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लोकसभा चुनाव 2019 : सियासी जमीन पर शिक्षामित्रों के मुद्दे की धमक

इस लोकसभा चुनाव में मुद्दों की जमीन पर शिक्षा बहुत उर्वर सिद्ध हो रही है। हालांकि शिक्षा की गुणवत्ता दलों की प्रतिबद्धता से गायब है लेकिन इससे जुड़े लोगों के मुद्दे विपक्षी दलों समेत सत्ताधारी दल को भी भा रहे हैं। लोकसभा चुनाव का महासमर शुरू होते ही शिक्षामित्रों, अनुदेशक और शिक्षा से जुड़े संविदाकर्मियों की समस्याओं पर खूब बात हो रही है। प्रदेश में दो लाख से ज्यादा संविदाकर्मी शिक्षा विभाग में काम रहे हैं और नेता इन्हें साधने के लिए सारे पैंतरे आजमा रहे हैं।  

इनकी समस्याओं को मुद्दा बनाकर नेताओं के बीच ट्विटरवार हो चुका है। नेता इनसे संपर्क कर रहे हैं। उनकी समस्याओं को सुन रहे हैं। आश्वासन दे रहे हैं। इससे उन्हें फौरी राहत भले न मिले लेकिन पूरे लोकसभा चुनावों में उनकी समस्याओं की धमक जरूर सुनाई देगी।  लोकसभा चुनाव क्या आया, सरकारी स्कूलों में लगभग 1.70 लाख शिक्षामित्र और 33 हजार अनुदेशकों की समस्याएं सभी विपक्षी दलों को याद आ गई।  विपक्षी इसके बहाने सत्ता पक्ष पर निशाना साध रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बीते लोकसभा चुनावों में शिक्षामित्रों को खासी तवज्जो दी थी।

सहायक अध्यापक पदों पर समायोजन रद्द होने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में बाद 2015 में वाराणसी में प्रधानमंत्री  नरेन्द्री मोदी ने मंच से शिक्षामित्रों को आश्वस्त किया था कि अदालत के आदेश की प्रतियां मिलने के बाद इस मसले का स्थायी समाधान निकाला जाएगा। हालांकि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी शिक्षामित्रों को राहत नहीं  दी और उनका समायोजन  रद्द कर  दिया।  तब से शिक्षामित्र अपने समायोजन को लेकर इधर-उधर भटक रहे हैं।  कभी वे सत्ता पक्ष से मिलते हैं तो कभी विपक्षी पार्टियों से। आश्वासनों के ढेर पर खड़े शिक्षामित्र अब भी किसी समाधान की राह देख रहे हैं। यूपी के लगभग सभी सांसद शिक्षामित्रों के पक्ष में अपनी ही सरकार को पत्र लिख कर इसके समाधान के लिए अनुरोध कर चुके हैं लेकिन  हुआ कुछ नहीं।  

कांग्रेस महासचिव व पूर्वी यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी अपने लखनऊ दौरे में यूपी के शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से मिल चुकी हैं और उन्हें आश्वस्त भी कर चुकी हैं।  वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी शिक्षामित्रों के प्रति चिंतित दिखते हैं। शिक्षामित्रों के समायोजन का फैसला सपा सरकार में ही लिया गया था। वह समय-समय पर शिक्षामित्रों की समस्याओं को उठाते रहते हैं और लगातार उनके संगठनों से मुलाकात कर उनके मुद्दों को पुरजोरी से उठाते हैं। 

2012 के विधानसभा चुनाव में शिक्षामित्रों के समायोजन का मुद्दा सपा के घोषणापत्र का हिस्सा भी बना और सरकार में आने के बाद अखिलेश यादव ने शिक्षामित्रों के समायोजन करवाया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सत्ता संभालने के बाद कई बार शिक्षामित्र संगठनों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है। भाजपा सरकार ने शिक्षामित्रों को रियायत देते हुए लिखित परीक्षा में अधिकतम भारांक देने का भी निर्णय लिया गया। उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में हाईपॉवर कमेटी भी बनाई लेकिन उसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। 

 अनुदेशकों को अब भी मिल रहे 8470 रुपये
आरटीई  एक्ट लागू होने के बाद 2014 में 33 हजार अनुदेशक आरटीईटी एक्ट के तहत रखे गये। इन्हें 8470 रुपये मानदेय दिया जाता है। हालांकि सर्व शिक्षा अभियान के तहत केन्द्र सरकार ने इनका मानदेय बढ़ा कर 17 हजार रुपये कर दिया है लेकिन अब भी राज्य सरकार इन्हें पुराना मानदेय देती है। हमारे पक्ष में भाजपा के लगभग 4 दर्जन सांसदों और विधायकों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा लेकिन हमें आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।  हमें अब ठोस कार्रवाई चाहिए। 
-जितेन्द्र शाही,प्रदेश अध्यक्ष, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन
 शिक्षामित्रों की समस्याएं

2011 में पूववर्ती बसपा सरकार ने प्रदेश में 2001 से 2010 तक संविदा पर नियुक्त हुए 1.70 लाख शिक्षामित्रों को आरटीई एक्ट के तहत दूरस्थ विधि से दो वर्षीय बीटीसी कराने का निर्णय लिया था।  इसके बाद सत्ता में आई सपा सरकार ने इन्हें सहायक अध्यापकों के पद पर समायोजित करने का निर्ण लिया। इन्हें अध्यापक पात्रता परीक्षा से छूट दी गई । इसी आधार पर 2015 में हाईकोर्ट और जुलाई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवैध घोषित कर दिया । अब शिक्षामित्र अपने लिए स्थायी नौकरी की मांग कर रहे हैं। 

 प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों को दीं ये सहूलियतें
 1.70 लाख शिक्षामित्रों में से लगभग 25 हजार शिक्षामित्र  टीईटी पास कर शिक्षक बन चुके हैं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए जुलाई, 2018 को उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी बनाई थी। इस समिति में प्रमुख सचिव न्याय अध्यक्ष तथा अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा और प्रमुख सचिव गृह शामिल थे। इस कमेटी को समस्याओं के समाधान पर अपनी  रिपोर्ट देनी थी। 

 राज्य सरकार ने जुलाई 2017 में समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया। 
 शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिये जाने की व्यवस्था की गई। प्रतिवर्ष की सेवा का 2.5 अंक और अधिकतम 25 अंक शिक्षक भर्ती की मेरिट सूची में जोड़े जाएंगे। 
शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु तक मौका देने की व्यवस्था की। 

 और भी हैं मुद्दे लेकिन दलों को नहीं आते याद-
 प्रदेश में सरकारी इंटर कॉलेजों की संख्या कम, निजी स्कूलों के भरोसे शिक्षा व्यवस्था
   सहायताप्राप्त स्कूलों में शिक्षकों के लगभग 50 फीसदी पद रिक्त
 सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा का निम्न स्तर
  व्यावसायपरक कोर्स मौजूद लेकिन रोजगार नहीं
  निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं
 यूपी में इंजीनियरिंग कॉलेजों की भरमार लेकिन गुणवत्ता पर सवाल, इसलिए नहीं मिल रही नौकरियां 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019: Political On The Rights of Mothers Issues