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मैदान के महारथी: जेएनयू में आजादी के नारों से मिला नया सियासी चेहरा

kanhaiya kumar

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार बेगूसराय लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की वजह से एक बार फिर से चर्चा में हैं। महज 32 साल के कन्हैया तीन साल पूर्व जेएनयू में आजादी के तराने से खासे मशहूर हुए।

ये तराने उन्होंने गरीबी, भूख, सामंतवाद आदि से मुक्ति को लेकर गाए, पर इसका खामियाजा उन्हें जेल जाकर भुगतना पड़ा। अपने जोरदार भाषणों के लिए चर्चित कन्हैया कुमार पीएचडी हैं और वर्ष 2016 में ‘बिहार से तिहाड़ तक' नाम से एक पुस्तक भी लिख चुके हैं। बिहार के बेगूसराय के बीहट के निवासी और बेहद गरीबी में पले-बढ़े कन्हैया कुमार भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का जबरदस्त खिलाफत करने के लिए जाने जाते हैं।

बचपन से ही कन्हैया कुमार का झुकाव प्रगतिशील वाम विचारों की ओर था। वे इप्टा के कार्यक्रमों में सक्रियता से भाग लेते थे। देशद्रोह के कथित नारे लगाने वालों का साथ देने के आरोप में कन्हैया कुमार को 12 फरवरी 2016 को गिरफ्तार किया गया पर साक्ष्यों के अभाव में जमानत पर छोड़ दिए गए। जेएनयू अध्यक्ष के रूप में अपनी गिरफ्तारी के बाद वे रातोंरात प्रसिद्ध हो गए।

निजी जीवन-
'जन्म 13 जनवरी 1987 को बेगूसराय के बीहट में
'कन्हैया कुमार के पिता जयशंकर सिंह और माता मीना देवी-आंगनबाड़ी सेविका
'प्रारंभिक स्कूली शिक्षा बरौनी शहर में हुई। उन्होंने 10वीं 2002 में पास की
'मोकामा से इंटर और पटना से स्नातक वर्ष 2007 में किया 
'नालंदा खुला विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए
'जेएनयू से अफ्रिकन स्टडीज में फरवरी 19 में पीएचईडी की 


राजनीतिक जीवन
'कन्हैया कुमार का राजनीतिक जीवन 13 साल पुराना है
'वर्ष 2007 में छात्र संगठन एआईएसएफ से जुड़े थे कन्हैया कुमार
'फरवरी 2019 में मूल राजनीति में आए
'3 मार्च 2016 से उनका सार्वजनिक जीवन शुरू
'बिहार के बेगूसराय से 9 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव का नामांकन किया
'सीपीआई ने उन्हें 29 अप्रैल 2018 को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया 


सोशल मीडिया
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  • Web Title:lok sabha elections 2019: read how kanhaiya kumar became a leader from a student