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नारी शक्ति: संसद पहुंचीं पत्थर तोड़ने वाली महादलित महिला भगवती देवी

ग्यारहवीं लोकसभा में 1996 में गया से चुनाव जीत कर संसद में पहुंचने वाली भगवती देवी की कहानी बाकी सांसदों से काफी अलग है। एक पत्थर तोड़ने वाली महादलित समाज की महिला संसद में पहुंचीं। न सिर्फ वह सांसद...

नारी शक्ति:  संसद पहुंचीं पत्थर तोड़ने वाली महादलित महिला भगवती देवी
लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली।Thu, 16 May 2019 12:44 PM
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ग्यारहवीं लोकसभा में 1996 में गया से चुनाव जीत कर संसद में पहुंचने वाली भगवती देवी की कहानी बाकी सांसदों से काफी अलग है। एक पत्थर तोड़ने वाली महादलित समाज की महिला संसद में पहुंचीं। न सिर्फ वह सांसद बनीं बल्कि अपने संसदीय जीवन में महिलाओं अधिकारों की आवाज बनीं। उन्होंने लोकसभा विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने के लिए आवाज भी उठाई।

गया से जीता चुनाव :

लालू प्रसाद की पार्टी जनता दल ने 1996 में गया (सुरक्षित) सीट से भगवती देवी को लोकसभा की जंग में उतारा। भगवती देवी यहां से जीतकर दिल्ली पहुंच गईं। तब उन्होंने भाजपा के कृष्ण कुमार चौधरी को हराया था। हालांकि 1998 में हुए चुनाव में भाजपा उम्मीदवार कृष्ण कुमार चौधरी ने राष्ट्रीय जनता दल उम्मीदवार भगवती देवी को पराजित कर दिया।

1969 में पहली बार विधायक:

पत्थर तोड़कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाली महिला भगवती देवी इससे पहले सन 1969 में बिहार विधानसभा का चुनाव जीत चुकी थीं। पर उन्हें राजनीतिक में लाने का श्रेय दो समाजवादी नेताओं को जाता है।

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संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से भगवती देवी को टिकट मिला :

सन 1968 में बाराचट्टी की रहने वाली भगवती देवी जीविकोपार्जन के लिए गया शहर के पास सड़क पर पत्थर तोड़ रही थीं। वे पत्थर तोड़नेवाली अन्य महिलाओं से अपने अधिकारों पर बातें कर रही थीं, उसे सुन सोशलिस्ट नेता उपेंद्र नाथ वर्मा रुक गए। वर्मा ने भगवती के बारे में राम मनोहर लोहिया को बताया। लोहिया ने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से भगवती देवी को टिकट दिया और वे 1969 में बाराचट्टी से जीत कर विधानसभा में पहुंच गईं। वे 1977 में एक बार फिर जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव जीतीं।

एक बार फिर राजनीति में :

अस्सी के दशक में भगवती देवी एक बार फिर राजनीति से दूर चलीं गई थीं। पर 1995 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने फिर भगवती देवी को बुलाकर टिकट दिया और वह एक बार फिर विधायक बनीं। एक साल बाद जनता दल ने उन्हें गया से लोकसभा की जंग में उतार दिया। कई बार चुनाव जीतने के बाद भी भागवती में कोई गुमान नहीं था। वे बिल्कुल सादगी भरा जीवन जीती थीं।

धरती की बेटी :

भगवती देवी के जीवन पर एक पुस्तक आई है धरती *की बेटी जिसे राम प्यारे सिंह ने लिखा है। खाली समय में वे सत्संग में हिस्सा लेती थीं। उनकी तीन बेटियां और *एक पुत्र हैं। भागवती के बेटे विजय मांझी भी राजनीति में हैं। उनकी बेटी समता देवी 1998 के उप चुनाव और 2015 के विधानसभा चुनाव में विधायक बनीं।

1936 में 6 नवंबर को मिथैया ग्राम में जन्म हुआ।

1969 में पहली बार विधायक चुनीं गईं।

1977 में जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बनीं

1995 में राजद के टिकट पर विधायक बनीं।

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