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लोकसभा चुनाव 2019: देश की सबसे हॉट सीट है वाराणसी, जानिये यहां के बारे में सबकुछ

लोकसभा चुनाव 2019 में देश की सबसे हॉट सीट के बारे में बात की जाए तो वाराणसी का नाम सबसे ऊपर आएगा। पिछले चुनाव में भी वाराणसी पर दुनिया भर की नजरें थीं, लेकिन तब मुकाबला गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल के बीच था। इस बार गुजरात के मुख्यमंत्री की जगह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैदान में हैं। भाजपा ने उन्हें यहां से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पिछली बार मोदी वाराणसी के साथ ही गुजरात की वड़ोदरा सीट से भी मैदान में थे लेकिन इस बार वह केवल वाराणसी से ही लड़ रहे हैं।

 फिलहाल कांग्रेस या गठबंधन की ओर से प्रत्याशी की घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन जिस तरह से बार-बार प्रियंका गांधी वाराणसी और गंगा का जिक्र अपने चुनाव प्रचार में कर रही हैं, माना जा रहा है कि उन्हें कांग्रेस यहां से उतार सकती है। हो सकता है कि प्रियंका गांधी के उतरने पर गठबंधन भी अमेठी और रायबरेली की तरह यहां से अपना प्रत्याशी न उतारे। अगर ऐसा होता है तो इस सीट का चुनाव देश में अब तक का सबसे रोचक चुनाव हो जाएगा। इस बार 22 अप्रैल सोमवार से यहां नामांकन दाखिल होंगे। मतदान अंतिम चरण में 19 मई को होना है। 

मोदी ने केजरीवाल को बड़े अंतर से हराया
पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 3 लाख 71 हजार 784 वोटों के अंतर से हराया था। मोदी को 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे। केजरीवाल को 2 लाख 9 हजार 238 मतों से ही संतोष करने पड़ा था। तब कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय 75 हजार 614 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने भी प्रत्याशी उतारा था।बसपा के प्रत्याशी विजय प्रकाश जायसवाल को 60 हजार 579 मत अौर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कैलाश चौरसिया को 45 हजार 291 मत मिले थे। 

दिलचस्प है वाराणसी लोकसभा सीट का इतिहास
वाराणसी लोकसभा सीट का इतिहास दिलचस्प है। 1952 से 1962 तक तीन लोकसभा चुनावों में यहां सेकांग्रेस प्रत्याशी ने जीत हासिल की, जबकि 1967 के चुनाव में भाकपा ने पहली और आखरी बार अपना नाम यहां से दर्ज कराया। 1971 में एक बार फिर कांग्रेस को यहां से विजय हासिल हुई, लेकिन 1977 में जनता लहर के दौरान कांग्रेस हारी अौर चंद्रशेखर ने परचम लहराया।1980 में एक बार फिर कांग्रेस लौटी और 1984 में भी जीती। 1989 में जनता दल से अनिल कुमार शास्त्री जीते। इसके बाद चार चुनावों में भाजपा ने परचम लहराया। एक बार शिरीष चंद्र दीक्षित, तीन बार शंकर प्रसाद जायसवाल को जीत मिली। 2004 में कांग्रेस ने वापसी की अौर राजेश मिश्रा सांसद बने। 2009 में बीजेपी ने फिर सीट अपने कब्जे में की अौर डॉ. मुरली मनोहर जोशी सांसद बने। 

वर्ष    सांसद    पार्टी
1952    रघुनाथसिंह    कांग्रेस
1957    रघुनाथसिंह    कांग्रेस
1962    रघुनाथसिंह    कांग्रेस
1967    सत्यनारायण सिंह    भाकपा
1971    राजाराम शास्त्री    कांग्रेस
1977    चंद्रशेखर    जनता पार्टी
1980    कमलापति त्रिपाठी    कांग्रेस (इंदिरा)
1984    श्यामलाल यादव    कांग्रेस
1989    अनिल कुमार शास्त्री    जनता दल
1991    शिरीषचंद्र दीक्षित    भाजपा
1996    शंकर प्रसाद जायसवाल    भाजपा
1998    शंकर प्रसाद जायसवाल    भाजपा
1999    शंकर प्रसाद जायसवाल    भाजपा
2004    डॉ. राजेश कुमार मिश्रा    कांग्रेस
2009    डॉ. मुरली मनोहर जोशी    भाजपा
2014     नरेंद्र मोदी        भाजपा

भारत का प्राचीनतम बसा शहर है वाराणसी
वाराणसी विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक और भारत का प्राचीनतम बसा शहर है। देश के उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी को ‘बनारस’ और ‘काशी’ के नाम से भी जानते हैं। वाराणसी को हिन्दू धर्म में सर्वाधिक पवित्र नगरों में से एक माना जाता है और इसे अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है। बौद्ध एवं जैन धर्म में भी इसे पवित्र नगरी माना जाता है।

यहां की संस्कृति का गंगा अौर श्रीकाशी विश्वनाथ मन्दिर के धार्मिक महत्व से अटूट रिश्ता है। यही कारण है कि वाराणसी को मंदिरों का शहर, भारत की सांस्कृतिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी जैसे विशेषणों से भी संबोधित किया जाता है। प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं कि बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।

हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में रहे हैं। कबीर, वल्लभाचार्य, रविदास, स्वामी रामानंद, त्रैलंग स्वामी, शिवानन्द गोस्वामी, मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, पंडित रवि शंकर, गिरिजा देवी, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आदि ऐसे ही कुछ नाम हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने हिन्दू धर्म का परम-पूज्य ग्रंथ रामचरितमानस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन यहीं पर स्थित सारनाथ में दिया था।

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