Report of Sitapur: Awaited development between ethnic war - सीतापुर की गाउंड रिपोर्ट : जातीय जंग के बीच विकास का इंतजार DA Image

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सीतापुर की गाउंड रिपोर्ट : जातीय जंग के बीच विकास का इंतजार

मुगले-ए-आजम और गंगा-जमुना जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपने शब्द देने वाले वजाहत मिर्जा, आचार्य नरेन्द्र देव, कुंवर चन्द्र प्रकाश सिंह, उर्दू कवि निसार आजाद, मुगल सम्राट अकबर के नौ रत्नों में एक राजा टोडरमल और परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पाण्डेय जैसे विरले सपूतों की जन्मभूमि सीतापुर विकास के लिए तरसती नज़र आती है। 

युवक रोजगार को लेकर चिंतित हैं तो दूसरी ओर नेता वादे दिलासे देकर जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। सियासी पारा बढ़ती तपिश के साथ बढ़ रहा है लेकिन नेताओं को मुद्दों से सरोकार जरा भी नज़र नहीं आ रहा।

कमलापुर चीनी मिल न खुलने की नाराजगी:  लखनऊ से करीब 60 किमी दूर सीतापुर लोकसभा का पहला इलाका कमलापुर क्षेत्र पड़ता है। रजवाड़ों के लिए मशहूर कमलापुर में इस समय महोठे रानी मंदिर का मेला चल रहा है। यहां गुड़ बेचने आए मुन्ना लाल यह तो नहीं बता पाते उनके यहां से कौन-कौन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है। पर, वह यह जरूर कहते हैं कि मोदी ने पाकिस्तान को जवाब देकर सीना चौड़ा कर दिया। 
इससे पहले ही सरकार ऐसी हिम्मत नहीं जुटा पाई। मुन्ना लाल ने अपना इरादा तो बता दिया लेकिन खुलकर नहीं बोले। बातचीत के बीच में ही त्रिनाथ और कल्लू बोल पड़ते हैं -भैया...यहां रोजगार की बड़ी समस्या है। यहां कमलापुर चीनी मिल जब खुली थी तो कई साल तक लोगों को रोजगार मिलता रहा। पर, अब यह मिल सालों से बंद पड़ी है और नेता चुनाव के समय इसे खुलवाने का आश्वासन देते हैं, फिर जीतने के बाद उन्हें इसकी सुध ही नहीं रहती।'  

2000 रुपये का असर भी दिखा: मेले में आईं रुचिका सिंह और अपर्णा कहती हैं कि इस सरकार ने दो-दो हजार रुपये देकर अच्छा काम किया। 
जातिवाद भी बड़ा मुद्दा:  कमलापुर से करीब 20 किमी आगे सीतापुर का शहरी इलाका शुरू हो जाता है। बस अड्डे के पास एक ढाबानुमा होटल पर लोग चर्चा में जुटे हैं। इसमें शामिल राम मिलन कहते हैं-बड़े मुद्दों पर ही अब चुनाव लड़ा जा रहा है। 

इसके बाद जातीय समीकरण हावी हैं। विकास की बात तो कोई पार्टी कर ही कहां रही है। नोहतास कहते हैं -'सपा-बसपा गठबन्धन होने से दलित और पिछड़ी जाति के साथ ही मुस्लिम वोटर भी संशय में हैं।  मो. मजीद कहते हैं -'वह मतदान के एक-दो दिन पहले ही तय करेंगे कि किसे वोट दें। '
समस्याओं से नेताओं का सरोकार नहीं:  सीतापुर की विख्यात कमलापुर चीनी मिल, सुहागिन वनस्पति तेल का कारखाना बरसों पहले बंद हो चुका है।  बिसवां में चीनी मिल के पास रेलवे क्रासिंग के ऊपर पुल बनाने की मांग सालों से चली आ रही है। गन्ना किसान अपने बकाये को लेकर परेशान हैं। लियाकत अली कहते हैं कि कांग्रेस में अब बड़ा नेता बचा ही नहीं है। प्रियंका तो चुनाव लड़ने से ही डर गई वह पार्टी के लिये क्या कर पाएंगी।' 

आंख का अस्पताल बना पहचान: वर्ष 1927 में सीतापुर में खुला आंख का अस्पताल यहां की सबसे बड़ी पहचान बना। इसके संस्थापक डॉ. एमपी मेहरा थे। वर्तमान में दो लाख से ज्यादा लोग अपनी आंख का इलाज के लिये हर साल इस अस्पताल में आते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, केके बिरला समेत कई बड़ी हस्तियों ने यहां का दौरा किया था। एक समय था जब मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी अपनी आंख का आपरेशन कराने इसी अस्पताल आयी थी। इससे जुड़ा भी एक दिलचस्प किस्सा है। श्रीदेवी का जब आना था, तब उनका आना बेहद गुप्त रखा गया था। पर, जाने कैसे यह बात लीक हो गई। उन्हें हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन में उतरना था। उनके आने की खबर फैलते ही हजारों लोग अस्पताल के ईद-गिर्द जमा हो गये। आखिरकार प्रशासन ने श्रीदेवी को उतरने की इजाजत नहीं दी और फिर वह बाद में गुपचुप आयी और इलाज कराकर लौट गई थी। इस अस्पताल में और सुविधाएं दी जानी थी लेकिन अभी स्थिति जस की तस ही है।

सीतापुर के लिये चार सांसद: अगर पूरे सीतापुर की बात करें तो यहां कहने को तो सीतापुर और मिश्रिख दो लोकसभा सीट है लेकिन धौरहरा और मोहनलालगंज लोकसभा सीट में भी सीतापुर का काफी हिस्सा आता है। संजय बाजपेयी कहते हैं कि इतना ज्यादा बंट जाने की वजह से भी सांसदों के बीच संशय की स्थिति रहती है। एक सांसद दूसरे सांसद पर इलाके का विकास करने की जिम्मेदारी डाल देता है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी बताया कि धौरहरा और मोहनलालगंज लोकसभा सीट से जीतने वाले सांसद सीतापुर इलाके में बहुत कम ही दिखते हैं। यही वजह है कि कई ऐसे लोग यहां मिले जो अपने प्रत्याशियों को पहचानते तक नहीं थे। 
तीर्थ स्थान: सीतापुर की तहसील मिश्रिख में बने नैमिषारण्य का ऐतिहासिक महत्व है। यहां पर दूर-दूर से लोग दर्शन करते आते हैं। 108 भगवान के मंदिर यहां है। यह भगवान विष्णु के देश भर में बने आठ मंदिरों में से एक हैं।यह स्थान हालांकि मिश्रिख लोकसभा चुनाव में आता है। 

विधानसभा सीटें
सीतापुर,बिसवां, लहरपुर, महमूदाबाद, सेवता

न उद्योग बढ़े न पुरानी मिलें खुलीं
कमलापुर चीनी मिल सालों से बंद है। सुहागिन वनस्पति तेल का कारखाना खुलने की बाट देख रहा है। उद्योग बढ़े ही नहीं...। अब ऐसे में रोजगार कैसे मिले। वैद्य प्रताप सिंह कहते हैं कि कई ऐसे युवा है जो अपने घर के इकलौते वारिस है और उनकी यहां खेती भी है। स्थानीय स्तर पर उद्योग खुले तो यह लोग वहां रोजगार पा सकते हैं और अपनी खेती भी सम्भाल सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी ज्यादा काम नहीं हुआ है। यह जरूर है कि बालिका विद्यालय और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल कई है लेकिन वहां की स्थिति बेहद खराब है।

भितरघात से भी जूझ रहे प्रत्याशी

सीतापुर लोकसभा में पार्टी बदलते प्रत्याशियों के समीकरण ने इस बार चुनाव को बहुत दिलचस्प बना दिया है। बसपा-सपा गठबंधन के प्रत्याशी नकुल दुबे लखनऊ के रहने वाले हैं और वह पहली बार यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाते हुए ब्राहमण प्रत्याशी के तौर पर नकुल दुबे को मैदान में उतारा है। कैसरजहां वर्ष 2009 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीत चुकी है। वह अब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में है। वह दूसरी पार्टी से आयी और टिकट पा लिया लिहाजा पुराने कांग्रेसी उनके विरोध में है। मो. फैय्याज चुनावी समीकरण पर कहते हैं कि वर्ष 1999 और वर्ष 2004 में बसपा से सांसद रहे राजेश वर्मा ने पिछली बार भाजपा का दामन थाम लिया था। वह चुनाव जीते भी लेकिन इस बार उनको फिर से टिकट मिलने पर भाजपा के ही कुछ कार्यकर्ता और विधायक उनका साथ नहीं दे रहे हैं।  

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