DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

लोकसभा चुनाव 2019 : तीन भतीजों को लेकर भाजपा से भिड़ेंगी मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती इस बार विरोधियों से लड़ने के लिए मैदान में अकेले नहीं हैं। साथ में उनके तीन भतीजे भी हैं। पहले भतीजे के रूप में आकाश, दूसरे अखिलेश यादव और तीसरे भतीजे के रूप में जयंत चौधरी को माना जा रहा है। 

गठबंधन में इन्हीं भतीजों की अहम भूमिका भी मानी जा रही है। वजह इनकी राजनीतिक जमीन और क्षेत्र है। यही गठबंधन के लिए अहम भी माना जा रहा है। मायावती गठबंधन के साथी भतीजे रूपी इस अस्त्र और शस्त्र के सहारे भाजपा से भिड़कर बाजी पलटने को बेताब हैं।

राजनीतिक इतिहास में बसपा बहुत कम मौकों पर समझौता या कहें गठबंधन करके चुनावी मैदान में उतरी है। मुलायम सिंह यादव व कांशीराम 1993 में मिले थे तब दोनों नेताओं ने भाजपा को रोक दिया था। हालांकि, यह गठबंधन लंबा नहीं चल सका और जून 1993 में टूट गया। बसपा इसके बाद 1996 में कांग्रेस से गठजोड़ कर मैदान में आई, लेकिन रिजल्ट बेहतर न आने पर यह नाता भी टूट गया। बसपा इसके बाद एकला चलो की राह पर चुनाव लड़ती रही। मायावती के हाथ में पार्टी की कमान आने के बाद वह अपने हिसाब से लड़ी और बेहतर परिणाम लेकर आईं। 

लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2017 की असफलता के बाद अखिलेश की पहल पर मायावती ने गठजोड़ की राजनीति को आगे बढ़ाया और यूपी के उप चुनाव में बेहतर परिणाम सामने आए। सपा की कमान भतीजे अखिलेश, रालोद की कमान एक तरह से जयंत चौधरी के पास है। मायावती का अपना भतीजा आकाश उनका स्वयं हाथ बंटा रहा है। मायावती अब इन तीन भतीजों के सहारे बाजी पलटने को बेताब हैं।

 अखिलेश ने सम्मान किया
सपा की कमान अब पूरी तरह से अखिलेश के हाथ में है। मुलायम-मायावती की सालों पुरानी दुश्मनी भुलाकर अखिलेश ने राजनीति में गठबंधन की नई इबारत लिखी। दोनों दल साथ आए और भाजपा के खिलाफ बड़ा गठबंधन किया। इस गठबंधन में बसपा को 38 और सपा को 37 सीटें मिलीं। अखिलेश ने गठबंधन की मजबूती के लिए अपने कोटे से तीन सीटें रालोद को देकर गठबंधन का आकार और बड़ा किया। यह गठबंधन कितने दिन चलता है और परिणाम क्या होता है यह तो समय बताएगा, लेकिन अखिलेश मायावती के बड़े होने का पूरा सम्मान करते हुए दिखे।
आकाश बंटा रहे हाथ
मायावती के छोटे भाई आनंद के बेटे लंदन से मैनेजमेंट की पढ़ाई करके वापस लौटे हैं। मायावती भतीजे आकाश को राजनीति में आगे बढ़ा रही हैं। कहते हैं कि बसपा सोशल मीडिया की कमान भतीजे आनंद के ही हाथ में है। वह पार्टी की गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं। चुनाव आयोग ने जब मायावती पर प्रतिबंध लगाया, तो भतीजे आकाश ने ही आगरा में जाकर चुनावी सभा की कमान संभाली। यही नहीं उन्होंने चुनाव आयोग को भी बखूबी निशाने पर लिया। अगर कहा जाए तो भतीजा आकाश मायावती का हाथ बंटा रहा है।

जयंत ने संभाला मोर्चा
रालोद प्रमुख अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी ने गठबंधन में शामिल होने में देखा जाए तो अहम भूमिका निभाई। अखिलेश के मिलना हो या मायावती...। जयंत चौधरी ने आगे बढ़कर इन रिश्तों को बढ़ाया। जयंत को भी मायावती के भतीजे के रूप में ही माना जा सकता है। उनका प्रयास रंग लगाया और गठबंधन में उन्हें तीन सीटें मिलीं। पश्चिमी यूपी जाट वोट बैंक का प्रमुख केंद्र बिंदु माना जाता है। छोटे चौधरी जयंत जाट युवाओं को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिशें कर रहे हैं। यह बात अलग है कि पश्चिमी यूपी में भीम आर्मी के चंद्रशेखर बड़ी चुनौती के रूप में उभरे हैं। जयंत इसे रोकने में कितना कारगर साबित होंगे यह तो समय बताएगा। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Mayawati to contest against BJP for three nephews