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बाड़मेर VIP सीट: इस सीट पर विधानसभा में हार चुके नेताओं के बीच मुकाबला

barmer lok sabha election

राजस्थान के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्रों में से एक बाड़मेर सीट पर इस बार कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह जसोल का मुकाबला भाजपा के कैलाश चौधरी से होगा। वहीं बर्खास्त आईपीएस पंकज चौधरी बसपा के टिकट पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश करेंगे। इस सीट पर चुनाव लड़ रहे कांग्रेस व भाजपा दोनों के ही उम्मीदवार हालिया विधानसभा चुनाव में अलग-अलग सीटों पर हार गए थे। वहीं पंकज चौधरी का यह पहला चुनाव है।

भाजपा ने जहां जातीय समीकरणों का फायदा उठाने के लिए एक बार फिर जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को टिकट दिया है जो विधानसभा चुनाव से ठीक पहले न केवल कांग्रेस में शामिल हुए बल्कि झालावाड़ सीट पर वसुंधरा राजे के सामने चुनाव भी लड़ा। कांग्रेस ने इस तरह से दशकों बाद इस सीट पर किसी राजपूत को अपना उम्मीदवार बनाने का जोखिम उठाया है।

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बाड़मेर भाजपा जिलाध्यक्ष दिलीप पालीवाल कहते हैं, जातीय समीकरण साफ तौर पर हमारे पक्ष में हैं। इसके अलावा राजपूतों के भी अच्छे खासे वोट हमें मिलने वाले हैं। मुद्दा क्या होगा यह पूछे जाने पर पालीवाल कहते हैं कि मुद्दा वही है राष्ट्रवाद व नरेंद्र मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाना। वहीं बाड़मेर से कांग्रेस के विधायक मेवाराम जैन स्वाभाविक रूप से इस बात से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जात-पात से फर्क नहीं पड़ने वाला है। बाड़मेर सीट पर तो माहौल कांग्रेस के पक्ष में है और जीत भारी मतांतर से होगी। इस सीट पर बसपा ने बर्खास्त आईपीएस पंकज चौधरी को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है। चौधरी जैसलमेर के पुलिस अधीक्षक रहे हैं व उनका मानना है कि वह इलाके की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हैं व उन्हें सुलझाने की दिशा में काम करना चाहते हैं।

पाक सीमा से जुड़ा हुआ क्षेत्र
यह लोकसभा क्षेत्र पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दो जिलों के विधानसभा क्षेत्रों तक फैली है और थार के रेतीले धोरों में पसरे इस लोकसभा क्षेत्र में कड़ी गर्मी पड़ती है। इन विधानसभा क्षेत्रों में जैसलमेर, शिव, बाड़मेर, बायतू, पचपदरा, सिवाना, गुडामलानी व चौहटन है। इनमें से सात सीटें कांग्रेस के पास है।

2014 में ‘कर्नल' ने ‘मेजर' को हराया
2014 के लोकसभा चुनाव में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर दिलचस्प टक्कर दिखी थी, जब पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह को तवज्जो न देते हुए पार्टी ने इलाके के कर्नल सोनाराम चौधरी को टिकट दिया था। जसवंत ने निर्दलीय पर्चा भरा और सोनाराम को जोरदार टक्कर दी लेकिन मोदी लहर में सेवानिवृत्त कर्नल ने मेजर को मात दे दी। एनडीए खड़कवासला से प्रशिक्षण लेने वाले जसवंत सिंह सेना में मेजर रैंक पर पहुंचकर रिटायर हुए थे।

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जाट और राजपूत बाहुल्य सीट
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार जहां तक सीट पर जातीय समीकरणों की बात है तो यहां जाट व राजपूत वोटों के अलावा अनुसूचित जाति व अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या परिणामों को प्रभावित करती है। कांग्रेस ने इस सीट पर बीते कुछ दशकों में पहली बार राजपूत को टिकट दिया है। देखना है कि वह अपनी सर्वसमाज के नेता की छवि के साथ जाट ही जीतेगा के मिथक को तोड़ते हैं या नहीं।

जसवंत सिंह के बेटे हैं मानवेंद्र
मानवेंद्र सिंह भाजपा नेता जसवंत सिंह के बेटे हैं और इस सीट से एक बार सांसद रहे हैं। भाजपा ने मौजूदा सांसद कर्नल सोना राम के बजाय कैलाश चौधरी पर भरोसा जताया है। कैलाश 2013 में बायतू से विधायक रहे पर 2018 के विधानसभा चुनाव में हरीश चौधरी से हार गए। सोना राम तीन बार कांग्रेस, एक बार भाजपा से सांसद रहे हैं पर दिसंबर में विधानसभा चुनाव लड़े और हार गए।

पानी और रोजगार का मुद्दा हावी
बाड़मेर लोकसभा क्षेत्र में अकाल प्रबंधन, पेयजल, रोजगार, रेल सेवाएं और बिजली जैसे परंपरागत मुद्दे हैं।

बाड़मेर लोकसभा सीट

  • बाड़मेर में 500 साल पुराना जगदंबे माता का मंदिर है। यह मंदिर जमीन से लगभग 140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
  • इस क्षेत्र में चिंतामणि पार्श्वनाथ जैन मंदिर भी स्थित है। इसे 16वीं शताब्दी में श्री नेमाजी जीवाजी बोहरा ने बनवाया था।
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  • बाड़मेर शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर ही जूनागढ़ का किला है। इसे 16वी शताब्दी में बनवाया गया था
  • यहां पर देवका गांव के निकट 13वीं शताब्दी में बना देवका के सूर्य मंदिर की कलाकृति ऐतिहासिक है। परमार शासक सूर्य देव की प्रथम किरण द्वारा दर्शन करते थे।

मौजूदा सांसदः सोनाराम

  • 1996 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर बाड़मेर से सांसद बने।
  • 1998 और 1999 में भी बाड़मेर से सांसद बने।
  • 2014 में भाजपा में शामिल हुए और एक बार फिर सांसद चुने गए।

कब कौन जीता
1952    भवानी सिंह    निर्दलीय

1957    रघुनाथ सिंह बहादुर    निर्दलीय

1962    तान सिंह    राम राज्य परिषद

1967    अमृता नहाटा    कांग्रेस

1971    अमृता नहाटा    कांग्रेस

1977    तान सिंह    जनता पार्टी

80-84    वृद्धि चंद जैन    कांग्रेस

1989    कल्याण सिंह कालवी    जद

1991    राम निवास मिर्धा    कांग्रेस

96-98    सोनाराम    कांग्रेस

1999    सोनाराम    कांग्रेस

2004    मानवेंद्र सिंह    भाजपा 

2009    हरीश चौधरी    कांग्रेस

2014    सोना राम    भाजपा

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