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लोकसभा चुनाव 2019: पंजाब-चंडीगढ़ में 14 सीटों पर जोर-आजमाइश

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में पंजाब व चंडीगढ़ की 14 सीटें कांग्रेस और एनडीए के लिए बेहद अहम साबित हो सकती हैं। इसलिए, दोनों के बीच इन सीटों पर जीत हासिल करने की जोर-आजमाइश चल रही है। भाजपा जहां अपने सहयोगी अकाली दल के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस अकेले लड़ रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार कांग्रेस वहां बेहतर स्थिति में है। क्योंकि राज्य में कांग्रेस की सरकार है और आम आदमी पार्टी (आप) वहां कमजोर हुई है।

पंजाब में पिछले लोकसभा चुनाव में 'आप' ने चार सीटें फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, संगरूर और पटियाला को जीतकर खलबली मचा दी थी। इसका सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ था और वह तीन सीटों जालंधर, लुधियाना और अमृतसर में ही सिमटकर रह गई थी। मगर, राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि इस बार राज्य में 'आप' कमजोर पड़ रही है। सिर्फ संगरूर सीट पर ही वह टक्कर में खड़ी दिख रही है।

पिछली बार एनडीए को सात सीटें मिली थीं
पिछले चुनाव में एनडीए ने पंजाब व चंडीगढ़ में सात सीटें जीती थीं। इनमें चार सीटें खदूर साहिब, आनंदपुर साहिब, फिरोजपुर व बठिंडा अकाली दल ने और गुरदासपुर, होशियारपुर व चंडीगढ़ भाजपा ने जीती थीं। हालांकि विनोद खन्ना के निधन के बाद गुरदासपुर सीट पर हुआ उपचुनाव कांग्रेस ने जीत लिया था।

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विधानसभा चुनाव के बाद बदले समीकरण
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में अकाली-भाजपा की सरकार थी। मगर, अब कांग्रेस सत्ता में है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार के खिलाफ अभी कोई नाराजगी जैसा भाव लोगों में नहीं है। दूसरे, इस बीच 'आप' के कई विधायक टूटकर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। अकालियों से भी एक धड़ा अलग हुआ है, जिससे पार्टी कमजोर हुई है। ऐसे में अकाली दल के समक्ष असल चुनौती अपनी चार सीटों को बचाने की है।

बाहरी उम्मीदवार उतारने से नाराजगी
दूसरी तरफ भाजपा ने गुरदासपुर से इस बार फिल्म अभिनेता सन्नी देओल को मैदान में उतारा है। जबकि होशियारपुर से केंद्रीय मंत्री विजय सांपला का टिकट काटकर विधायक सोम प्रकाश को दिया है। इससे सांपला समर्थकों में नाराजगी है। भाजपा ने अपने हिस्से की तीसरी सीट अमृतसर से केंद्रीय मंत्री हरदेव पुरी को उतारा है। पिछली बार अरुण जेटली यहां से लड़े थे, लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें हरा दिया था। पंजाब में जमीनी स्तर पर जो फीडबैक मिल रहा है, उसके अनुसार सन्नी देओल और हरदेव पुरी को बाहरी उम्मीदवार माना जा रहा है। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है।

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चंडीगढ़ सीट बचाने की चुनौती
भाजपा के लिए इस बार चंडीगढ़ सीट को बचाने की चुनौती है। माना जा रहा है कि किरण खेर के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर है। दूसरा, इस सीट पर पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय टंडन ने भी दावेदारी जताई थी, लेकिन किरण खेर दोबारा टिकट पाने में सफल रहीं। ऐसे में पार्टी के कुछ कार्यकर्ता नाराज हैं, जिससे अंदरुनी समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 tough fight between leaders on 14 seats of Punjab and Chandigarh