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लोकसभा चुनाव 2019- सुरक्षित सीटों पर एनडीए का ही रहा दबदबा

Bihar chief minister Nitish Kumar, his deputy Sushil Modi and Union minister Ram Vilas Paswan at the

लोकसभा क्षेत्रों के नए परिसीमन के बाद से बिहार में सासाराम को छोड़ अन्य सभी छह सुरक्षित सीटों पर एनडीए का ही कब्जा रहा है। परिसीमन के बाद बिहार में तीन बार लोकसभा के चुनाव हुए। इनमें पहले यानी सिर्फ 2009 में सिर्फ सासाराम सुरक्षित सीट पर कांग्रेस की मीरा कुमार चुनाव जीती थीं। इसके अलावा 2009 में शेष पांच और 2014 में सभी छह सुरक्षित सीटों पर एनडीए का ही कब्जा रहा। अब सबकी नजरें 2019 के चुनाव परिणाम पर है कि कौन सी सुरक्षित सीटें किस पार्टी के खाते में जाती है। 

वोट प्रतिशत बढ़ा, लेकिन हारीं मीरा 
कांग्रेस की मीरा कुमार को सासाराम में 2009 में जीत मिली थी। उन्होंने भाजपा के मुनीलाल को हराया था। तब मीरा को 32 प्रतिशत वोट मिले थे और मुनीलाल को 24.92 प्रतिशत। राजद यहां तीसरे नंबर पर था, जिसे 18.28 प्रतिशत वोट मिले थे। 2014 में मीरा कुमार ने 35.72 प्रतिशत वोट लाया, पर भाजपा के छेदी पासवान से वह हार गईं। इस तरह 2009 से अधिक वोट लाकर भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। छेदी पासवान को 43.19 प्रतिशत वोट मिले थे। 2009 में सासाराम में कुल 42.70 वोट पड़े थे, जबकि 2014 में 52.67 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस तरह देखें तो वोट अधिक पड़े तो परिणाम भी बदल गया। 2019 में सासाराम में 51.39 प्रतिशत वोट पड़े हैं। इस बार रिजल्ट किसके पक्ष में आता है, यह देखना दिलचस्प होगा। 

सुरक्षित सीट हाजीपुर में 2009 में लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान जदयू के रामसुंदर दास से हार गये थे। 2009 में हाजीपुर में काफी कम 41.83 प्रतिशत वोट पड़े थे। रामविलास पासवान को 37.61 प्रतिशत और रामसुंदर दास को 44.44 प्रतिशत वोट मिले थे। 2014 में लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने 50.31 प्रतिशत वोट लाकर बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के संजीव प्रसाद को हराया जिन्हें 25.41 प्रतिशत वोट मिले। जदयू उम्मीदवार रामसुंदर दास 10.58 प्रतिशत वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे। 2014 में हाजीपुर में कुल 54.85 प्रतिशत वोट पड़े। अर्थात 2009 के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत अधिक। वोट बढ़े तो चुनाव परिणाम भी बदला। 2019 में हाजीपुर में 55.22 प्रतिशत वोट पड़े हैं। इस बार लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस उनकी जगह खड़े हैं। राजद से शिवचंद्र राम यहां मैदान में हैं। 

सुरक्षित सीट जमुई की बात करें तो यहां 2009 में जदयू और 2014 में लोजपा उम्मीदवार विजयी हुए। 2009 में जदयू तो 2014 में लोजपा एनडीए का अंग था। इस तरह दोनों ही बार इस सीट पर एनडीए का ही कब्जा रहा। 2019 में लोजपा के चिराग पासवान और रालोसपा के भूदेव चौधरी में टक्कर है। 2014 यहां 50.01 प्रतिशत वोट पड़े थे। इसका 36.79 प्रतिशत वोट लाकर चिराग ने 25.71 वोट लाने वाले राजद के सुधांशु शेखर को हराया। तब जदयू के उदय नारायण चौधरी को 25.60 प्रतिशत वोट मिले थे।  2009 में यहां कुल मात्र 38.13 वोट पड़े थे। इसमें 33.36 प्रतिशत जदयू के भूदेव चौधरी को और राजद के श्याम रजक को 27.79 प्रतिशत वोट मिले। इस तरह देखें तो वोटिंग कम हुई या अधिक दोनों ही बार एनडीए ने यहां बाजी मारी। अब 2019 में क्या होता है, यह 23 मई तो पता चलेगा। इस बार यहां 55.27 प्रतिशत वोट पड़े हैं। 

गया में 2009 और 2014 में भाजपा के हरि मांझी चुनाव जीते। 2009 में यहां 42.45 तो 2014 में 53.92 वोट पड़े थे। दोनों चुनाव में क्रमश: 43.65 और 40.31 प्रतिशत वोट प्राप्त कर हरि मांझी जीते। 2014 में जदयू के जीतन राम मांझी को यहां 16.29 प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 में गया में 56.16 प्रतिशत वोट पड़े हैं। अब देखना है कि पिछले दो चुनावों से इस बार अधिक वोट पड़े हैं तो किसके पक्ष में यह जाता है। यहां से ‘हम’ के जीतनराम मांझी व जदयू के विजय मांझी आमने सामने हैं। 

समस्तीपुर में 2009 में जदयू के महेश्वर हजारी 44.37 वोट लाकर लोजपा के रामचंद्र पासवान को हराये थे। तब जदयू एनडीए का हिस्सा था। रामचंद्र को 26.52 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस 15.67 प्रतिशत वोट लाकर तीसरे स्थान पर रही थी। उस समय यहां कुल 44.54 वोट पड़े थे। 2014 में भी परिदृश्य करीब-करीब यही रहा, पर विजयी उम्मीदवार बदल गये। 2014 में यहां लोजपा के रामचंद्र पासवान 31.33 प्रतिशत वोट लाकर मात्र 6,872 की बढ़त से चुनाव जीते, जबकि कांग्रेस के अशोक कुमार 30.53 फीसदी वोट लाकर दूसरे और जदयू के महेश्वर हजारी 23.18 प्रतिशत वोट लाकर तीसरे स्थान पर चले गये। 2014 में यहां 57.38 प्रतिशत वोट पड़े थे। 2019 में यहां 61.06 प्रतिशत वोट पड़े हैं। इस बार यहां लोजपा के रामचंद्र पासवान और कांग्रेस के अशोक राम की बीच मुख्य लड़ाई है। वोट फिर अधिक पड़े हैं, पर रिजल्ट क्या आता है, यह 23 मई को पता चलेगा। 

गोपालगंज लोकसभी सीट 2009 में जदयू के पास थी, जो 2014 में भाजपा के पास आ गई। 2019 में फिर जदयू के उम्मीदवार यहां एनडीए से खड़े हैं। वहीं राजद से सुरेंद्र राम मैदान में हैं। 2009 में जदयू के पूर्णमासी राम ने 39.64 प्रतिशत वोट लाकर 31.22 प्रतिशत वोट लाने वाले राजद के अनिल कुमार को हराया था। तब बसपा के जनकराम 9.42 प्रतिशत वोट लाकर तीसरे स्थान पर थे। तब यहां 37.40 प्रतिशत कुल वोट पड़े थे। 2014 में यहां कुल 54.60 प्रतिशत वोट पड़े। तब भाजपा से जनक राम  52.99 वोट लाकर विजयी बने। दूसरे नंबर पर कांग्रेस की ज्योति भारती रहीं। इन्हें 21.23 प्रतिशत वोट मिले। जदयू के अनिल कुमार 11.11 प्रतिशत वोट  लाकर तीसरे स्थान पर रहे। इस तरह देखें तो वोट का प्रतिशत हर बार विभिन्न उम्मीदवारों को अलग-अलग मिले, पर जीत एनडीए की ही हुई। 2019 में यहां 55.28 प्रतिशत वोट पड़े हैं, पर रिजल्ट क्या आता है, यह देखना दिलचस्प होगा।  

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  • Web Title:NDAs strong influence on safe seats in Bihar