Rao Inderjit Singh defeated in 13th LS Polls after winning one percent more votes - ...तब एक फीसदी ज्यादा वोट पाने के बाद भी हार गए थे राव इंद्रजीत सिंह DA Image

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...तब एक फीसदी ज्यादा वोट पाने के बाद भी हार गए थे राव इंद्रजीत सिंह

13वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में निर्वतमान सांसद राव इंद्रजीत सिंह को 37 फीसदी वोट मिले थे। बावजूद इसके वह चुनाव हार गए थे। वहीं 15वीं लोकसभा चुनाव में इससे कम वोट पाने के बाद भी उन्हें विजयश्री मिली थी। राव इंद्रजीत सिंह को पिछले लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 48 फीसदी वोट मिले थे। यहां से चुनाव जीत कर संसद पहुंचने वालों में अब तक राव विरेंद्र सिंह के नाम सर्वाधिक 60.68 फीसदी वोट हासिल करने का रिकॉर्ड है।

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पांचवीं लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक केवल दो बार यह सीट भाजपा के खाते में गई है। पहली बार डॉ. सुधा यादव ने महेंद्रगढ़ गुड़गांव सीट से 56.49 फीसदी वोट हासिल कर यह सीट भाजपा के खाते में डाली थी। वहीं दूसरी बार राव इंद्रजीत सिंह ने पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ कर विजय हासिल किया था। गौरतलब है कि 1971 में हुए पांचवीं लोकसभा चुनाव के दौरान गुरुग्राम लोकसभा सीट थी। लेकिन इसके बाद इस सीट को महेंद्रगढ़ में जोड़ दिया गया था। लेकिन वर्ष 2009 में हुए 15वीं लोक सभा चुनाव के दौरान एक बार फिर गुरुग्राम सीट बन गई।

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सहानुभूति से खुला था भाजपा का खाता : महेंद्रगढ़-गुरुग्राम लोकसभा सीट पर भाजपा का खाता सहानुभूति से हुआ था। 1999 में भाजपा ने सहानुभूति के वोट हासिल करने के लिए करगिल के शहीद की पत्नी डॉ. सुधा यादव को टिकट दिया था। उस समय डॉ. सुधा यादव को 56.49 फीसदी वोट हासिल हुए थे। जबकि कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे उनके प्रतिद्वंदी राव इंद्रजीत सिंह महज 37 फीसदी वोट तक सिमट कर रह गए थे। 

84 के बाद किसी को नहीं मिले 50 फीसदी वोट : वर्ष 1984 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव में अंतिम बार किसी प्रत्याशी ने यहां से सर्वाधिक 60 फीसदी वोट हासिल किया था। इतने वोट निर्वतमान सांसद राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव विरेंद्र सिंह को मिले थे। 

एक बार हुई कांटे की टक्कर : 1989 में हुए 9वें लोक सभा चुनाव के दौरान यह सीट महेंद्रगढ़ के साथ थी। उस समय राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव विरेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें कुल 47.83 फीसदी वोट मिले। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी राम सिंह को 47.28 फीसदी वोट मिले थे।

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