DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

LOK SABHA ELECTIONS 2019: उत्तर प्रदेश में BJP के लिए क्यों जरूरी है ओपी राजभर का साथ?

भाजपा के साथ रहते हुए भी हर मौके-बेमौके उसकी आलोचना करने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने अंतत: भाजपा के साथ ही चुनाव में उतरने का फैसला किया है।

bjp and sbsp alliance in up jpg

भाजपा के साथ रहते हुए भी हर मौके-बेमौके उसकी आलोचना करने वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर ने अंतत: भाजपा के साथ ही चुनाव में उतरने का फैसला किया है। भाजपा ने उन्हें भी अपना दल की तरह ही दो सीटें देने का आश्वासन दिया है। ओम प्रकाश के तमाम कड़वे घूंट पीने के बाद भाजपा ने उन्हें साथ रखने का फैसला यूं हीं नहीं किया। ओम प्रकाश पूर्वांचल के ऐसे नेता हैं जिन्होंने बगैर किसी संसाधन के सिर्फ और सिर्फ जाति के आधार पर पार्टी खड़ी की और सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करने में कामयाब रहे। 

करीब 15 सालों तक संघर्ष के बाद 2017 में सुभासपा ने किया था एलायंस
करीब 15 सालों तक संघर्ष के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा जैसी बड़ी पार्टी से समझौता करने का मौका मिला। अगर कहें कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पिछले चुनावों में उन्हें मिलने वाले वोटों की ताकत देख उन्हें साथ लेने का कूटनीतिक फैसला लेने पर मजूबर हुआ, तो गलत न होगा। जुलाई 2016 में विधानसभा चुनावों से पहले अमित शाह ने मऊ के रेलवे मैदान में उनके साथ रैली कर उन्हें साथ लेने की घोषणा कर पूर्वांचल में बड़ा दाव खेला था। इसका असर भी हुआ। सुभासपा के चार विधायक चुने गए। इसके बावजूद अपनी पार्टी और कैडर को उन्होंने शांत नहीं बैठने दिया। राज्य मंत्रिमंडल में वाजिब हिस्सेदारी न मिलने से नाराज़ ओम प्रकाश न केवल भाजपा को आड़े हाथों लेते रहे, बल्कि सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे।

Read Also: मतदान से 48 घंटे पहले घोषणा पत्र जारी करने पर चुनाव आयोग ने लगाया प्रतिबंध

सपा-बसपा गठबंधन के बाद बीजेपी के लिए जरूरी था सुभासपा से गठजोड़
अंतत: भाजपा ने आयोगों व निगमों में सुभासपा के कार्यकर्ताओं को समायोजित कर 2019 में सहर्ष साथ लेने के लिए कदम बढ़ाए। अपनी इसी ताकत के साथ ही हर जिले में सम्मेलन कर कुछ अन्य छोटी जातियों को लामबंद करने की ताकत के चलते ओम प्रकाश राजभर पर अन्य सियासी दल- जैसे सपा और कांग्रेस डोरे डालते रहे। इसी अहमियत के चलते ओम प्रकाश लगातार भाजपा पर दबाव बनाते रहे। भाजपा भी उनसे दूरी बनाने का साहस नहीं कर सकी। अब भाजपा व सुभासपा पूर्वांचल में एक बार फिर विरोधियों को चुनौती दें तो हैरत नहीं। ओपी राजभर ने साल 2002 में सुभासपा की स्थापना की थी। सुभासपा ने 2002 विधानसभा, 2004 लोकसभा, 2007 विधानसभा, 2009 लोकसभा और 2012 विधानसभा चुनाव लड़े। 

साल 2009 के आम चुनावों में अकेले दम हासिल किए थे अच्छे खासे वोट
सुभासपा ने साल 2014 में मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल व दो-तीन अन्य छोटे दलों के साथ समझौता किया। इन चुनावों में सुभासपा गठबंधन के प्रत्याशियों को 19 लोकसभा सीटों पर 25 हजार से 1.5 लाख के बीच वोट मिले थे। सुभासपा ने साल 2009 के आम चुनावों में अकेले दम पर ही अच्छे वोट बटोरे थे। साल 2009 के लोकसभा चुनावों में चंदौली में सुभासपा को 1.03 लाख वोट, बलिया में सुभासपा को 75 हजार वोट, सलेमपुर में सुभासपा को 65 हजार वोट, घोसी में सुभासपा को 75 हजार वोट, वाराणसी में सुभासपा को 40 हजार वोट और बस्ती में सुभासपा को करीब 45 हजार वोट मिले थे।

Read Also: लोकसभा चुनाव 2019: भाजपा चुनाव समिति की बैठक में दस बड़े राज्यों पर हुई चर्चा

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Read Why it is necessary for BJP to form an alliance with Om Prakash Rajbhar Party SBSP in Lok Sabbha Elections 2019 in Uttar Pradesh