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लोकसभा रिजल्ट 2019: विपक्ष के चार मजबूत किले भी धराशाई

2014 के चुनाव में भाजपा और नरेंद्र मोदी नाम के तूफान में भी महफूज रहे विपक्ष के मजबूत किले इस बार धराशाई हुए हैं। विपक्ष के मजबूत माने जा रहे सात में से चार किलों में भाजपा ने सेंधमारी कर दी है। विपक्ष की इन सात सीटों (किलों) पर 2014 में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता सांसद चुने गए थे। भारतीय जनता पार्टी के लिए ये सातो सीटें सातवें चक्रव्यूह के रूप में  खड़ी थीं।

 इन सीटों पर 2014 में रायबरेली सीट से सोनिया गांधी, अमेठी से राहुल गांधी, आजमगढ़ से मुलायम सिंह यादव, कन्नौज से डिंपल यादव, मैनपुरी से तेज प्रताप सिंह यादव, बदायूं से धर्मेंद्र यादव और फिरोजाबाद से अक्षय यादव सांसद चुने गए थे। यानी दो राजनीतिक परिवारों के सदस्यों का इन सीटों पर कब्जा रहा है। 

इस बार भी इन सीटों पर इन्हीं दोनों परिवारों के प्रत्याशी अपनी पार्टी से चुनाव मैदान मे थे। बदलाव के तहत आजमगढ़ से अखिलेश यादव और मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव चुनाव मैदान में आ गए थे।  मैनपुरी के सांसद रहे तेज प्रताप यादव इस बार चुनाव मैदान से बाहर रखे गए थे।

अमेठी में राहुल गांधी का तिलस्म टूटा
1977 और 1998 छोड़ दें तो 1967 से अब तक इस सीट पर कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। 1999 में सोनिया गांधी यहां से सांसद चुनी गई थीं। 2004, 2009 तथा 2014 में राहुल गांधी इस सीट से चुनाव जीते। राहुल गांधी की हार के साथ ही इस सीट से गांधी परिवार का वर्चस्व समाप्त हुआ है। भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को हरा कर इस सीट को भाजपा की झोली में डाल दिया है।
 
कन्नौज में भाजपा से हारीं डिंपल 
कन्नौज सीट पहली बार 1998 में सपा के कब्जे में गई थी। अखिलेश यादव ने अपनी सियासी पारी का आगाज कन्नौज संसदीय सीट से  किया था। 2012 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के इस सीट से इस्तीफा दिया था। उपचुनाव में डिंपल यादव निर्विरोध सांसद चुनी गई थीं। 2014 में दूसरी बार डिंपल इस सीट से सांसद बनीं। डिंपल इस बार यहां से चुनाव हार गई हैं। भाजपा प्रत्याशी सुब्रत पाठक जीते हैं।  

सपा के गढ़ बदायूं पर भाजपा का कब्जा
1996 से अब तक हुए छह चुनावों में हर बार सपा ने यह सीट जीती है।  2009 में सैफई परिवार से धर्मेंद्र यादव ने यह सीट जीती थी। इसके बाद 2009 फिर 2014 में भी धर्मेंद्र यादव ही यहां से चुनाव जीते। इस बार सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के हाथ से यह सीट निकल गई है। भाजपा की संघमित्रा मौर्य ने यहां से जीत हासिल की है। धर्मेन्द्र यादव को 18454 वोटों से हार का सामना करना पड़ा है। 

चाचा-भतीजे की लड़ाई में बाजी भाजपा के हाथ
सुहागनगरी फिरोजाबाद भी सैफई परिवार का मजबूत किला रहा है।1957 में बृजराज सिंह के बाद से कोई भी स्थानीय व्यक्ति यहां से सांसद नही चुना गया। 2014 में सैफई परिवार से अक्षय यादव यहां से सांसद चुने गए। इस सीट पर सपा से अक्षय यादव तो प्रसपा से उनके चाचा शिवपाल सिंह मैदान मे थे। इन दोनों की लड़ाई में भाजपा इस सीट पर काबिज हो गई। चंद्रसेन यहां से चुनाव जीते।
 

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