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लोकसभा चुनाव 2019: प्रियंका गांधी ने विरासत के बूते पकड़ी पूर्वांचल की नब्ज़

priyanka gandhi in lok sabha election campaign

प्रियंका गांधी का गंगा किनारे 140 किमी लंबा सफर बुधवार को भले ही खत्म हो गया लेकिन वह कांग्रेस के लिए एक नए सिलसिले की शुरुआत कर गईं। यूं कहें कि वह इंदिरा गांधी की विरासत के बूते पूर्वांचल की नब्ज़ छू गईं तो गलत न होगा।

गंगा यात्रा के जरिये वह यूपी में विपक्ष को न केवल सटीक संदेश देने में कामयाब रहीं बल्कि अपने सियासी समीकरण भी बखूबी साधे। चाहे साफ्ट हिन्दुत्व का मुद्दा हो या मुस्लिमों को साथ लेने की कवायद या पिछड़ी जातियों से पुराने रिश्ते पुनः कायम करने की कोशिशें...प्रियंका का दौरा पूरी तरह सफल ही रहा।

प्रियंका का ट्रंप कार्ड पूरे दौरे में न केवल पूरी रंगत में रहा, बल्कि उमड़ी भीड़ और कांग्रेसियों का जोश भाजपा व सपा-बसपा के खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगा।

सौम्य भाषा और सधा निशाना-
पूरे दौरे में प्रियंका ने मौजूदा दौर की निजता का हनन करने वाली टिका-टिप्पणी की बयानबाजी पर भी कठोर प्रहार भी किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला जरूर बोला लेकिन पूरी मर्यादा के साथ...। ऐसा कर वह यह संदेश देने में कामयाब रहीं कि देश में साफ-सुथरी राजनीति को ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।

मुस्लिमों को भी संदेश
प्रयागराज से भदोही होते हुए वाराणसी के दौरे में वह जिससे भी मिलीं एक अलग आत्मीय छाप छोड़ी। बच्चियों से मिलना, गले लगाना, फोटो खिंचवाना...। इंदिरा गांधी के करीबी पुराने पुरोहितों के मुलाकात या फिर मज़ार के सज्जादानशीन से मिलकर दादी इंदिरा गांधी के पुराने रिश्ते ताज़ा करना...। संदेश देने की कोशिश की गई कि कांग्रेस सौम्य सियासत की पक्षधर हैं और सही मायने में कांग्रेस ही सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। वहीं जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की विरासत को आगे भी बढ़ाया।


भाजपा के दांव से ही वार-
कांग्रेस ने दरअसल प्रियंका का दौरा पूरे सियासी गणित को ध्यान में रखकर तय किया। जिस रूट पर वह जलमार्ग से निकलीं, उस इलाके में बसने वाली जातियां कभी कांग्रेस का वोटबैंक रहीं हैं। चाहे निषाद, बिंद, लोधी हों या फिर दलित...। वाराणसी में अपना दल (कृष्णा गुट ) की पल्लवी पटेल को सााथ लेकर मंच पर रहना भी कुर्मी जाति के बहुलता वाले इलाके में संदेश देने के लिए काफी रहा। प्रियंका इन जातियों से खुद को जोड़ने का प्रयास करती दिखीं। कुछ ऐसे ही समीकरणों के सहारे भाजपा ने पूर्वांचल में वर्ष 2014 में सारे गणित पलट दिए थे।

साफ्ट हिन्दुत्व का चेहरा-

प्रियंका ने साफ्ट हिन्दुत्व कार्ड को साधकर भाजपा को उसके ही तीर के सहारे घेरा। गंगा पूजन, सीतामढ़ी मंदिर में पूरे हिन्दू रीति-रिवाज़ के साथ पूजा-अर्चना और फिर विंध्वासिनी देवी मंदिर में लाल साड़ी में शक्ति पूजन...। वाराणसी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन कर प्रियंका ने पूर्वांचल में साफ्ट हिन्दुत्व को भी साधा। उन्होंने इसके जरिये ब्राह्मण कार्ड भी खेलने की कोशिश की। दरअसल पूर्वांचल में ब्राह्मण अरसे तक कांग्रेस की झोली में रहे हैं और कांग्रेस की कोशिश है कि भाजपा से असंतुष्ट चल रहे ब्राह्मणों को अपने पाले में किया जा सके।

प्रियंका के आगाज से उठे सवाल

प्रियंका के दौरे से एक बात तो साफ हो गई कि कांग्रेस हर वह दांव आजमा लेना चाहती है जिससे यूपी में वह पुनर्जीवित हो सके। यही वजह रही कि प्रियंका के सहारे कांग्रेस ने परंपरागत वोटबैंक को एक बार फिर सहेजने का प्रयास किया। पर, बडा सवाल है कि क्या प्रियंका के इस दौरे से यूपी की अतिपिछड़ी जातियां, ब्राह्मणों और उसके परंपरागत वोटर रहे मुस्लिम एक बार फिर उससे जुड़ सकेंगे?

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  • Web Title:priyanka gandhi ganga yatra and election campaign in Purvanchal