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लोकसभा चुनाव 2019: यूपी में जातीय समीकरण साधने को नेताओं ने लांघी आचार संहिता

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बसपा सुप्रीमो मायावती और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पश्चिम में यह विवादित बयान यूं ही नहीं दिए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरणों को साधने के लालच में आचार संहिता की सीमा को लांघा गया था। गठबंधन की पहली रैली में मुस्लिम मतों को साधने के लिए यह बयान दिया गया, वहीं भाजपा ने हिन्दुत्व के नाम पर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए यह बयान दिया था। सियासी दलों के रणनीतिकारों का मानना था कि यहां सिर्फ ध्रुवीकरण के दम पर ही जीत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। 
 

चुनाव आयोग की कार्रवाई की जद में आए विवादित बयान का यह सिलसिला सात अप्रैल को गठबंधन की देवबंद में हुई पहली रैली से शुरू हुआ। इस रैली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुस्लिम वोटों को हासिल करने के लिए विवादित बयान दिया था। इसके जवाब की कमान भाजपा की ओर से संभाली थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। उन्होंने अगले दिन से ही अपनी सभाओं में इस पर सियासी वार करने शुरू कर दिए थे। लेकिन नौ अप्रैल को मेरठ के सिसौली गांव में आयोजित जनसभा में उन्होंने बयान दिया कि यदि गठबंधन के नेताओं को अली पर विश्वास है तो हमें बजरंगबली पर। गठबंधन वाले मान चुके हैं कि बजरंगबली के अनुयायी उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। 
 

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इसके साथ ही मुजफ्फरनगर दंगा और कैराना पलायन प्रकरण की गूंज भी भाजपा की सभी जनसभाओं में रही थी। इन बयानों के कारण ही बसपा सुप्रीमो पर दो दिन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन के लिए प्रचार पर रोक लगी है। 

वेस्ट में मुस्लिम हैं बड़ा फैक्टर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता बड़ा फैक्टर हैं। यहां हर सीट पर औसतन 35 से 40 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। 13 लोकसभा सीटों को मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। गठबंधन के नेता दलित, मुस्लिम और जाट मतदाताओं को एकजुट करने में लगे हैं। दलित और मुस्लिम वोट बैंक को गठबंधन की बड़ी ताकत माना जा रहा है। 

 

गठबंधन के नेताओं का मानना है कि यदि पूर्व के चुनाव में बसपा, सपा और रालोद को अलग-अलग मिले मत एक साथ आ जाते हैं तो वह भाजपा को यूपी में पटखनी देने में सफल रहेंगे। जबकि भाजपा का मानना है कि वह हिन्दुत्व के मुद्दे पर इस चुनाव को जीत सकती है और यदि सारे हिंदू एकजुट होकर उसके पक्ष में मतदान करते हैं तो उनकी जीत तय है।

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 Know why the UP leaders including Azam Khan give controversial statement ahead of second phase of election