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लोकसभा चुनाव 2019: नोटा ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नींदें उड़ाईं

लोकसभा के दूसरे चरण का प्रचार थम चुका है और तीसरे चरण का चुनाव प्रचार चरम पर है। सभी पार्टियों ने प्रचार के अंतिम चरण में ताकत झोंक दी है। स्टार प्रचारकों का ताबड़तोड़ दौरा चल रहा है।  इन सबके बीचा मतदाताओं की खामोशी ने पार्टियों की नींद उड़ा दी है। नोटा के बटन ने बचने की कोशिश प्रत्याशियों को करनी होगी, वर्ना यही प्रत्याशियों की लुटिया डुबो सकती है।

आठ सीटों पर कांटे का मुकाबला
जमुई में चुनाव सम्पन्न हो चुका है। पूर्व बिहार, कोसी और सीमांचल की पांच सीटों पर दूसरे, चार पर तीसरे और एक पर चौथे चरण में मतदान होना है। इसमें आठ सीटों पर एनडीए गठबंधन से जदयू के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इन सीटों पर कांटे का मुकाबला है। पिछले चुनावों में इन सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बिहार में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव की चुनावी सभाएं हो चुकी है। 16 अप्रैल को भी कई नेताओं के कार्यक्रम हैं। सबकी निगाहें मतदाताओं पर टिकी हुई है। सभी पार्टियों के प्रत्याशी नोटा बटन से सहमे हुए हैं।

प्रत्याशियों को मतदाताओं की नाराजगी का भय 
प्रत्याशियों को मतदाताओं की नाराजगी का भय सता रहा है। शुरू में टिकट और सीट वितरण को लेकर भागलपुर, बांका और कटिहार में भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखी थी। टिकट नहीं मिलने पर पुतुल कुमारी निर्दलीय चुनाव मैदान में है। नाराजगी दूर करने और मतदाताओं में उत्साह भरने को डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने भागलपुर में रोड शो किया। पार्टी, प्रत्याशी और समर्थक मतदाताओं से नोटा बटन नहीं दबाने की अपील कर रहे हैं। लेकिन प्रत्याशियों की चिंता नोटा को लेकर दूर नहीं हो रही है।
 
सबसे कम कटिहार में नोटा के बटन दबे थे
पिछले लोकसभा चुनाव में 10 सीटों पर 153919 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था। यह संख्या किसी भी प्रत्याशी की जीत के अंतर से अधिक रहा। भागलपुर सीट पर तो नोटा से कम मतों से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सैयश शाहनवाज हुसैन की हार हुई थी। सबसे अधिक खगड़िया लोकसभा सीट पर 23 हजार से अधिक मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया था। सबसे कम कटिहार में नोटा के बटन दबे थे। 

2014 में दबे नोटा के बटन
भागलपुर

शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल(राजद)- 367623
सैयद शाहनवाज हुसैन(भाजपा)- 358138
जीत और हार का अंतर- 9485
नोटा- 11875

बांका
जयप्रकाश नारायण यादव(राजद)-285150
पुतुल कुमारी(भाजपा)-275006
जीत और हार का अंतर-10144
नोटा-    9753

किशनगंज
मो. अशराउल हक(कांग्रेस)- 493461
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल(भाजपा)- 298849
जीत और हार का अंतर-194612    
नोटा- 17206

कटिहार
तारिक अनवर(राकांपा)- 431292
निखिल कुमार चौधरी(भाजपा)- 316552
जीत और हार का अंतर- 114740
नोटा- 3287

पूर्णिया
संतोष कुमार(जदयू)- 418826
उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह(भाजपा)- 302157
जीत और हार का अंतर- 116669
नोटा-    11982

सुपौल
रंजीता रंजन(कांग्रेस)- 332927
दिलेश्वर कमैत(जदयू)- 273255
जीत और हार का अंतर- 50672
नोटा-    21996

अररिया
तसलीमउद्दीन(राजद)- 407978
प्रदीप कुमार सिंह(भाजपा)- 261474
जीत और हार का अंतर-146504
नोटा- 16608

मधेपुरा
राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव(राजद)- 368937
शरद यादव(जदयू)- 312728    
जीत और हार का अंतर- 56209
नोटा-    21924

खगड़िया
चौधरी महबूब आलम(लोजपा)- 313806
कृष्णा कुमारी यादव(राजद)- 237803
जीत और हार का अंतर- 76003    
नोटा - 23868

मुंगेर
वीणा देवी(लोजपा)- 352911
राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह(जदयू)- 243827
जीत और हार का अंतर- 109084    
नोटा- 15420
 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019: NOTA became cause of troubleness for political parties and candidates