Mahant Avaidyanath reached LS from Hindu Mahasabha in wave of Janta Dal - जनता दल की आंधी चीरकर संसद पहुंचे थे अवेद्यनाथ DA Image

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जनता दल की आंधी चीरकर संसद पहुंचे थे अवेद्यनाथ

1989 के आम लोकसभा चुनाव में जनता दल की आंधी थी। भाजपा से उसका गठबंधन था। इस गठबंधन में गोरखपुर की सीट जनता दल को मिली थी। लेकिन हिन्दू महासभा के बैनर तले महंत अवेद्यनाथ मैदान में उतरे तो जनता दल की आंधी को चीरकर संसद में पहुंचे। 

1989 के चुनाव में जनता दल-भाजपा के गठबंधन में जनता दल को मिली थी गोरखपुर सीट 

अयोध्या में धर्मसंसद के बाद 10 साल बाद राजनीति में लौटे महंत अवेद्यनाथ 

हिन्दू महासभा के बैनर तले लड़ा चुनाव, 46 हजार वोट से जीते

महंत अवेद्यनाथ 10 साल बाद चुनावी राजनीति में उतरे थे। इसके पहले वह अपने गुरु महंत दिग्विजयनाथ के निधन के बाद 1970 में हुए उपचुनाव से संसद पहुंचे थे। 1971 के आम चुनाव में कांग्रेस के न‍रसिंह नारायण पांडेय ने उनसे यह सीट छीन ली। महंत अवेद्यनाथ 62, 67, 74 और 77 में मानीराम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हुए लेकिन 1980 में मीनाक्षीपुरम में हुई धर्मानान्तरण की घटना के बाद राजनीति से संन्यास लेकर उन्‍होंने सामाजिक समरसता का अभियान छेड़ दिया।

दलितों के यहां सहभोज सहित कई अभियान चलाए। 1989 में एक तरफ बोफोर्स घोटाले को लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह के आरोपों से देश की राजनीति गर्माई हुई थी तो दूसरी तरफ अयोध्या में राममंदिर आंदोलन की भूमिका तैयार हो रही थी। गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ इस आंदोलन के अगुवा बने। धर्मसंसद में उन्हें गोरखपुर से चुनाव लड़ाने का निर्णय हुआ लेकिन भाजपा-जनता दल के गठबंधन में गोरखपुर की सीट जनता दल के पास थी। रामपाल, जनता दल और भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार बने। सो, महंत अवेद्यनाथ हिन्दू महासभा के बैनर तले मैदान में उतरे। वह चुनाव गोरखपुर में पूरी तरह राममंदिर आंदोलन के माहौल में लड़ा गया। महंत अवेद्यनाथ के मंच पर हिन्दुत्व और राममंदिर ही सबसे बड़ा मुद्दा था। बैलेट की लड़ाई में कई बयानों और नारों की गूंज देश भर में सुनी गई। राजनीतिक विश्लेषक आज भी उनमें से कुछ का उल्लेख बड़ी शिद्दत से करते हैं। 

मतगणना के नतीजे आए तो सिर्फ बांसगांव में कांग्रेस के महावीर प्रसाद अपनी सीट बचा सके। गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ में से सात सीटों पर जनता दल के उम्मीदवार विजयी रहे। लेकिन गोरखपुर की सीट पर हिन्दू महासभा का परचम लहराया वो भी पूरे 45,837 वोटों से। हिन्दू महासभा के महंत अवेद्यनाथ को 193821 वोट मिले थे। जबकि जनता दल के रामपाल सिंह को 147984 वोट। कांग्रेस के उम्मीदवार 58,319 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 

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