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लोकसभा चुनाव 2019 : सुपौल में जातीय गुणा-भाग पर टिकी हैं उम्मीदें 

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सुपौल लोकसभा सीट पर महागठबंधन और एनडीए में सीधी टक्कर मानी जा रही है। तमाम चुनाव प्रचार के बाद अब दोनों गठबंधन के प्रत्याशियों की उम्मीदें जातीय समीकरण पर टिक गई हैं।  यहां दोनों प्रत्याशी जातीय समीकरण में फिट बैठते हैं। ऐसे में जिनका समीकरण अधिक सही बैठा, उनकी जीत तय है। 

यहां इस बार एनडीए ने जदयू के दिलेश्वर कामत को टिकट दिया है। दिलेश्वर अतिपिछड़ा वर्ग की केवट जाति से आते हैं। उधर, महागठबंधन ने निवर्तमान सांसद कांग्रेस की रंजीत रंजन को अपना प्रत्याशी बनाया है। रंजीत रंजन यादव जाति से आती हैं। सुपौल में यादव और मुस्लिम वोटरों की संख्या न सिर्फ कुल वोटरों की संख्या का लगभग आधा है बल्कि दोनों की एकजुटता नतीजों को प्रभावित करने का मादा भी रखती है। इसके अलावा अतिपिछड़ा वोटरों की संख्या भी काफी है। यादव और मुसलमान के बाद सबसे अधिक अतिपिछड़ा वोटर ही है।

इनका वोटिंग प्रतिशत भी चुनावी नतीजों को उलट-पलट सकता है। महागठबंधन की प्रत्याशी रंजीत रंजन का दारोमदार एमवाई (मुस्लिम/यादव) वोटरों के समर्थन पर टिका है, पर भाजपा-जदयू के साथ होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। परेशानी का एक कारण राजद का उनके प्रति उत्साह में न होना भी है। दूसरी तरफ एनडीए को बीजेपी के कैडर वोटरों के अलावा अतिपिछड़ों के वोट से उम्मीद है। हालांकि दोनों गठबंधनों के प्रत्याशी अब भी एक-दूसरे के कैडर वोटरों को तोड़ने की कोशिश में है। 

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 supaul third phase polls caste equation will be the deciding factor