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मैदान के महारथी: मेनका गांधी का सियासत में खरी-खरी कहने का अलग अंदाज

maneka gandhi

गांधी परिवार की छोटी बहू मेनका गांधी ने पति संजय गांधी के निधन के करीब दो साल के अंदर ही खुद को गांधी परिवार की राजनीतिक विरासत (कांग्रेस) से दूर कर लिया। भारतीय राजनीति में मेनका गांधी बड़े फैसले लेने के साथ ही दिल से खरी-खरी कहने के लिए भी जानी जाती हैं। वन्यजीवों, महिलाओं और बच्चों के लिए उन्होंने कई ऐतिहासिक कदम उठाए। इस चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बेटे वरुण को देकर खुद बेटे की सीट सुलतानपुर से लड़ने का साहसी फैसला लिया है। 

मेनका गांधी के कंधों पर अपने लिए सुलतानपुर तो बेटे वरुण गांधी की सीट पीलीभीत को भी जीतने की बड़ी जिम्मेदारी है। मेनका छह बार पीलीभीत और एक बार आंवला से सांसद चुनी जा चुकी हैं। मेनका गांधी इस चुनाव में सुलतानपुर से चुनाव मैदान में हैं। हालांकि यहां इस बार 2014 जैसी स्थितियां नहीं हैं। लिहाजा मेनका गांधी को सपा-बसपा गठबंधन के साथ ही कांग्रेस प्रत्याशियों से भी दोनों सीटों पर पार पाने की चुनौती है। 

कांग्रेस की छवि सुधारने का काम किया :
संजय गांधी जल्द ही राजनीति में आ गए थे। संजय जहां भी जाते मेनका उनके साथ नजर आती थीं। उसी दौर में मेनका गांधी ने मैगजीन सूर्या की शुरुआत की। 1977 में जब कांग्रेस की हार हुई थी, इस मैगजीन के माध्यम से मेनका गांधी ने कांग्रेस की छवि सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस मैगजीन में इंदिरा गांधी के साक्षात्कार प्रकाशित किए जाते थे।   

संजय गांधी के निधन के बाद राजनीति में आईं :
-1982 में मेनका गांधी राजनीति में उतरीं 
-एक साल बाद ही उन्होंने पार्टी बना ली, जिसका नाम ‘संजय विचार मंच’ था
-1988 में मेनका गांधी की पार्टी का विलय जनता दल में हो गया
-मेनका इस पार्टी की महासचिव बनाई गई थी
-जनता पार्टी की सरकार में मेनका गांधी 1989 से 1991 तक पर्यावरण मंत्री थीं
-2004 में मेनका गांधी भाजपा में शामिल हो गई थीं। 

निजी जीवन 
-26 अगस्त 1956 दिल्ली में जन्म 
-लॉरेंस स्कूल में पढाई पूरी करने के बाद लेडी श्री राम कॉलेज में दाखिला लिया, फिर जेएनयू से जर्मन भाषा की पढ़ाई की। 
-1974 में मेनका गांधी की शादी तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी से हुई थी। 
-1980 में वरुण गांधी का जन्म हुआ
- जून 1980 में एक विमान हादसे में संजय गांधी का निधन हो गया

काम किया तो वैश्विक पहचान बनी
मेनका हमेशा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रहीं। विभिन्न सरकारों में केंद्रीय मंत्री रहते हुए उन्होंने वन्य जीवों की रक्षा, बेसहारा बच्चों और महिलाओं के कल्याण आदि से संबंधित कई बड़े फैसले लिए। उन्हें कई वैश्विक अवार्ड भी मिले। 

कुछ प्रमुख पुरस्कार:   
-सुप्रीम मास्टर चिंग हेय इंटरनेशनल एसोसिएशन की तरफ़ से शाइनिंग वर्ल्ड कम्पैशन अवार्ड जिसके साथ 20,000 डॉलर भी मिले थे। 
-महिला सक्षमीकरण और बालकल्याण के कार्य के लिए ह्यूमन एचीवर अवार्ड।
-रुक्मिणी देवी अरुन्दले एनिमल वेलफेयर अवार्ड
-1992 में आरएसपीसीए की तरफ़ से लार्ड एर्स्किने अवार्ड
-1994 में पर्यावरण कार्यकर्ता और शाकाहारी पुरस्कार
-1996 में प्राणी मित्र पुरस्कार
-1996 में पर्यावरण के कार्य के लिए महाराणा मेवार फाउंडेशन अवार्ड
-1997 में मार्चिंग एनिमल वेलफेयर एंड सेल्लिंग प्राइज, स्विट्ज़रलैंड
-1999 में वेणु मेनोन एनिमल अलायिज फाउंडेशन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
-1999 में सत्य, अहिंसा और शाकाहार के कार्य के लिए भगवान महावीर फाउंडेशन अवार्ड
-2001 में इंटरनेशनल विमेंस एसोसिएशन वुमन ऑफ़ द इयर अवार्ड, चेन्नई
-2001 में पर्यावरण और प्राणी कल्याण के कार्य के लिए दीनानाथ मंगेशकर आदिशक्ति पुरस्कार
-2008 में एएसजी जयकर अवार्ड

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  • Web Title:lok sabha elections 2019: read how maneka gadhi became a leader