DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

हुगली लोकसभा सीट: यहीं है सिंगूर जहां से टाटा की नैनो को बाहर जाना पड़ा था

tata nano

हुगली लोकसभा सीट 1951 में अस्तित्व में आई थी। सिंगुर, जहां टाटा को नैनो कार परियोजना के लिए जमीन देने को लेकर विवाद हुआ था, वह इसी संसदीय क्षेत्र में पड़ता है। यह लोकसभा सीट तृणमूल के कब्जे में है। इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा का भी तेजी से विस्तार हो रहा है।

1952 में जब पूरे देश में कांग्रेस की लहर थी, तब भी यहां से कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं जीता था। 1952 में एचएमएस के एनसी चटर्जी जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था। 2009 में तृणमूल कांग्रेस की डॉ. रत्ना डे नाग ने छह बार से सांसद रहे माकपा के दिग्गज नेता रूपचांद पाल को हराया था।। 2014 में भी डॉ. रत्ना डे नाग ने अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने माकपा के प्रदीप साहा को हराया था।

डॉक्टर रत्ना डे को 614312 वोट मिले। वहीं, दूसरे नंबर पर रहे सीपीएम के प्रदीप साहा को 425228 वोट मिले। तकरीबन 1 लाख 90 हजार वोटों से सीपीएम को पराजय मिली। 2014 के चुनाव में कुल 82.88 फीसदी वोटिंग हुई जबकि 2009 में 82.71 फीसदी वोटिंग हुई थी। 2014 में AITC को 49.37 फीसदी CPM को 42.36 फीसदी और बीजेपी को 3.42 फीसदी वोट मिले।

पिछले लोकसभा चुनाव में हुगली सीट के आंकड़े
सीट पर अभी मौजूदा सांसद- डॉ. रत्ना डे, तृणमूल कांग्रेस
जीत का अंतर- 1,89,084 वोट
दूसरे स्थान पर- प्रदीप साहा, CPM
2014 में कुल मतदाता- 12,87,222
पुरुष वोटरों की संख्या- 6,82,366
महिला वोटरों की संख्या- 6,04,844

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 know Political History and Statistics of Hooghly Lok Sabha Seat of West Bengal