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नारी शक्ति : वंचित समाज के लिए समर्पित रहा जोहराबेन चावड़ा पूरा जीवन

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जोहराबेन चावड़ा ने बापू के सानिध्य में सात साल गुजारे थे। उनका पूरा जीवन वंचित समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। वे तीसरी लोकसभा 1962 में गुजरात के बनासकांठा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में पहुंची थीं। जोहराबेन गांधीवादी मूल्यों में आस्था रखती थीं और सांसद के तौर पर भी उनका जीवन अत्यंत सादगी भरा था।  

नर्सिंग का कोर्स कर समाज सेवा में : जोहराबेन अकरबभाई चावड़ा का जन्म 1923 में दो सितंबर को साबरकांठा जिले में परंतिज शहर में हुआ था। उनके पिता जामियातखान उमरखान पठान शहर के सम्मानित व्यक्ति थे। उनकी स्कूली पढ़ाई अपने शहर में ही हुई। स्कूली जीवन से ही उनकी समाज सेवा में रूचि थी। सेवा भाव के कारण ही जोहराबेन ने वर्धा जाकर नर्सिंग का कोर्स किया।

गांधीवादी अकबरभाई से विवाह : नर्सिंग का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे गुजरात विद्यापीठ में काम करने लगीं। यहीं उन्होंने गांधीवादी अकबरभाई दालुमिया चावड़ा के साथ विवाह किया। दरअसल अकबरभाई ब्रिटिश पुलिस में थे। उनकी ड्यूटी गुजरात विद्यापीठ में जासूसी के लिए लगी थी। इसी दौरान वे गांधीजी से प्रभावित होकर पुलिस की नौकरी छोड़ गांधीवादी कार्यकर्ता हो गए। बापू की सलाह पर ही दोनों ने विवाह किया।

बदलाव के लिए कार्य : बापू की सलाह पर जोहराबेन और उनके पति बनासकांठा जिले के सनाली ग्राम में गए और वहां वंचित समाज के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करना शुरू किया। यह अति पिछड़ा इलाका था जहां भील आबादी बड़ी संख्या में थी। यहां पति-पत्नी ने 1948 में सर्वोदय आश्रम खोला और बच्चों के पढ़ाने का कार्य शुरू किया। बाद में जोहराबेन कांग्रेस पार्टी की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगीं। वे बनासकांठा जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी बनीं।

भारी अंतर से चुनाव जीता : सर्वोदय आश्रम में सेवा कार्य करते हुए उनके पति अकबरभाई चावड़ा 1952 और 1957 में बनासकांठा से सांसद चुने गए थे। पर बनासकांठा में 1962 का लोकसभा चुनाव जोहराबेन ने लड़ा और अपने विरोधी को भारी अंतर से पराजित किया था।

आश्रम का दुबारा निर्माण : बाढ़ आने के कारण सनाली आश्रम तबाह हो जाने पर चावड़ा दंपति ने 1965 में सानाली आश्रम का फिर से निर्माण किया और एक बार फिर पूरे दमखम से समाजसेवा के कार्यों में जुट गए।

जोहराबेन चावड़ा : सफरनामा
1923 में दो सितंबर को उनका जन्म हुआ
1946 में गांधीवादी अकबरभाई चावड़ा से विवाह 
1948 में सानाली में सर्वोदय आश्रम की स्थापना की
1962 में तीसरी लोकसभा का चुनाव बनासकांठा से जीता
1997 में उनका गुजरात में निधन हो गया

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