Neutrality of Maoists threatens heavy vote in Naxal areas walks to vote for 30km - बुलेट की धमकी पर भारी बैलट, घोर नक्सल इलाकों में बरसे वोट, 30 किमी तक वोट डालने पैदल चले DA Image

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बुलेट की धमकी पर भारी बैलट, घोर नक्सल इलाकों में बरसे वोट, 30 किमी तक वोट डालने पैदल चले

झारखंड में पहले चरण के लोकसभा चुनाव में लाल आतंक पर लोकतंत्र जीत गया। घोर नक्सल प्रभावित इलाकों के इन तीनों लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं ने माओवादियों के वोट बहिष्कार के फरमान को नकार दिया। सुरक्षित मतदान के लिए निर्वाचन आयोग ने नक्सल प्रभावित इलाकों के 132 मतदान केंद्रों के स्थान बदल दिए थे। इसके बाद भी मतदाताओं ने 30-30 किलोमीटर पैदल चलकर मतदान किया। यहां तक कि माओवादियों की ओर से गांव में ही मतदाताओं को रोकने की कोशिश भी बेअसर हो गई। 

लातेहार जिले के सरयू स्थित घने जंगल के इलाकों वाले गांवों के मतदान केंद्रों को हटाकर स्थानीय प्रशासन ने पेशरार प्रखंड के दुग्गू में कर दिया था। मतदान केंद्र के अचानक बदले जाने के बावजूद लगभग 300 मतदातओं ने जुलूस की शक्ल में 30 किलोमीटर पैदल चलकर मतदाता धर्म का निर्वाह किया। दोपहर के 11 बजे तक दुग्गू के दोनों मतदान केंद्रों पर केवल डेढ़ दर्जन वोट ही पड़े हुए थे। केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों और झारखंड पुलिस के जवानों ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। 

मनिका, सिमरिया, बिशुनपुर में वोट की चोट 
मनिका, सिमरिया और बिशुनपुर जैसे घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में भी मतदाताओं ने जमकर वोट की चोट दी। चतरा लोकसभा क्षेत्र के तहत सिमरिया विधानसभा क्षेत्र वाले इलाके में तो दोपहर के एक बजे तक ही 46.70 फीसदी वोट पड़ चुके थे। मनिका में भी सूरज के चढ़ने तक 42.39 फीसदी मतदान हो चुका था। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के बिशुनपुर विधानसभा क्षेत्र में भी एक बजे दिन तक मतदान का आंकड़ा 50.40 फीसदी पार कर चुका था। 

टीपीसी के गढ़ में मतदाताओं ने हार नहीं मानी
खुद को नक्सली संगठन कहने वाली तृतीय प्रस्तुति कमेटी यानी टीपीसी के गढ़ में भी मतदाता बेखौफ होकर मतदान करने के लिए निकले। सिमरिया और मनिका जैसे इलाकों के कई मतदाता तो एक दिन पहले ही अपने गांव छोड़कर मतदान के लिए शिफ्ट किए गए मतदान केंद्रों वाले जगहों पर आ चुके थे। ईवीएम का बटन दबाने के बाद ही लोगों ने अपने गांव के लिए प्रस्थान किया। 

पांच हेलीकॉप्टर से होती रही निगरानी
भारत निर्वाचन आयोग ने माओवादियों के खौफ को बेअसर करने के लिए पूरे इंतजाम किए थे। पांच हेलीकॉप्टरों से नक्सल प्रभावित इलाकों की आसमान  से निगरानी की जा रही थी। मतदाताओं को माओवादियों की ओर से रोके जाने की स्थिति से निपटने के लिए सूचना तंत्र को प्रभावी बनाया गया था। घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदानकर्मियों को भी हेलिकॉप्टर से ही उतारा गया था। ऐसे मतदान केंद्रों के मतदानकर्मी क्लस्टर केंद्रों तक पहुंच चुके हैं। उन्हें हेलिकॉप्टर से जिला मुख्यालयों तक लाया जाएगा।   

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