लोकसभा चुनाव 2019: यहां के वोटर्स चुनावी ट्रेंड के विपरित ही चुनते हैं अपने नेता
पूर्णिया लोकसभा सीट के मतदाता ने हमेशा चुनावी ट्रेंड के इतर अपना नेता चुना है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू व भाजपा अलग-अलग चुनावी मैदान में थे। इसके बावजूद पूर्णिया के वोटरों ने जदयू प्रत्याशी...

पूर्णिया लोकसभा सीट के मतदाता ने हमेशा चुनावी ट्रेंड के इतर अपना नेता चुना है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू व भाजपा अलग-अलग चुनावी मैदान में थे। इसके बावजूद पूर्णिया के वोटरों ने जदयू प्रत्याशी संतोष कुशवाहा को 41.15 फीसदी वोट लेकर विजयी बनाया। उन्हें 418826 मत मिला। भाजपा प्रत्याशी उदय सिंह को 29.69 फीसदी वोट मिले थे। उन्हें 302157 वोट हासिल हुआ था। कांग्रेस प्रत्याशी अमरनाथ तिवारी को महज 12.22 फीसदी यानी 124344 वोट मिले।
यही ट्रेंड 2009 के चुनाव में भी दिखा। देश में मनमोहन सिंह की अगुवाई में यूपीए की सरकार बनी, लेकिन यहां के मतदाताओं ने भाजपा के उदय सिंह को विजयी बनाकर लोकसभा भेजा। 2019 के चुनाव में स्थिति उलट है। इस बार जदयू-भाजपा साथ-साथ है। पूर्णिया लोकसभा सीट के अंतर्गत कटिहार जिले के कोढ़ा सुरक्षित विधानसभा सीट पर सबसे अधिक 69.83 फीसदी मतदान हुआ। बनमनखी भी सुरक्षित सीट हैं। यहां 61.79 फीसदी मतदान हुआ। कसबा मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां 69.63 फीसदी मतदान हुआ। धमदाहा में 65.72 फीसदी तो रूपौली में 62.54 फीसदी मतदान हुआ। रूपौली में राजपूत और पिछड़ी जाति के वोटर हैं।
महिला-युवा, जीत-हार को करेंगे प्रभावित
इस बार पूर्णिया में 65.38 फीसदी मतदान हुआ है। मतदान दर में दो फीसदी वृद्धि हुई है। इस बार पूर्णिया में 11 लाख 53 हजार 250 मतदाताओं ने मतदान किया है। 40 हजार नए वोटरों ने भी मतदान किया है। युवा और महिला काफी हद तक जीत-हार को प्रभावित करेंगी।
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