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लोकसभा चुनाव 2019: दल छोटे मगर बड़े-बड़ों के बदल देते हैं समीकरण

पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह कहावत खूब प्रचलित है.. खेलब न खेले देब, खेलवे बिगाड़ब... सियासी मुकाबले में छोटे दल इस खेल में खासे माहिर हैं। अपना दल व सुभासपा को छोड़  दिया जाए तो  बीते विधानसभा व  लोकसभा चुनावों में छोटे दल अब तक जीत का स्वाद तो नहीं चख पाए, मगर बड़े दलों की जीत में हमेशा रोड़े बनते रहे हैं। 

इस बार भी पिछले लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों की तरह तमाम छोटे दल सियासी मैदान में उतरने को बेताब हैं। इनमें राष्ट्रीय परिवर्तन दल, जनवादी पार्टी, सर्वजन विकास पार्टी, साधारण आम पार्टी समेत तमाम ऐसे दल हैं जो बड़े दलों के बड़े प्रत्याशियों की जीत-हार मेंं उलटफेर कर सकते हैं। खास यह कि इस बार छोटे दलों का तीसरा मोर्चा भी चुनावी मैदान में उतरने जा रहा है।  

दरअसल, जातिवादी राजनीति के बदौलत ही इन छोटे दलों ने सियासत में कदम रखा। उसी के बदौलत पूर्वांचल में ताकत बनकर उभरे और विधानसभा व लोकसभा चुनावों के दौरान बड़ी पार्टियों से समझौता करते रहे। जरा पिछले चुनावों को याद करें। 2007 में सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के साथ कांग्रेस भी गठबंधन को उतावली थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में जनवादी पार्टी के साथ भाजपा ने गठबंधन किया और पूर्वांचल की चार सीटें सौंप दी।  

वर्ष 2011 में बसपा से अलग होने के बाद कौमी एकता दल ताकत के रूप में पूर्वांचल में उभरा। मुख्तार-अफजाल की जोड़ी ने पूर्वांचल के हर जिले में विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारे। यह अलग बात रही कि 2014 में मोदी लहर में सब हवा हो गए। बाद में 2017 के पहले कौमी एकता दल ने अपनी पार्टी का विलय बसपा में कर दिया।   

इसी तरह 2007 , 2012 विस व 2014 के लोकसभा चुनाव में सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पूर्वांचल की राजनीति में छोटे दलों में सबसे मजबूत माने जाते रहे हैं। कमोबेश, विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के वाराणसी, गाजीपुर, भदोही, आजमगढ़ एवं सोनभद्र में 22 से 40 हजार वोट इन दलों की झोली में गए। अपना दल की ताकत रही कि लोकसभा के साथ ही पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा जैसी पार्टी को दस सीटें देनी पड़ी। 


अपना दल: 1995 में डा. सोनेलाल पटेल ने इस पार्टी का गठन किया। डा. सोनेलाल पहले बसपा में थे। डॉ. पटेल ने कई विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव पार्टी की ओर से लड़ा मगर जीत हासिल नहीं हुई। वर्तमान में अपना दल दो धड़ों में बंट चुका है। एक धड़ा सोनेलाल की पत्नी कृष्णा पटेल का है तो दूसरा उनकी बेटी केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल का। भाजपा संग अनुप्रिया का गठबंधन हैं। 2014 में अद के दो सांसद व 2017 के विस में 10 विधायक चुने गए। 

भारतीय समाज पार्टी: 27 अक्तूबर 2002 को पार्टी का गठन हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ओमप्रकाश राजभर। जातिवादी राजनीति से सियासत में कदम रखने वाले ओमप्रकाश ने पूर्वांचल में अपनी ताकत का विरोधी दलों को अहसास बखूबी कराया। ओमप्रकाश ने वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की 36 सीटों पर प्रत्याशी खड़ा किए। 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन होने से फायदा मिला और चार सीटें उनकी पार्टी की झोली में आई। 

कौमी एकता दल: वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद बसपा से बाहर निकाले जाने पर मुख्तार और अफजाल अंसारी ने जातिगत राजनीति के बदौलत वर्ष 2011 में अलग पार्टी कौमी एकता दल का गठन किया। 2012 में हुए विस चुनाव में मुख्तार व उनके बड़े भाई शिवगबतुल्ला अंसारी इसी बदौलत जीते। अब कौएद का बसपा में विलय हो चुका है। 

जनवादी पार्टी: वर्ष 2004 में पार्टी का गठन हुआ। पार्टी के मुखिया हैं ओमप्रकाश चौहान। जातिवादी राजनीति के आधार पर सियासत में कदम रखने वाली पार्टी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी को समझौता करना पड़ा और पूर्वांचल की चार सीट घोसी, अतरौलिया, जखनियां एवं मऊ सौंपी। 

निषाद पार्टीः इसके अध्यक्ष हैं डा. संजय निषाद। गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में डॉ. संजय निषाद ने अपने पुत्र  इंजी. प्रवीण निषाद को सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया। करीब चार दशक बाद गोरखपुर सीट निषाद पार्टी की मदद से पहली बार सपा के खाते में चली गई। अब सीटों के विवाद में सपा से गठबंधन टूट गया। अभी वह भाजपा के साथ हैं।  

साधारण आदमी पार्टीः इसके अध्यक्ष राजेन्द्र गांधी हैं। मूलत: बनारस के रहने वाले गांधी ने 2017 में अपनी पार्टी बनायी और एक दर्जन छोटे पार्टियों के साथ मिलकर तीसरा मोर्चा बनाया है। 

सामाजिक मोर्चा: वर्ष 2011 में पार्टी का गठन हुआ। सोनभद्र में मुख्यालय है। इसके अध्यक्ष 
चौधरी यशवंत सिंह। संगठन का पता नहीं है मगर बनारस व सोनभद्र में चुनावी मैदान में ताल ठोकने का दावा किया है। 

चुनाव के दौरान दिखने वाली पार्टियां

इसके अलावा जिन पार्टियों का प्रादुर्भाव चुनाव के दौरान ही दिखता है वह हैं पृथ्वीराज जनशक्ति पार्टी, जय भारत समाज पार्टी, सर्व समाज पार्टी, शोषित समाज दल, प्रगतिशील मानव समाज,  बहुजन शक्ति पार्टी, जनअधिकार मोर्चा, राष्ट्रीय समाजवादी जनक्रांति पार्टी, राष्टीय प्रगतिशील मोर्चा, गोडवाना गणतंत्र पार्टी, बहुजन समता पार्टी, सर्वजन महासभा, भारतीय रिपब्लिक पार्टी आदि। 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 Parties change the small but big-aged equation