पटना साहिब लोकसभा सीट: रविशंकर-शत्रुघ्न के बीच सीधा मुकाबला
बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट से इस बार महामुकाबला देखने को मिल रहा है। पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का मुकाबला भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामने वाले शत्रुघ्न...

बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट से इस बार महामुकाबला देखने को मिल रहा है। पटना साहिब से भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का मुकाबला भाजपा छोड़ कांग्रेस का हाथ थामने वाले शत्रुघ्न सिन्हा से है। बिहारी बाबू के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा प्रसिद्ध अभिनेता, दो बार के सांसद और एक प्रखर वक्ता हैं। वहीं दूसरी ओर रविशंकर प्रसाद भी जाने-माने वकील और कुशल वक्ता हैं। वह केंद्रीय आईटी और कानून मंत्री हैं।
भाजपा के बागी और अब कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा जहां लगातार तीसरी बार पटना साहिब से जीत के लिए जोर लगा रहे हैं। वहीं भाजपा के रविशंकर प्रसाद पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। इस तथ्य के बाद की पटना साहिब भाजपा का गढ़ रही है और कायस्थ मतदाताओं का भाजपा के प्रति काफी झुकाव है बावजूद इसके सबकुछ इतना आसान भी नहीं है। राज्य की राजधानी की सीट होने के नाते पटनासाहिब हमेशा ही वीआईपी सीट की श्रेणी में गिनी जाती रही है। लेकिन इस बार चुनाव में इस सीट पर पूरे देश की नजर है। इसका मुख्य कारण है यहां के प्रत्याशियों का बड़ा कद।
शत्रुघ्न सिन्हा अपने बदले हुए सिंबल पर भी यह सीट हासिल करने में कामयाब होंगे या नहीं, यह देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, रविशंकर प्रसाद कैसा प्रदर्शन करते हैं, यह भी जानने को सभी उत्सुक हैं। वर्ष 2014 में शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस के कुणाल सिंह को ढाई लाख से अधिक मतों से हराया था। कुणाल सिंह भोजपुरी फिल्म के सुपरस्टार रहे हैं। 2009 की बात करें तो शत्रुघ्न सिन्हा राजद के विजय कुमार को यहां से हराए थे। जबकि 2009 में अभिनेता शेखर सुमन कांग्रेस के टिकट पर यहां चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे।
इस बार के चुनाव में दो बार के विजेता शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। महागठबंधन की वजह से उन्हें कायस्थ वोटों के अलावा मुस्लिम और यादव समुदाय का वोट मिल सकता है। वहीं रविशंकर प्रसाद भी कायस्थ वोटों का रुख अपनी तरफ मोड़ने की कोशिस करेंगे। साथ ही जदयू के साथ होने की वजह से उन्हें कुर्मी और अतिपिछड़ा वोटों का भी लाभ हो सकता है।
कायस्थों का दबदबा
पटना साहिब सीट पर जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा है। लगभग 5 लाख से ज्यादा कायस्थों के बाद यादव और राजपूत मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। सामान्य तौर पर यहां के कायस्थ वोटरों का झुकाव भाजपा की तरफ ही रहता है। लेकिन इस बार चुनाव मैदान में दोनों ही तरफ बड़े कायस्थ चेहरे खड़े होने की वजह से वोट बंटने के कयास लगाए जा रहे हैं।
छह विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा काबिज
पटना साहिब लोकसभा सीट में छह विधानसभा सीटें आती हैं। इन विधानसभा सीटों में बख्तियारपुर, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, दीघा और फतुहा सीटें शामिल हैं। इनमें पांच सीटें भाजपा के पास है। सिर्फ फतुहा सीट राजद के पास है। वर्ष 2015 में विधानसभा का चुनाव हुआ था। तब बिहार में अधिकतर सीटें महागठबंधन ने जीता था।
नए परिसीमन में बना पटना साहिब
पटना साहिब सीट का गठन वर्ष 2008 में नए परिसिमन के तहत हुआ था। इसके बाद से यहां पर दो लोकसभा चुनाव हुए हैं। दोनों ही बार भाजपा की यहां से जीत हुई है। इसके पहले यह सीट पटना लोकसभा के नाम से जानी जाती थी। पटना और बाढ़ लोकसभा सीट को नए परिसीमन में खत्म कर दिया गया। वर्ष 2008 में पटना साहिब और पाटलिपुत्र लोकसभा का गठन हुआ। पटना और बाढ़ के हिस्से को ही पटना साहिब और पाटलिपुत्र लोकसभा के बीच बांटा गया।
मौजूदा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा
- दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं जाने माने अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा
- 2003 से 2004 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे
- 2004 में अटल सरकार में जहाजरानी मंत्री बने
- 2009 में पहली बार पटना साहिब से सांसद बने ’ 2014 में दोबारा पटना साहिब से सांसद चुने गए
- शत्रुघ्न सिन्हा हाल ही में भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए
पुरातन नाम
- पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र या पाटलीपट्टन था जो 600 ईसा पूर्व इतिहास में पाया गया। पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है।
- चंद्रगुप्त मौर्य और समुद्रगुप्त जैसे पराक्रमी शासकों की यह राजधानी रही।
- कौटिल्य जैसे विद्वान यहां रहे और अर्थशास्त्र जैसी रचना लिखी।
कब कौन जीता (पटना लोकसभा)
1952- सारंगधर सिन्हा- कांग्रेस
1957- सारंगधर सिन्हा- कांग्रेस
1962- रामदुलारी सिन्हा- कांग्रेस
1967- रामावतार शास्त्री- सीपीआई
1971- रामावतार शास्त्री- सीपीआई
1977- महामाया प्रसाद सिन्हा- जनता पार्टी
1980- रामावतार शास्त्री- सीपीआई
1984- सीपी ठाकुर- कांग्रेस
1989- शैलेंद्रनाथ श्रीवास्तव- भाजपा
1991- रामकृपाल यादव- जनता दल
1996- रामकृपाल यादव- जनता दल
1998- सीपी ठाकुर- भाजपा
1999- सीपी ठाकुर- भाजपा
2004- रामकृपाल यादव- राजद
पटना साहिब लोकसभा
2009- शत्रुघ्न सिन्हा- भाजपा
2014- शत्रुघ्न सिन्हा- भाजपा
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