Lok Sabha Elections 2019: What will be the issue of old pension restoration - लोकसभा चुनाव 2019 : पुरानी पेंशन बहाली क्या मुद्दा बनेगी? DA Image

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लोकसभा चुनाव 2019 : पुरानी पेंशन बहाली क्या मुद्दा बनेगी?

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर धीरे-धीरे राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र जारी होने लगे हैं। देश के 60 लाख और यूपी के 13 लाख कर्मचारी-अधिकारी व शिक्षक पुरानी पेंशन से वंचित हैं। ये सभी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) यानी नई पेंशन स्कीम के दायरे में हैं। इन सबके सामने पुरानी पेंशन बहाली सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। इनका दबाव है कि पुरानी पेंशन राजनीतिक दल अपने-अपने घोषणा पत्र, वचन पत्र और संकल्प पत्र में शामिल करें, तभी वे उनका साथ देंगे।

कर्मचारी भाजपा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या और सांसद वरुण गांधी पुरानी पेंशन के लिए पत्र लिख चुके हैं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बतौर सांसद पूर्व में पुरानी पेंशन बहाली के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को पत्र लिखा था। प्रियंका गांधी को भी ज्ञापन दिया गया है।

कांग्रेस के घोषणापत्र में शामिल न करने पर निराशा

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल के नेता जयंत चौधरी अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा शामिल करने का आश्वासन दे चुके हैं। हालांकि कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है लेकिन इसमें पुरानी पेंशन  लागू करने के सवाल पर घोषणा पत्र मौन है। इससे कर्मचारियों में निराशा है।

आम आदमी पार्टी ने की है लागू करने की घोषणा
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तो पुरानी पेंशन बचाओ मंच की दिल्ली में पिछले दिनों आयोजित रैली में अपने राज्य दिल्ली में पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली विधानसभा में पुरानी पेंशन बहाली का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेज भी दिया है। 

सभी दलों से अनुरोध, जवाब मिलने के बाद रणनीति पर फैसला
पुरानी पेंशन बचाओ मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु कहते हैं -हमने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित सभी प्रमुख दलों के नेताओं से पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अपनी-अपनी पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल करने का अनुरोध किया है। डीएमके का घोषणा पत्र आ चुका है। बाकी का इंतजार है। उसी हिसाब से उनका संगठन अगला कदम उठाएगा।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी का भी कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली का वादा करने वाले राजनीतिक दल का ही कर्मचारी साथ देंगे। पुरानी पेंशन के मुद्दे पर प्रदेश के सभी कर्मचारी व उनके संगठन एकजुट हैं। अटेवा के यूपी मीडिया प्रभारी राजेश यादव ने ट्विटर पर पुरानी पेंशन खत्म करने का विरोध शुरू किया है जिस पर पहले ही दिन एक लाख कर्मचारियों ने बहाली का समर्थन किया है। 

70 हजार वेतन,पेंशन 700 रुपये
नई पेंशन योजना के तहत आने वाले उदित नारायण इंटर कालेज में पडरौना में तैनात हिंदी शिक्षक जयराम गुप्ता 31 मार्च 2019 को रिटायर हो गए। वे इस स्कीम के तहत आने वाले बतौर पहले शिक्षक रिटायर हुए। उनका चयन आयोग से वर्ष-2006 में हुआ था। उनको 70 हजार रुपये महीना वेतन मिल रहा था लेकिन पेंशन मात्र सात सौ रुपये महीना मिलेगी। इससे गुप्त बड़े दु:खी हैं। सात सौ रुपये में कैसे जीवन कटेगा जबकि पुरानी पेंशन स्कीम में आते तो कम से कम 35 हजार पेंशन मिलती। 

कर्मचारी हित में सरकार के कदम

मुख्य सचिव डा. अनूप चंद्र पांडेय से कर्मचारी संगठनों ने  कई दौर की मुलाकात की। इसके बाद केंद्र व यूपी सरकार ने कर्मचारियों और शिक्षकों के कल्याण के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने पांच लाख रुपये तक की आय आयकर मुक्त करके अपना वादा पूरा किया है। नई पेंशन स्कीम में भी चार फीसदी सरकार का हिस्सा बढ़ा दिया गया। योगी सरकार ने भी सातवां वेतन बिना किसी हीलाहवाली के तत्काल लागू कर दिया। यही नहीं नई पेंशन स्कीम में सरकार का हिस्सा बढ़ाकर केंद्र के समान 14 फीसदी कर दिया। 

पश्चिम बंगाल में अभी लागू है पुरानी पेंशन
पश्चिम बंगाल में अभी भी पुरानी पेंशन लागू है। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने सबसे पहले अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली का वादा किया है लेकिन अभी सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के अलावा प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के घोषणा पत्र, वचन पत्र और संकल्प पत्र जारी होने का इंतजार है। देखने वाली बात होगी कि ये राजनीतिक इस मुद्दे को अपनाते हैं या नहीं। वैसे यह तय है कि पुरानी पेंशन से वंचित यूपी के 13 लाख कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी तथा देश के 60 लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन को इस चुनाव में एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।  

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