DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

लोकसभा चुनाव 2019: लालू की गैर मौजूदगी से चुनावी रंग फीका

lalu yadav photo hindustan

राजनीति में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के प्रादुर्भाव के बाद इतिहास में यह पहला मौका होगा जब उनकी गैर मौजूदगी से सारण का चुनावी रंग फीका होगा। इस बार वोटर न सिर्फ दिलचस्प माहौल से वंचित होंगे बल्कि उनका ठेठ अंदाज भी नहीं दिखेगा। चुनाव में अब उनके गंवई शब्दों के भेदी बाण भी ताबड़तोड़ नहीं चलेंगे। सारण की राजनीति में लालू की मौजूदगी काफी  मायने रखती है। संसदीय चुनाव से बेदखल होने और फिर उनके जेल जाने से खास जमात के उत्साह में मानो शून्यता  आ गयी है। कई दशक तक खुद लालू केंद्र या राज्य की राजनीति की बदौलत अपने समर्थकों के दिलों पर राज करते रहे। उनसे चुनाव लड़ने के अधिकार खोने के बाद भी वे सारण की राजनीति को अपने दिलों दिमाग में रचाये—बसाए रखे। परोक्ष या फिर अपरोक्ष रूप से उनकी सक्रियता को लोगों ने महसूस किया। उसके बाद पिछले संसदीय चुनाव में जब राबड़ी देवी ने  पति की तैयार सियासी  जमीं पर दांव आजमाया तो उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी से पराजय का सामना करना पड़ा। 

लालू परिवार के चुनावी रण में कूदने पर विराम
17 वीं लोकसभा  चुनाव में सारण संसदीय सीट से लालू परिवार के  किसी न किसी सदस्य के चुनाव मैदान में  उतरने की समर्थकों की चाहत थी। पूर्व मुख्यमंत्री व राजद सुप्रीमो की पत्नी राबड़ी देवी चुनावी मैदान में दांव आजमाने नहीं उतर रहीं तो बेटे—बहू के भी चुनाव लड़ने की चर्चा पर किसी न किसी कारण से विराम लग चुका है।

समधी के ताल ठोकने की तैयारी
राजद नेता व पूर्व मंत्री चंद्रिका राय राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के समधी हैं। चंद्रिका ने अपनी बेटी ऐश्वर्या की शादी लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप से की है। यूं तो रिश्ते की डोर बंधने के पहले से चंद्रिका प्रसाद का राजनीतिक करियर मजबूत रहा है। वे छपरा से 1998 में जनता दल के टिकट पर न सिर्फ लोक सभा चुनाव लड़ चुके हैं बल्कि 17 वीं लोकसभा चुनाव में ताल ठोकने की तैयारी में भी हैं।  महागठबंधन के सरकार में परिवहन मंत्री रह चुके चंद्रिका राय को राजनीति भी विरासत में मिली है। वे पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय  के पुत्र भी हैं। 

‘तेरे नाम से शुरू, तेरे नाम पर खतम’
हिंदी फिल्म का एक गाना ‘तेरे नाम से शुरू, तेरे नाम पर खतम’की तर्ज पर लालू का राजनैतिक करियर सारण में भी रहा।  सम्पूर्ण क्रान्ति के अग्रदूत जेपी की कृपा पात्र बने तो छात्र राजनीति के परवान पर चढ़ते ही छपरा के वोटरों ने उन्हें गले लगा लिया। 1977 में जनता पार्टी की लहर में लालू  29 साल की उम्र में पहली बार छठवीं लोकसभा चुनाव में सांसद बने।  छपरा संसदीय सीट से 1989, 2004 और सारण लोक सभा क्षेत्र से 2009  में भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे। समय दर समय उनका राजनीतिक कद भी बढ़ता गया। मुख्यमंत्री से लेकर केंद्र की राजनीति में रेलमंत्री तक का सफर तय किया पर जिस छपरा से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ उसी सारण की संसदीय राजनीति में उनके करियर का अवसान हो गया। लोकतंत्र  के महापर्व के जरिये  मिलने वाले प्रतिनिधित्व के ताज का अवसर तक लालू को गंवाना पड़ा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 RJD supremo Lalu prasad Holi in Bihar