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Lok Sabha Elections 2019वोट प्रतिशत बढ़ने से उलट जाता है राजद का परिणाम

वोट प्रतिशत के आधार पर चुनाव में राजद उम्मीदवारों के रिजल्ट में उलटफेर होते रहे हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में वोट का प्रतिशत बढ़ा तो राजद ने चार सीटें जीतीं, लेकिन अगले ही चुनाव में एक बार फिर वोट का प्रतिशत बढ़ते ही पार्टी ने अपनी पुरानी सीटें गवां दी। हालांकि दूसरी चार सीटें राजद ने वोट प्रतिशत बढ़ने के कारण ही जीती। इस बार फिर राजद की उन आठ में सात सीटों पर वोट का प्रतिशत बढ़ा है। देखना दिलचस्प होगा कि राजद उन सीटों पर 2009 या 2014 का इतिहास दोहराता है या कोई नया गुल खिलता है। 

राजद के उम्मीदवार 2009 के चुनाव में वैशाली, बक्सर, महाराजगंज और सारण लोकसभा सीटों पर जीते थे। तब इन सीटों पर 43 से 46 प्रतिशत के बीच वोट पड़े थे। सबसे अधिक 46 प्रतिशत वोट सारण सीट पर पड़े थे। लेकिन अगले चुनाव 2014 में में इन सीटों पर वोट का प्रतिशत बढ़कर 51 से 56 प्रतिशत के बीच पहुंच गया। ऐसे में ये चारों सीटें राजद के हाथ से निकल गईं। लेकिन उसी चुनाव में लगभग पांच से नौ प्रतिशत वोट बढ़ने के कारण राजद उम्मीदवारों ने बांका, भागलपुर, मधेपुरा और अररिया सीटें जीत लीं। उस चुनाव में 2009 से बांका में लगभग सात प्रतिशत अधिक वोट पड़े थे तो भागलपुर में पांच, मधेपुरा में सात और अररिया में चार प्रतिशत वोट अधिक पड़े थे। 

दो लोसकभा चुनाव में बारी-बारी से जीती गई इन आठ सीटों पर इस बार भी वोटों का प्रतिशत बढ़ा है। अब देखना है कि वोट बढ़ने से राजद 2009 के चुनाव की तरह अपनी ये सीटें जीतता है या 2014 की तर्ज पर गंवा देता है। हालांकि वैशाली संसदीय क्षेत्र को छोड़ दें तो  इस बार के वोट प्रतिशत में वृद्धि बहुत अधिक नहीं है। बक्सर संसदीय क्षेत्र में तो गत चुनाव से वोट प्रतिशत गिर ही गया है। बक्सर में 2014 के चुनाव में 54.19 प्रतिशत वोट पड़े थे, जबकि इस बार 53.9 प्रतिशत ही वोट पड़े हैं। इसी तरह वैशाली में लगभग पांच प्रतिशत वोट की वृद्धि हुई है। गत चुनाव में यहां 54.60 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस बार 61.86 प्रतिशत वोट पड़े हैं। शेष संसदीय क्षेत्रों में भी वोट की वृद्धि एक से तीन प्रतिशत के बीच है। 

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  • Web Title:Result of RJD is overturned by vote percentage increasing