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मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट: मुजफ्फरनगर में चौधरी सिंह अजित सिंह चल रहे पीछे

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प्रदेश सबसे अहम लोकसभा सीट में से एक मुजफ्फरनगर सीट पर सुबह से ही उठापटक चल रही है। भाजपा के संजीव बालियान शुरू से ही चौधरी अजित सिंह से बढ़त बनाए हुए हैं। हालांकि इस हॉट सीट पर कौन बैठेगा, यह तो भविष्य क गर्भ में है। फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

2013 के सांप्रदायिक दंगों की वजह से बदनाम हुआ मुजफ्फरनगर इस बार सर्वाधिक चर्चा में आने वाले चुनाव की वजह से जाना जाएगा। 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मुजफ्फरनगर मॉड्यूल को अपनाकर 2014 के चुनाव में वेस्ट की सभी सीटों पर कब्जा जमा लिया था। अप्रैल 2019 में हवा कुछ बदली सी है। एनडीए सरकार में मंत्री रहे डॉ. संजीव बालियान को जाटों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाने जाने वाले चौधरी चरण सिंह के पुत्र चौधरी अजित सिंह से मुकाबला करना पड़ रहा है। यह मुकाबला दोनों के लिए ही जीवन-मरण का प्रश्न है और आसान नहीं है।

भाजपा प्रत्याशी संजीव बालियान के पास पिछड़ी जातियां, सवर्णों के साथ-साथ जाट वोटों की भी ताकत है। दूसरी ओर चौधरी अजित सिंह के पास गठबंधन की ताकत है। दोनों ही ओर से जाट प्रत्याशी होने के कारण जाट बिरादरी ही दुविधा में है। किसी इलाके में जाट बिरादरी अजित सिंह के पक्ष में तो कहीं संजीव बालियान के पक्ष में खड़ी है। जाटों की इलाकेवार और खापों की पंचायतें निरन्तर जारी हैं। इन पंचायतों में सीधा फैसला लेने में पंचों को कठिनाई आ रही है। ऐसे में 11 अप्रैल को मतदान का तरीका और प्रतिशत जीत-हार तय करेगा।

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कौन अपने वोटरों को सुबह लाइन में लगाता है और कौन इसमें पिछड़ेगा यह देखना दिलचस्प होगा। दोनों ही पक्ष के परंपरागत वोटर खुलकर बोल रहे थे। दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जिससे भी पूछो वो यही कहता मिला कि पूरा भाईचारा है, कोई झगड़ा नहीं कोई तनाव नहीं। इसके बाद भी किसको वोट देना है का जवाब बिल्कुल सीधा और तेज आवाज में मिलता रहा। प्रत्याशी ना बोलकर मुजफ्फरनगर की अक्खड़ भाषा में उनके मुंह से फूल (कमल) या नलका (नल) निकलता रहा। अल्पसंख्यको में जहां वोटिंग के लिए बहुत उत्साह था, वहीं दलितों में उत्साह थोड़ा कम था। पूरे इलाके में आपे घूमेंगे तो आपको यही लगेगा कि टक्कर जोरदार है और यहां कुछ भी हो सकता है, मतलब कोई भी जीत सकता है।

'स' नाम वालों से ही हारें हैं अजित
रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह अभी तक जिस चुनाव में भी हारे हैं वह हमेशा स नाम वालों से ही हारे हैं। 1998 में वह बागपत में भाजपा के सोमपाल शास्त्री से हारे थे। उसके बाद 2014 में बागपत में सत्यपाल सिंह से हारे थे। इस बार भी उनके सामने संजीव बालियान ही प्रत्याशी हैं।

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राजनीति का मॉडयूल बना था मुजफ्फरनगर दंगा

  • 27 अगस्त 2013 से 17 सितंबर 2013 तक (21 दिन)
  • दंगे में मारे गये लोगों की संख्या : 57
  • दंगे में हताहत हुए लोगो की संख्या : 93
  • दंगे में हुई गिरफ्तारियां :  करीब 1 हजार
  • दिया गया मुआवजा : 1800 परिवारों को (5-5 लाख प्रति परिवार)
  • कुल मुकदमें : 511
  • कुल नामजद आरोपी : 6869
  • नामजद आरोपियों में मृतक : 17
  • 170 मुकदमों को जांच के बाद एसआईटी ने किया खारिज
  • 169 मुकदमों में एसआईटी ने जांच के बाद लगायी थी अंतिम रिपोर्ट
  • 172 मुकदमों में एसआईटी ने कोर्ट में दाखिल की थी चार्जशीट
  • 41 मुकदमों में गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के बाद आरोपी हो चुके हैं बरी
  • 131 मुकदमों को वापस लेने के लिए प्रक्रिया हुई प्रारम्भ, न्याय विभाग ने मांगी अधिकारियों से रिपोर्ट, इनमें हत्या के 13 और हत्या के प्रयास के 11 मुकदमें भी शामिल
  • एक कवाल कांड़ के मामले में आ चुका है फैसला, जिसमें सात को आजीवन कारावास की सजा मिली
  • दुष्कर्म के पांच मामलों में आरोपी हो चुके हैं बरी

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मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट
कुल मतदाता  1685594
पुरुष मतदाता   712745
महिला मतदाता 772733
अन्य मतदाता     116 

मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी पांच विधानसभा सीटों पर 2017 के चुनावों में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की थी। मुजफ्फरनगर जिले की चार खतौली, चरथावल, मुजफ्फरनगर व बुढाना और मेरठ जिले की सरधना विधानसभा सीट पर भाजपा के ही विधायक हैं।

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मौजूदा सांसद
वर्तमान में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद संजीव बालियान हैं जो केंद्र में मोदी सरकार में करीब तीन साल तक राज्यमंत्री के रूप मंत्रिमंडल में शामिल रहे हैं। संजीव बालियान की गिनती वेसट यूपी के सबसे अधिक सक्रिय सांसदो में होती है।

2014 का चुनाव किसे कितने वोट मिले थे
कुल डाले गए मत- 1102695

नाम पार्टी इतने वोट मिले वोट प्रतिशत
संजीव बालियान भाजपा 653391                     59.25
कादिर राना बसपा 252241                         22.87
वीरेंद्र सिंह सपा 160810 14.58
पंकज अग्रवाल कांग्रेस 12937                       01.17

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट फ्लैश बैक

  • मुजफ्फरनगर से 1971 में चौधरी चरण सिंह ने अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह वामपंथी दल सीपीआई के ठा. विजयपाल सिंह से चुनाव हार गए थे।
  • मुजफ्फरनगर सीट से 1989 में  मुफ्ती मोहम्मद सईद ने लोकसभा चुनाव लड़ा था वह जीतने के बाद वीपी सिंह मंत्रिमंडल में देश के गृहमंत्री बने थे।
  • 2009 के चुनावों में रालोद की दिग्गज नेता व प्रत्याशी अनुराधा चौधरी के पक्ष में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जनसभा करने आए थे लेकिन अनुराधा चौधरी बसपा के कादिर राना से चुनाव हार गई थीं।
  • पिछले सात चुनावों में भाजपा 1991, 1996, 1998, 2014 में चार बार विजयी रही है जबकि1999, 2004, 2009 में लगातार तीन बार भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है।

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट कौन कब बना सांसद

  • 1952        हीरावल्लभ त्रिपाठी (कांग्रेस)
  • 1957        सुमत प्रसाद जैन (कांग्रेस)
  • 1962        सुमत प्रसाद जैन (कांग्रेस)
  • 1967        लताफत अली खां (सीपीआई)
  • 1971        टा.विजय पाल सिंह (सीपीआई)
  • 1977        सईद मुर्तजा (जनता पार्टी)
  • 1980        गयूर अली खां (जनता सेक्यूलर)
  • 1984        धर्मवीर त्यागी (कांग्रेस आई)
  • 1989        मुफ्ती मोहम्मद सईद (जनता दल)
  • 1991        नरेश कुमार बालियान (भाजपा)
  • 1996        सोहनबीर सिंह (भाजपा)
  • 1998        सोहनबीर सिंह (भाजपा)
  • 1999        सईदुज्जमां (कांग्रेस)
  • 2004        मुनव्वर हसन (सपा)
  • 2009        कादिर राना (बसपा)
  • 2014        डॉ. संजीव बालियान (भाजपा)
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  • Web Title:Muzaffarnagar Lok Sabha seat Chaudhary Singh Ajit Singh is running behind in Muzaffarnagar