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लोकसभा चुनाव 2019 : मतदान से दूर क्यों हो रहे कश्मीरी

kashmiri voters ani file photo

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आत्मघाती हमले में 40 जवानों की शहादत के बाद से घाटी के हालात बदल गए हैं। इस घटना के बाद से सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच लगातार जंग की स्थिति है। ऐसे माहौल में दलों के नेता और कार्यकर्ता, दोनों ज्यादातर घरों में ही रहते हैं। खासकर पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से जारी चेतावनी के दौरान लोग चुनाव प्रचार से दूर ही रहे। यही वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती समेत अन्य प्रत्याशियों को मतदाताओं की उदासी का सामना करना पड़ा। 

छह मई को पांचवें चरण में शोपियां और पुलवामा में चुनाव होगा। लेकिन अब तक कश्मीर में मतदान प्रतिशत बहुत कम रहा है। पहले दो चरणों के दौरान श्रीनगर में 14.8 फीसदी, अनंतनाग में 13.6 फीसदी और बिजबेहरा में 2.04 फीसदी मतदान हुआ। इसे मुफ्ती के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। मुफ्ती के अलावा अन्य प्रत्याशियों ने भी मतदाताओं की परेशानियों को समझने का प्रयास नहीं किया। मतदान केंद्रों का चुनाव इस तरह से  किया गया था कि कोई पत्थरबाज या आतंकी हमले की हिमाकत नहीं कर सके, लेकिन मतदाता घर से ही नहीं निकले। भाजपा के एक नेता ने कहा कि राज्य के नेताओं ने लोगों को उपेक्षित कर दिया, तो लोगों ने मतदान करने की बजाय घर में बैठना ज्यादा मुनासिब समझा। 

कश्मीर विश्वविद्यालय के नूर अहमद बाबा कहते हैं, ‘लोगों के लिए राज्य के चुनाव मायने रखते हैं। यदि लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी हुए होते तो मतदान प्रतिशत बढ़ जाता। लेकिन 2018 में पीडीपी-भाजपा गठबंधन टूटने के बाद से जम्मू-कश्मीर में गवर्नर का शासन है।’ सीपीएम के नेता मोहम्मद यूसुफ तरिगामी कहते हैं, ‘राज्य में कारोबार और विकास परियोजनाओं का बुरा हाल है जिसके कारण लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।  

कश्मीर में हिंसा रहित चुनाव बड़ी उपलब्धि : निर्मल
जम्मू-कश्मीर में खराब वोट प्रतिशत के बावजूद भाजपा नेता और पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री निर्मल सिंह उपलब्धियां गिनाने से नहीं चूके। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष  निर्मल सिंह के मुताबिक राज्य में बिना किसी हिंसा के चुनाव कराना एक बड़ी उपलब्धि है। चालू लोकसभा चुनाव के दौरान अनंतनाग में महज 13 फीसदी मतदान होने के सवाल पर सिंह ने कहा, ‘दूसरे नजिरए से देखिए तो मतदान प्रतिशत बढ़ा है। पिछले चुनाव में श्रीनगर में मतदान प्रतिशत केवल दो फीसदी था। यह कोई बड़ा सुधार तो नहीं है, लेकिन एक अच्छा संकेत जरूर है। 

(Mint से साभार)

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