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लोकसभा चुनाव 2019: देश को प्रधानमंत्री देने वाला बलिया क्रांतिकारियों की धरती है, जानिये यहां के बारे में

देश को प्रधानमंत्री देने वाला बलिया ऋषि-मुनियों, साहित्यकारों व क्रांतिकारियों की धरती है। बलिया का इतिहास गौरवशाली रहा है। माना जाता है कि महान ऋषि जमदग्नि, वाल्मीकि, भृगु व दुर्वासा आदि ऋषियों के आश्रम बलिया में ही थे। इस जिले ने देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) के नायक मंगल पांडे को दिया तो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 20 अगस्त 1942 को चित्तू पांडे ने लोकप्रिय सरकार का गठन किया और यहां कांग्रेस राज घोषित कर दिया।

समग्र क्रांति, जिसे दूसरा स्वतंत्रता संग्राम कहा गया, उसका नेतृत्व भी इसी माटी के जयप्रकाश नारायण ने किया। साहित्य के क्षेत्र में हजारी प्रसाद द्विवेदी व आचार्य परशुराम चतुर्वेदी से लेकर मौजूदा दौर में केदारनाथ सिंह जैसों की लम्बी परम्परा है।

आजादी के बाद पहले यह जिला गाजीपुर का ही एक हिस्सा था। एक नवम्बर 1879 को यह स्वतंत्र रूप से जिला हो गया। इसे राजा बलि की धरती के रूप में भी माना जाता है। बताया जाता है कि इसी कारण कारण इस क्षेत्र का नाम बलिया पड़ा।

पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे आखिरी जिला बलिया तीन ओर से बिहार से सहा है। यहां 1977 के बाद हुए चुनावों में यहां से आठ बार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सांसद रहे। 2014 में पहली बार बलिया लोकसभा सीट से भाजपा ने जीत दर्ज की थी। उसके प्रत्याशी भरत सिंह ने चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को एक लाख 39 हजार 434 मतों से शिकस्त दी थी। 

बलिया लोस सीट की वर्तमान राजनीतिक स्थिति

कुल मतदाता : 17,92,420

पुरूष मतदाता : 9,84,465

महिला मतदाता : 8,07,892

मौजूदा सांसद : भरत सिंह 

जीत का अंतर : 1,39,434 

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