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लोकसभा चुनाव 2019: सांस्कृतिक नगरी में दिखा पूरे देश का राजनीतिक रंग

काशी यूं ही लघु भारत नहीं है। पक्के महाल इलाके में जहां एक ओर गुजरात और महाराष्ट्र की धड़कन सुनी जा सकती है तो दूसरी ओर शहर के दक्षिणी इलाके में स्थित मानसरोवर मोहल्ले से हनुमान घाट के बीच आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु की संस्कृति शान से खड़ी है। काशी में इन राज्यों से आए तीर्थयात्रियों की मनोकामनाएं भले पूरी हो जाती हों लेकिन क्या उनके राज्यों में उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है अथवा नहीं। अलग-अलग राज्यों के चुनावी माहौल जानने के लिए आपके अपने अखबार हिंदुस्तान ने काशी आए गुजरात, कर्नाटक, तामिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तीर्थ यात्रियों से मिल कर उनके राज्यों की चुनावी जब्ज टटोलने की कोशिश की। प्रस्तुत है रिपोर्ट...
 

कर्नाटक: वर्तमान गठबंधन से पूरी नहीं हुईं उम्मीदें
हनुमान घाट स्थित मैसूर भवन में रुके शिक्षित और अपर क्लास के तीर्थयात्रियों के साथ चर्चा में शामिल महिलाओं-पुरुषों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान गठबंधन सरकार उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। मुश्किल से सत्ता पाने वाले दलों की प्राथमिकता प्रदेश का औद्योगिक और भौतिक विकास नहीं है। फार्मा कंपनी के मैनेजर बैंगलोर के हर्षवर्द्धन, सरकारी अधिवक्ता पद से अवकाश प्राप्त धारवाड़ के शंकर शास्त्री, उडुपी की सरस्वती विश्वनाथन और कोलार की शुभा विनोत्तमा का मानना है कि राजनीतिक दल युवाओं को गुमराह करने की राजनीति कर रहे हैं।

तामिलनाडु: युवाओं-महिलाओं की बेरोजागरी से निराशा
जंगमबाड़ी स्थित जंगमबाड़ी मठ में हमारी मुलाकात तामिलनाडु के तीर्थयात्री दल से हुई। ईरोड, कृष्णागिरी, कोयम्बटूर, चेन्नई और तिरुवल्लुर जिलों से आई महिला तीथयात्रियों जगदेवी हेरम्ब, नंदा आर. देसाई, श्रीशीलमा, जो अलग-अलग पार्टियों की समर्थक हैं, ने एक स्वर में कहा कि जीएसटी लगने से 30 हजार से अधिक छोटी औद्योगिक इकाईयां बंद हो गईं। लाखों युवक और महिलाओं को बेरोजगारी से जूझना पड़ा रहा है। अचानक आई बेरोजगारी से हम हताश हैं। हमारी सुधि लेने की इच्छाशक्ति जो दिखा रहे हैं हम उनके बारे में विचार कर रहे हैं। 

गुजरात: कारोबारी और किसान बिजली से परेशान
मछोदरी स्थित स्वामी नारायण मंदिर में ठहरे गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, राजकोट और जेतपुर से आए तीर्थयात्रियों की मानें तो गुजरात के हीरा और साड़ी कारोबारियों से लेकर किसानों के बीच तक बिजली अहम सवाल है। बड़े शहरों में कारोबारियों को 17 रुपए यूनिट तक चुकाने पड़ रहे हैं। गांवों में आवासीय बिजली पांच से छह रुपए और खेती के लिए बिजली 50 पैसे यूनिट है। किसानों को बिजली सिर्फ आठ घंटे मिलती है। एक सप्ताह दिन में और एक सप्ताह रात में। बिजली चोरी के शक में गुजरात के हजारों किसानों-कारोबारियों थानों और कचहरी के चक्कर लगा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश: जनप्रतिनिधि के चुनाव में बरती है सजगता
आंध्र प्रदेश के मतदाताओं से हमारी मुलाकात मानसरोव स्थित श्रीरामतारक आंध्रा आश्रम में हुई। पंचायती राज इंजीनियरिंग विभाग के चीफ इंजीनियर पद से रिटायर हुए हैदराबाद के यू. राधकृष्ण मूर्ति कहते हैं पेयजल, प्राइमरी हेल्थ सेंटर और विलेज डेवलपमेंट के अन्य काम, 21 साल पहले उन्होंने जहां छोड़े थे अब भी बहुत आगे नहीं बढ़ सके हैं। विजयवाड़ा के एस. कृष्णा प्रसाद, पी. सुरेश कुमार, विद्यानगर की संध्या राणी कहती हैं हमने उन्हें प्रतिनिधि चुनने की कोशिश की है जो समस्याओं के समाधान के लिए हमारे बीच रहे। अनंतपुर, चित्तूर, कड़प्पा और प्रकाशम् जिले के यात्रियों ने भी कुछ ऐसा ही कहा।

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 The political color of the whole country showing in the cultural city