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लोकसभा चुनाव 2nd Phase: पूर्वी बिहार में जातिगत समीकरण रहेगा हावी

भागलपुर : गंगोता वोट और भाजपा कैडरों का रुख तय करेगा परिणाम
भागलपुर : गंगोता वोट और भाजपा कैडरों का रुख तय करेगा परिणाम

बिहार के पूर्वी छोर पर स्थित पांच लोकसभा क्षेत्रों में दूसरे चरण में मतदान होगा। ये क्षेत्र हैं रेशमीनगर के नाम से मशहूर भागलपुर, मंदार पर्वत की प्राकृतिक सुषमा से समृद्ध बांका, पूर्वोत्तर का प्रवेशद्वार किशनगंज, जलालगढ़ के किले के लिए मशहूर पूर्णिया और कटिहार। इनमें बांका को छोड़ शेष चार क्षेत्र बाढ़ और कटाव से पीड़ित हैं। माना जाता है इन क्षेत्रों में चुनाव के वक्त असल मुद्दे गौण हो जाते हैं और जाति का समीकरण सब पर भारी पड़ जाता है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ओर से जीत के लिए जातिगत समीकरण को साधने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दोनों ने यहां सभाएं की हैं। पांचों क्षेत्रों में मुकाबला कांटे का है लेकिन मतदाता खामोश हैं। पेश है रवींद्रनाथ तिवारी, तरुण कुमार, विनय कुमार मिश्र, वीरेंद्र कुमार और भावेश चंद की रिपोर्ट

 

भागलपुर : गंगोता वोट और भाजपा कैडरों का रुख तय करेगा परिणाम

भागलपुर लोकसभा सीट का परिणाम तय करने में गंगोता वोटों का विभाजन और भाजपा के कैडरों का रुख निर्णायक भूमिका निभाएगा। महागठबंधन के उम्मीदवार शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल और एनडीए उम्मीदवार अजय मंडल, दोनों गंगोता जाति के हैं। अजय ने गंगोता मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

महागठबंधन के उम्मीदवार बुलो साल 2014 का चुनाव मुस्लिम और यादव के साथ-साथ गंगोता मतदाताओं के समर्थन से जीते थे। यहां करीब 30 फीसदी यादव व मुस्लिम और आठ फीसदी गंगोता हैं। इस बार एनडीए ने भी गंगोता कार्ड खेला है और जदयू विधायक अजय मंडल को अपना उम्मीदवार बनाया है।

बुलो जहां गंगोता मतदाताओं को बिखरने से रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं, वहीं अजय उन्हें तोड़कर अपने पाले में करने की कोशिश में जुटे हैं। भाजपाई मतदाताओं को अजय के पक्ष में वोट देने के लिए तैयार करना एनडीए के लिए चुनौती है। पिछली बार एनडीए गठबंधन में इस सीट पर भाजपा के सैयद शाहनवाज हुसैन लड़े थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यहां सभा हो चुकी है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी रोड शो कर चुके हैं। हिंदू कार्ड को जदयू के उम्मीदवार अजय मंडल के पक्ष में भुनाने के लिए भाजपा के बड़े नेता पूरा जोर लगा रहे हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर भाजपा के कैडरों की निष्क्रियता भी बड़ा कारक है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने-अपने उम्मीदवार के पक्ष में आधा दर्जन से अधिक सभाएं कर चुके हैं। बड़े नेताओं के भाषणों में सिर्फ विकास की बात हो रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रचार और जनसंपर्क जातिगत समीकरण के आधार पर किए जा रहे हैं। जाहिर है कि चुनाव में विकास का मुद्दा पूरी तरह गौण है।

2014 चुनाव का परिणाम

कुल मतदाता : 18,19,243
पुरुष : 9,62,350
महिला : 8,56,824
अन्य :  69

किसको कितने मिले वोट

प्रत्याशी का नाम पार्टी कितने मिले वोट
बुलो मंडल         राजद     3,67,623
सैयद शाहनवाज हुसैन     भाजपा      3,58,138
अबु कैसर         जदयू     1,32,256
बांका: त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
बांका: त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

बांका लोकसभा क्षेत्र में एक बार फिर त्रिकोणीय मुकाबला होता दिख रहा हैं। जदयू के पूर्व सांसद गिरिधारी यादव एनडीए उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं तो राजद के मौजूदा सांसद जयप्रकाश नारायण यादव महागठबंधन के प्रत्याशी हैं। इन दोनों के अलावा भाजपा की बागी पुतुल कुमारी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर चुकी हैं।

2014 के लोकसभा चुनाव में भी यहां मुकाबला त्रिकोणीय रहा था। तब एनडीए के पुतुल, राजद के जयप्रकाश और भाकपा के (जदयू समर्थित) उम्मीदवार संजय कुमार के बीच मुकाबला हुआ था। इस चुनाव में लगभग 10 हजार वोट से जयप्रकाश की जीत हुई थी।

इस बार मैदान में जयप्रकाश, गिरिधारी और पुतुल हैं। ये तीनों बांका के सांसद रह चुके हैं। गिरिधारी के लिए भाजपा और जदयू के नेता जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। एनडीए के नेतागण स्थानीय समीकरणों का हवाला देकर खुद को सबसे आगे बता रहे हैं। लेकिन उनके दावे को पुतुल के समर्थक खारिज कर रहे हैं। दरअसल पुतुल के समर्थक, खासकर राजपूत बिरादरी के लोग उन्हें एनडीए का उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से नाराज हैं।

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजपूत या सवर्ण मतदाताओं पर पुतुल प्रकरण ज्यादा असर डालता है या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आह्वान। हालांकि एनडीए राजपूत समेत तमाम सवर्ण वोटों का बिखराव रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंके हुए है। इसके लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह यहां सभा कर चुके हैं।

पुतुल प्रकरण से एनडीए चाहे जितनी असुविधा महसूस कर रहा हो, लेकिन महागठबंधन इससे खुश है। महागठबंधन के अहम घटक राजद का मानना है कि पुतुल जितना भी वोट हासिल करेंगी, वह एनडीए के हिस्से का ही होगा। जाहिर तौर पर पुतुल एनडीए की मुश्किल बढ़ाएंगी। हालांकि एनडीए उम्मीदवार गिरिधारी के यादव बिरादरी का होने के कारण यहां यादव वोटों की राजद के पक्ष में एकजुटता की उम्मीद भी निरापद नहीं रह गई है। अभी तक जो माहौल दिख रहा है उसमें हर स्तर पर जातिगत गोलबंदी ही दिखती है।

2014 चुनाव का परिणाम
कुल मतदाता : 16,87,940
पुरष : 9,96,329
महिला : 7,91,591
अन्य : 20

किसको कितने मिले वोट

नाम     पार्टी     कितने मिले वोट
जयप्रकाश नारायण यादव      राजद     2,85,150
पुतुल कुमारी         बीजेपी     2,75,006
संजय यादव         भाकपा     2,20,708


 

कटिहार : तारिक अनवर की राह आसान नहीं
कटिहार : तारिक अनवर की राह आसान नहीं

चार दशक से भी अधिक समय से कटिहार की राजनीति की धुरी रहे तारिक अनवर के लिए इस बार लोकसभा पहुंचने की राह आसान नहीं दिख रही। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और कांग्रेस के टिकट पर महागठबंधन के प्रत्याशी बने तारिक को इस बार एनडीए की ओर से जदयू प्रत्याशी दुलालचंद्र गोस्वामी से कड़ी टक्कर मिल रही है। एनसीपी प्रत्याशी मोहम्मद शकूर ने तारिक की राह और कठिन बना दी है।

कटिहार की राजनीति में विकास का मुद्दा गौण है। पार्टियां और मतदाता विकास और ऐसे अन्य मुद्दों की बात चाहे जितनी कर लें, लेकिन वोट डालने के समय जातिगत गोलबंदी हावी हो जाती है। यह कोई दबी-छिपी बात नहीं है बल्कि ऐसी हकीकत है, जिससे फायदा उठाने में कोई पीछे नहीं रहना चाहता। कटिहार लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम और यादव मतदाता लगभग 52 प्रतिशत हैं। ऐसे में जिस पार्टी के प्रत्याशी के पक्ष में मुस्लिम+यादव (एम+वाई) अर्थात ‘माई' समीकरण जाएगा उसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा। इसको देखते हुए सभी प्रत्याशी ‘माई' समीकरण को साधने में लगे हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी को मुस्लिम और यादव मतदाताओं पर भरोसा है, तो जदयू उम्मीदवार को मोदी लहर और हिंदू कार्ड से उम्मीद है। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए स्टार प्रचारक बुलाए जा रहे हैं। महागठबंधन की ओर से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा हो चुकी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार सभाएं कर रहे हैं। एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान की सभा हो चुकी है।

मतदाताओं की गोलबंदी भी शुरू हो चुकी है, लेकिन वे अभी खुलकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।

2014 चुनाव का परिणाम

कुल मतदाता : 16,51,966
पुरुष : 8,74,742
महिला : 7,77,147
अन्य : 77

प्रत्याशी का नाम पार्टी कितने वोट मिले
तारिक अनवर         एनसीपी     4,31,292
निखिल कुमार चौधरी     भाजपा     3,16,552
किशनगंज : अल्पसंख्यक वोटों की गोलबंदी
किशनगंज : अल्पसंख्यक वोटों की गोलबंदी

चाय, अनानास व जूट उत्पादन के लिए मशहूर किशनगंज में चुनावी सरगर्मी यहां के मुख्य मुद्दों की बजाय जातिगत समीकरण पर केंद्रित है। मुख्य मुद्दे गौण हैं। लड़ाई फिलहाल त्रिकोणीय दिख रही है।

किशनगंज के मतदाताओं में से करीब 70 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं। इस गणित को देखते हुए ज्यादातर पार्टियों ने अल्पसंख्यक समुदाय से ही अपने प्रत्याशी चुने हैं। मुख्य मुकाबला कांग्रेस, जदयू और एमआईएम के बीच दिख रहा है।

बिहार-बंगाल की सीमा पर फरिंगगोला में एनएच 31 किनारे स्थित नाश्ते की दुकान पर समोसे का मसाला तैयार कर रहे एक युवक ने कहा, जिसका नसीब होगा, वही जीतेगा। उसका इशारा जातिगत ध्रुवीकरण की तरफ था। अधिकतर लोगों ने कहा कि किशनगंज लोकसभा सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और जदयू के बीच होगा, तो कई लोगों ने एमआईएम का जिक्र करते हुए कहा कि यहां त्रिकोणीय लड़ाई तय है। लोगों का कहना है कि 15 अप्रैल की शाम तक मुकाबले की तस्वीर साफ हो जाएगी। फिलहाल तो तमाम खेमे अपने अपने पक्ष में गोलबंदी करने में जुटे हैं।

2014 चुवाव का परिणाम
कुल मतदाता : 16,52,940
पुरुष : 8,55,667
महिला : 7,97,215
अन्य : 58

किसको कितने मिले वोट

प्रत्याशी का नाम पार्टी कितने वोट मिले
मौलाना असरारुल     कांग्रेस      4,93,461
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल     भाजपा     2,98,849
पूर्णिया : जातिगत मोर्चाबंदी में जुटा हरेक खेमा
पूर्णिया : जातिगत मोर्चाबंदी में जुटा हरेक खेमा

पूर्णिया सीट पर महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह और एनडीए से जदयू उम्मीदवार संतोष कुशवाहा के बीची सीधी टक्कर है। यहां जातिगत मोर्चाबंदी की कोशिशें तेज हो चुकी हैं।

दोनों प्रत्याशी बीते चुनाव में भी आमने-सामने थे, पर एक ने इस बार खेमा बदल लिया। उदय 2014 में भाजपा के प्रत्याशी थे, जबकि इस बार कांग्रेस के हैं। मौजूदा सांसद संतोष पिछला चुनाव जदयू के टिकट पर लड़े थे। इस बार भी वह जदयू के प्रत्याशी हैै। .

उदय को मुस्लिम, यादव वोटों के अलावा राजपूत वोटों के मिलने की उम्मीद है। आकलन है कि मुस्लिम और यादव वोट राजद के कारण मिलेंगे, जबकि राजपूत वोट इसलिए मिलेंगे क्योंकि वह उनकी अपनी बिरादरी के हैं। संतोष को पिछड़ा, अति पिछड़ा, वैश्य, दलित और ब्राह्मण समेत अन्य अगड़ी जातियों के वोट की उम्मीद है। उन्हें ब्राह्मण, वैश्य और अन्य अगड़ी जातियों का वोट भाजपा के कारण, जबकि बाकी वोट नीतीश कुमार के कारण मिलने की उम्मीद है।

क्षेत्र के करीब चार लाख मुस्लिम वोटों को लेकर कांग्रेस आश्वस्त है, पर जदयू को भी इसमें सेंधमारी का भरोसा है। नरेंद्र मोदी के नाम पर मिलने वाले वोट को लेकर जदयू निश्चिंत है, पर कांग्रेस मानती है कि जातिगत मोर्चाबंदी के कारण वह मोदी समर्थक वोटों, मसलन राजपूत वोटों को अपनी झोली में करने में कामयाब होगी।

अब दोनों खेमे एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी की जुगत में लगे हैं। जो अपने प्रतिद्वंद्वी के वोट बैंक में सबसे बड़ी सेंधमारी करेगा उसी की जीत होगी।

2014 चुनाव का परिणाम

कुल मतदाता : 17,53,717
पुरुष : 9,10,001
महिला : 8,43,648
अन्य : 68

किसको कितने मिले वोट

प्रत्याशी का नाम पार्टी कितने मिले वोट
संतोष कुशवाहा     जदयू     4,18,826
उदय सिंह   भाजपा     3,02,157
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  • Web Title:Lok Sabha elections second phase caste equations in eastern Bihar will remain dominant