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27 मई, 2020|5:33|IST

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Lok Sabha Election 2019: EVM के साथ VVPAT से पड़ रहे हैं वोट, जानें कैसे डालें अपना वोट

vvpat machine india  photo  parwaz khan  ht photo

Loksabha Elections 2019: 11 अप्रैल से शुरू हुए लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर EVM (Electronic Voting Machine) मशीनों के साथ VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) मशीन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि VVPAT मशीन क्या है, ये कैसे काम करती है, इसका सबसे पहले इस्तेमाल कब हुआ था और इससे चुनाव कराने की जरूरत क्यों पड़ी? आइए आपको इस मशीन से जुड़ी पूरी जानकारी बताते हैं...

मतदान का पारंपरिक तरीका
भारत के चुनावी इतिहास की बात करें तो 1999 से पहले सभी चुनावों में पारंपरिक तरीके यानि बैलट पेपर के जरिए मतदान करवाया जाता था। मतदान का यह तरीका काफी लंबी प्रक्रिया थी, जिसकी मतगणना करना भी बहुत भारी कार्य था। साथ ही इसमें मतपेटियां बदल जाने या लूट लेने का भी खतरा बना रहता था। जिसके बाद 1999 के आम चुनावों में आंशिक रूप से ईवीएम का इस्तेमाल किया गया।

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भारत में EVM की शुरुआत
प्राप्त सूचना के अनुसार, भारत में ईवीएम का इस्तेमाल पहली बार 1982 में केरल के परूर विधानसभा में 50 मतदान केंद्रों पर हुआ। 1999 के चुनावों में आंशिक रूप से ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) का इस्तेमाल शुरू हुआ। 2004 के आम चुनावों से ईवीएम का इस्तेमाल पूरी तरह से शुरू हुआ। भारत में ईवीएम की डिजाइन और उनका उत्पादन भारत इलक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने मिलकर तैयार किया।

EVM पर उठे सवाल, VVPAT की मांग
ईवीएम से मतदान कराने के साथ ही उस पर पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद ना होने के सवाल भी उठते रहे। अधिकतर चुनाव में विपक्षी पार्टी चुनाव जीतने वाली पार्टी पर ईवीएम धांधली का आरोप लगाती रही है। आरोप लगाने वाली पार्टी में कांग्रेस, बसपा, सपा, आप और यहां तक की मौजूदा सत्ताधारी पार्टी बीजेपी भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। आरोप लगाने वाली पार्टी कहती है कि भारत चुनाव आयोग को चुनावों में VVPAT मशीन का इस्तेमाल करना चाहिए और उसकी 50 फीसदी पर्चियों का मिलान करना चाहिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने हर बार यह साफ किया है कि ईवीएम मशीन पूरी तरह से सुरक्षित और भरोसेमंद है और इससे किसी भी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। इसके बाद भी हारने वाली पार्टी अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ती है, लेकिन फिर भी कभी कोई पार्टी अपने आरोप को साबित नहीं कर पाई।

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कैसे काम करती है VVPAT मशीन और कब हुआ पहली बार इस्तेमाल
VVPAT यानि वोटर वेरीफायएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (Voter Verifiable Paper Audit Trail) मशीन को ईवीएम मशीन के साथ जोड़ दिया जाता है। जब कोई मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के सामने ईवीएम मशीन पर बटन डबाता है तो वीवीपीएटी मशीन से एक पर्ची निकलती है। इस पर्ची पर मतदाता द्वारा दिए गए वोट से संबंधित प्रत्याशी का नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम अंकित होता है। जो कि मतदाता को बताता है कि उसका वोट किसे गया है। इस पर्ची और मतदाता के बीच एक स्क्रीन होती है, जिसके जरिए सिर्फ 7 सेकंड तक पर्ची को देखा जा सकता है। उसके बाद यह पर्ची सीलबंद बॉक्स में गिर जाती है और मतदाता को नहीं दी जाती। मतगणना के दौरान विवाद या मांग उठने या जैसा भी निर्धारित हो उस हिसाब से वीवीपीएटी पर्चियों और ईवीएम से पड़ी वोटों का मिलान किया जाता है।

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VVPAT मशीन का इस्तेमाल सबसे पहले 2013 में नागालैंड के विधानसभा चुनाव में किया गया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश देकर पर्याप्त वीवीपीएटी मशीन बनवाने का आदेश दिया। 2014 में हुए आम चुनाव के बाद उठे विवाद के बाद चुनाव आयोग ने 2014 में तय किया कि अगले आम चुनाव यानि 2019 में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपीएटी मशीन का इस्तेमाल किया जाएगा।

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