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संबलपुर लोकसभा सीट: जानें यहां का राजनीतिक इतिहास व आंकड़े

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संबलपुरी साड़ियों के लिए विख्यात संबलपुर ओडिशा के पश्चिमी हिस्से में बसा हुआ है। प्राचीन काल में ये शहर संबलक नाम से जाना जाता था। माना जाता है कि इस शहर से हीरे का निर्यात किया जाता था। धर्म और अध्यात्म की बात करें इस क्षेत्र में महामाया संबलेश्वरी मां का विख्यात मंदिर है। संबलपुर में बना हीराकुंड डैम ने इस शहर को आर्थिक मजबूती दी है। 1957 में महानदी पर बना ये बांध दुनिया के लंबे बांधों में से एक है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेडी-बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हुई थी और बीजू जनता दल को मात्र 30 हजार वोटों से जीत मिली। 2014 में दूसरे नंबर पर रहने वाली बीजेपी 2019 में इस सीट पर जोर आजमाइश कर रही है। हालांकि बीजेडी को अपने काम पर भरोसा है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

संबलपुर लोकसभा सीट 1998 से बीजू जनता दल का गढ़ बना है। हालांकि आजादी के बाद 1952, 57 और 62  के लोकसभा चुनाव में गणतंत्र परिषद और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का इस सीट पर कब्जा रहा। 1967 में इस सीट पर पहली बार कांग्रेस जीती, 1971 में भी कांग्रेस को जीत मिली। लेकिन 1977 में इंदिरा विरोधी लहर के दौरान कांग्रेस को ये सीट गंवानी पड़ी और जनता पार्टी के गणनाथ प्रधान चुनाव जीते।

1980 और 84 के चुनाव में मतादाताओं का मिजाज फिर बदला और कांग्रेस के कृपासिंधु भोई चुनाव जीते. 1989 के चुनाव में जनता दल की एक बार फिर वापसी हुई और भवानी शंकर होता विजयी हुए. 1991 में कांग्रेस के टिकट पर कृपासिंधु ने दमदार वापसी की. उनकी जीत का सिलसिला 1996 में भी जारी रहा. 1997 में जब बीजेडी वजूद में आई तो इस सीट का समीकरण बदल गया।

1998 के लोकसभा चुनाव में प्रसन्न आचार्य बीजेडी के टिकट पर चुनाव जीते. 1998 के बाद 99 और 2004 में भी बीजेडी के टिकट उनकी जीत हुई. 2009 में इस सीट पर कांग्रेस के अमरनाथ प्रधान चुनाव जीते. 2014 में बीजेडी ने इस सीट से नागेन्द्र प्रधान को मैदान में उतारा. यहां के मतदाताओं ने एक बार फिर से नवीन पटनायक की पार्टी में अपना भरोसा जताया।

सामाजिक ताना-बाना

संबलपुर संसदीय क्षेत्र ओडिशा के अनुगुल, देबगढ़, झारसुगुडा और संबलपुर जिलों में फैला है. 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की जनसंख्या लगभग 19 लाख है। यहां की 81 फीसदी आबादी गांव-देहात में रहती है जबकि 19 प्रतिशत जनसंख्या का निवास स्थान शहरों में हैं।  इस सीट पर अनुसूचित जाति का आंकड़ा 17.91 प्रतिशत है, जबकि आदिवासी जनजाति यहां पर लगभग 30 फीसदी के आस-पास पाई जाती है।

2014 लोकसभा चुनाव के मुताबिक इस सीट पर 12 लाख 97 हजार 98 वोटर्स थे. यहां पर 75.89 फीसदी मतदान हुआ था. इस सीट पर पुरुष मतदाताओं की संख्या 6 लाख 69 हजार 36 है। जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6 लाख 28 हजार 62 है।

संबलपुर लोकसभा में विधानसभा की 7 सीटें हैं. ये सीटें हैं कुचिन्दा, रेंगली, संभलपुर, रैराखोल, देवगढ़, छेंदीपाड़ा, अथामल्ल्कि. इनमें से 2014 के विधानसभा चुनाव में कुचिन्दा और देवगढ़ सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी. बाकी पांच सीटों पर बीजेडी ने कब्जा जमाया था।

पिछले लोक चुनाव में संबलपुर लोकसभा सीट के आंकड़े

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेडी और बीजेपी के बीच कड़ी टक्कर हुई थी। पिछले लोक चुनाव में बलांगीर लोकसभा सीट के आंकड़े हालांकि कांग्रेस ने भी इस सीट पर अच्छी खासी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की। बीजेडी के नगेन्द्र प्रधान को 3 लाख 58 हजार 618 वोट मिले। जबकि बीजेपी के सुरेश पुजारी 3 लाख 28 हजार 42 वोट लाकर दूसरे स्थान पर रहे। नगेन्द्र प्रधान ने इस सीट पर 30 हजार 576 वोटों से जीत हासिल की। कांग्रेस के अमरनाथ प्रधान 2 लाख 42 हजार 131 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे। 2014 में यहां मतदान का प्रतिशत 75.92 रहा था।

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