Nothing to lose for SP-BSP-RLD Alliance in West UP but their is much to gain in first phase of Lok Sabha Election in Uttar Pradesh - चुनावी बिसात: वेस्ट यूपी में गठबंधन के पास खोने को कुछ नहीं, पाने को बहुत कुछ DA Image
15 नबम्बर, 2019|11:38|IST

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चुनावी बिसात: वेस्ट यूपी में गठबंधन के पास खोने को कुछ नहीं, पाने को बहुत कुछ

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जहां पिछली बार कुछ भी न मिला, वहां इस बार पाने को बहुत कुछ है। कुछ ऐसा ही हाल सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का है। इनके शीर्ष नेता देवबंद में हुई पहली रैली से मिले रिस्पांस से खासे उत्साहित हैं। पर पश्चिमी यूपी की चुनावी बिसात पर लगता है कि एक तरफ जातीय ध्रुवीकरण है तो दूसरी ओर धार्मिक ध्रुवीकरण और विकास का सवाल भी अपनी जगह है।

पहले चरण की सभी सीटों को जहां भाजपा अपना पूरा कब्जा बरकरार रखने के लिए एड़ी चोटी जोर लगाये हुए है, वहीं कांग्रेस भी भाजपा को निशाने पर रख रही है। कांग्रेस, बसपा, सपा, रालोद इन सभी दलों को पिछले चुनाव में अभी के पहले चरण की सीटों में एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन इस बार गठबंधन चाहता है कि पहले चरण के इम्तहान में इतना माहौल बना दिया जाए ताकि ज्यादा सीटें निकलना सुनिश्चित हो। साथ ही आगे के चरण वाले चुनावों पर इसका असर पड़े।

गर्माया माहौल
पहला चरण वाली सीटों पर अल्ससंख्यक वर्ग को लुभाने की होड़ पहले कम दिख रही थी, लेकिन सहारनपुर के देवबंद की रैली में गठबंधन की ओर से मुसलमानों से समर्थन मांगने की अपील के बाद माहौल खासा गर्मा गया है। भाजपा ने इसे मुद्दा बना कर गठबंधन को निशाने पर लिया है।

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कांग्रेस कर रही जतन
कांग्रेस भी मुस्लिमों वोटरों को रिझाने  के लिए खास जतन कर रही है। गठबंधन की ओर से सहारनपुर, कैराना और मेरठ में मुस्लिम वर्ग के प्रत्याशी उतारे गए हैं। सहारनपुर में कांग्रेस ने भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। ऐसे में जातीय समीकरणों के हिसाब से बिछाई गई चुनावी बिसात पर अब धार्मिक ध्रुवीकरण के जरिए चुनावी माहौल गर्माने लगा है। मुजफ्फनगर के दंगों की याद दिलाई जाने लगी है तो पलायन व लव जेहाद जैसे पुराने मुद्दे भी उठ रहे हैं। गठबंधन के नेता भाजपा व कांग्रेस को एक साथ निशाने पर रखे हुए हैं।

अजित की किस्मत का फैसला
गठबंधन के तहत पहले चरण में बसपा चार सीटों पर, सपा व रालोद दो-दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। पहले ही चरण में रालोद के दो प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी की किस्मत का फैसला होना है। तो कैराना सीट भी गठबंधन के लिए चुनौती कि कैसे उपचुनाव में हासिल जीत को बरकरार रखा जाए और सहारनपुर तो विपक्षी दलों की सियासत की प्रयोगशाला है।

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पहले चरण की आठ सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशी-

सीट          प्रत्याशी              पार्टी
सहारनपुर          हाजी फजलुर्रहमान          बसपा
कैराना          तबस्सुम हसन              सपा
मुजफ्फरनगर          अजित सिंह             रालोद
बिजनौर         मलूक नागर              बसपा
मेरठ         हाजी मोहम्मद याकूब         बसपा
बागपत         जयंत चौधरी             रालोद
गाजियाबाद         सुरेश बंसल             सपा
गौतमबुद्धनगर         सतबीर नागर             बसपा

 

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