ludhiana lok sabha seat traditional congress vs akali dal battleground set for three way contest - लुधियाना लोकसभा सीट 2019: ट्रेडिनशनल 'कांग्रेस बनाम अकाली दल' के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तय DA Image
6 दिसंबर, 2019|1:20|IST

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लुधियाना लोकसभा सीट 2019: ट्रेडिनशनल 'कांग्रेस बनाम अकाली दल' के बीच त्रिकोणीय मुकाबला तय

Ludhiana Lok Sabha seat: 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू ने यहां से चुनाव जीता था। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के एचएस फुल्का को हराया था।

Ravneet Singh Bittu of Congres (HT File Photo )

लुधियाना लोकसभा चुनाव (Ludhiana lok Sabha Seat) क्षेत्र ऐसा है, जहां 2014 के चुनावों में चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था। अब लगता है कि आगामी लोकसभा चुनावों में यहां त्रिकोणीय मुकाबला तय है। परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले लुधियाना में आमतौर पर कांग्रेस और अकाली दल के बीच मुकाबला होता रहा है। 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू ने यहां से चुनाव जीता था। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) के एचएस फुल्का को हराया था। 

अकाली दल के मनप्रीत सिंह अयाली और निर्दलीय सिमरजीत सिंह बैन्स क्रमशः तीसरे और चौथे नंबर पर रहे थे। फुल्का ने उसके बाद सक्रिय राजीति से संन्यास ले लिया था। इस बार आम आदमी पार्टी के पास भी कोई मुफीद चेहरा नहीं है। 

2014 के लोकसभा चुनावों में बैन्स को दो लाख से अधिक वोट मिले थे। उन्होंने अपनी लोक इंसाफ पार्टी बना ली है और वह आत्मा नगर से विधायक हैं। उन्होंने पंजाब डेमोक्रेट्रिक एलाइंस (PDA) के साथ गठजोड़ कर लिया है। उनके साथ सुखपाल खैरा की पंजाबी एकता पार्टी, रंजीत सिंह के नेतृत्व में शिरोमणि अकाली दल (टकसाली) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी शामिल हैं। 

अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि दो बार के आत्म नगर के विधानसभा चुनावों में विजेता बैन्स अब लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक राजनीतिक पार्टी के नेता ने कहा, ''बैन्स बहुत महत्वाकांक्षी हैं। वह पीडीए के लोकसभा चुनावों में तय शुदा उम्मीदवार होंगे।''

वहीं, सिमरजीत सिंह बैन्स का कहना है कि मैं वही करूंगा जो पार्टी के हित में होगा। वर्तमान सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। वह इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह नियमित रूप से पब्लिक रैलियां कर रहे हैं। वह पांच साल में किए गए कामों को जनता के बीच ले जा रहे हैं। 

कांग्रेस के अंदरुनी सूत्र के मुताबिक, बिट्टू यहां से अपनी टिकट को लेकर आश्वस्त हैं। पूर्व सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ से टिकट के लिए आवेदन किया है। बिट्टू के भरोसेमंद लोग खुद टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं। राहुल गांधी लुधियाना से किसी हिंदू चेहरे को खड़ा करना चाहते हैं। 

कांग्रेस के एक हिस्से का मानना है कि अगर मनीष तिवारी को चंडीगढ़ से टिकट नहीं मिल पाता तो उनकी दूसरी पसंद लुधियाना होगी। वहीं, दूसरी तरफ बिट्टू का कहना है कि वह लुधियाना के अलावा और कहीं से चुनाव नहीं लड़ेंगे।

शिरोमणि अकाली दल की तरफ से मुख्यमंत्री के पूर्व सलाहकार और सीनियर लीडर महेंद्र सिंह ग्रेवाल यहां से खड़े हो सकते हैं। वह कहते हैं, 'यदि पार्टी चाहते हैं तो वह क्यों खड़े नहीं होंगे? महेंद्र सिंह ग्रेवाल भी इन दिनों पब्लिक इवेंट्स में बिजी हैं। 

सूत्रों का कहना है कि साहेनवाल के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बाद के करीबी शरनजीत सिंह ढिल्लन यहां से पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबी थे। वह 2014 में भी यहीं से उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि, ढिल्लन कहते हैं कि वह विधायक के रूप में ही खुश हैं। 

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अफवाहों का बाजार गर्म है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बीजेपी (BJP) इस बार लुधियाना और अमृतसर सीट पर कब्जा करना चाहेंगे। यदि यह सीट भाजपा को मिलती है तो पार्टी यहां से किसी उपयुक्त उम्मीदवार को खड़ा करेगी। आप पार्टी के जिला अध्यक्ष दलजीत सिंह ग्रेवाल भी टिकट पाने की रेस में हैं। 2014 में आप के उम्मीदवार एचएस फुल्का को यहां से 2.6लाख वोट मिले थे। वह रवनीत सिंह के बाद दूसरे नंबर पर रहे थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ludhiana lok sabha seat traditional congress vs akali dal battleground set for three way contest