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लोकसभा चुनाव 2019: यूपी के पलायन करनेवाले श्रमिकों के लिए नहीं है चुनावी मौसम

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रायबरेली के रहनेवाले 27 वर्षीय अनुराग सोनी और उसकी 19 साल की पत्नी फूलमति 150 मीटर लंबी अनारक्षित टिकटों की लाईन में लगी थी, ताकि वे लखनऊ से मुंबई पुष्पक एक्सप्रेस के जरिए जा सकें। सोमवार को यह दंपत्ति पहले दो बस और उसके बाद ऑटो रिक्शा के जरिए राज्य की राजधान पहुंचे

पीछे खड़े सोनी ने बताया- “पहले दिन हम ट्रेन नहीं पकड़ पाए क्योंकि जनरल कोच की सारी बॉगियां भरी हुई थी। इतनी भी जगह नहीं थी कि उसमें खड़ा हुआ जा सके। इसलिए, हमने यह फैसला किया कि स्टेशन पर ही रुक जाएं।” इसलिए दंपत्ति ने पूरी रात रेलवे प्लेटफॉर्म पर ही गुजार दी। मंगलवार को यह अपने सफर पर आगे के लिए रवाना हुए।

पांचवीं क्लास की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़नेवाले सोनी मुंबई में एक कंस्ट्रक्शन वर्कर हैं। वह साल में बमुश्किल एक बार रायबरेली आते हैं, खासकर होली के आसपास और कुछ हफ्ते अपने घर में बिताते हैं। इस बार होली 21 मार्च को थी।

इसके अलावा, जो अन्य लोग लाईन में खड़े थे वे रायबरेली, बहराइच, सीतापुर, गोंडा और यूपी के पूर्वोत्तर, और मध्य जिले के लोग थे। उन सभी की कहानियां भी लगभग उसी तरह से हैं।

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उन्नाव के रहनेवाले अमरनाथ की स्थिति बाकियों से थोड़ी बेहतर है क्योंकि वह बीए डिग्रीधारी हैं और मुंबई के विरार में एक कन्फैक्शनरी फैक्ट्री में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हैं। इनमें से कोई भी मुंबई को पसंद नहीं करता है, लेकिन इन सभी की एक ही वजह है और वो है- यूपी में नौकरी का न होना।

वर्मा पिछले साल ग्रेजुएट होने के बाद मुंबई का रूख किया था। उनके भाई मास्टर डिग्री धारक हैं लेकिन नौकरी नहीं मिलने के चलते परिवार के साथ ही खेतीबाड़ी का काम करते हैं। वर्मा ने अपने सपनों को हकीकत करने के लिए शहर का रूख किया।

उन्होंने कहा- “अगर हमारे नेता नौकरियों के लिए कुछ किया होता तो हमें मवेशियों की तरह मुंबई सफर नहीं करना पड़ता और नही ‘भैया’ कहा जाता।”

यह चुनावी समय है और सभी पार्टियों के उम्मीदवार वोट के लिए नौकरी देने समेत कई तरह के वादे कर रहे हैं। पुष्पक एक्सप्रेस में सवार यात्रियों का यह मानना है कि उनके वोट से उनके जीवन स्तर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होनेवाला है।

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  • Web Title:No poll season for Uttar Pradesh migrant workers