वोट फॉर मोदी और नेशन विद नमो जैसी जगहों पर भी चुनावी मौसम में हवा पार्टी की तरफ मोड़ने के मकसद से 4.5 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम खर्च की गई है। 

ये तो आंकड़ा पार्टी के आधिकारिक खर्चों के हैं। इन दलों के कैंडीडेट ने अपने इलाकों में व्हाट्सएप संदेशों से लेकर दूसरे प्लेटफॉर्म पर स्थानीय मुद्दों के लिए भी अलग से बाकायदा टीम बनाई है। उस टीम ने भी पार्टी की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने का काम किया है।

साथ ही व्हाट्सएप के जरिए लोगों को सीधे संदेश भेजने के लिए भी पार्टीयों और उम्मीदवारों ने अलग से टीम बनाई है। जानकारों के मुताबिक इंटरनेट पर कई ऐसे सॉफ्टवेयर मौजूद हैं जिनके जरिए दिन भर में 1 लाख संदेश भेजे जा सकते हैं। कई नेताओं और पार्टियों ने अपने पक्ष में मतदाताओं का रुख मोड़ने के लिए ऐसी सेवाएं भी ले रखी हैं।

सोशल मीडिया एक्सपर्ट मोनिक मेहरा मानते हैं कि भारतीयों की सोशल मीडिया पर सक्रियता ने ही नेताओं को इस मोर्चे पर न सिर्फ खर्च करने के लिए उत्साहित किया है बल्कि अपने विरोधियों के खिलाफ जानकारी फैलाने के लिहाज से भी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मोनिक ने बताया कि व्यक्ति की प्रकृति होती है कि वो जो देखता है उस पर तत्काल भरोसा करने लगता है। इसी वजह से राजनीतिक दल अपने विरोधियों के खिलाफ एडिट किए हुए वीडियों प्रसारित कराते हैं। तमाम नेता सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति इस कदर बनाए रखना चाहते हैं कि जब उनके इलाके में वोटिंग होने वाली हो उस समय मतदाता सिर्फ ही वोट दे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Social Media gives Election Campaign new colour