वाआईपी सीट बागपत : कांटे की टक्कर के बाद जयंत ने बनाई बढ़त
देश की वीआईपी सीटों में से एक मानी जाने वाली बागपत सीट पर शुरू से ही घमासान के आसार थे। चुनाव के बाद अब मतगणना में भी अनुमान ठीक साबित हो रहे हैं। सुबह से जहां भाजपा प्रत्याशी डा. सत्यपाल सिंह आगे...

देश की वीआईपी सीटों में से एक मानी जाने वाली बागपत सीट पर शुरू से ही घमासान के आसार थे। चुनाव के बाद अब मतगणना में भी अनुमान ठीक साबित हो रहे हैं। सुबह से जहां भाजपा प्रत्याशी डा. सत्यपाल सिंह आगे चल रहे थे, वहीं 11 बजे के बाद जयंत चौधरी ने बढ़त ली। हालांकि लीड इतनी बड़ी नहीं कि परिणाम साफ हो सके।
बागपत लोकसभा की मोदीनगर विधानसभा, कोई उमंग नहीं, कोई जोश नहीं। पतला के विनोद और बसा टीकरी के अजय की शहादत से लोग आहत भी हैं और दुखी भी। अभी तक वह इस दुख से उबरे नहीं हैं। यह अलग बात है कि वह अपने रोजमर्रा के काम कर रहे हैं।
चाहे वह शहीद परिवार की महिलाएं हों या इस गांव में दोपहर में बाहर घूमते युवक, उनके चेहरे पर दुख साफ पढ़ा जा सकता था। हालांकि वह अभी तक यह फैसला नहीं ले सके थे कि वोट किसे देना है। इसके विपरीत सिवालखास विधानसभा सीट पर लोग ज्यादा मुखर थे, किताबों की दुकान करने वाले दलित हों या रोड़ी-बदरपुर की दुकान चलाने वाले। खुलकर बोले कि गठबंधन ही जीत रहा है और गठबंधन को ही वोट देंगे।
कमोबेश पूरी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे ही मुखर लोग दिखाई दिए। यहां यह भी याद दिलाना जरूरी है कि क्षेत्रीय विधायक और वर्तमान सांसद को शहीदों के अंतिम संस्कार के समय और चुनाव प्रचार के समय भारी विरोध झेलना पड़ा। बागपत तक पहुंचते-पहुंचते सुर बदलने लगे। व्यापारी तबका और युवा बंटे हुए दिखाई दे रहे थे। व्यापारी खुलकर प्रधानमंत्री मोदी को एक और मौका देने के मूड में दिखे। क्षेत्रीय सांसद से भी वो संतुष्ट लग रहे थे।
बड़ौत कसबे के अलावा अन्य बड़े गांवों में लोग बिरादरी के आधार पर साफ बंटे नजर आए लेकिन एक अपवाद भी था। यह अपवाद था जाट बिरादरी, अभी तक जिस क्षेत्र की हम बात कर रहे थे वह एकमत थे, लेकिन यहां पर मत भिन्नता थी। जाट बिरादरी के ही कुछ लोग मोदी को मौका देने के साथ ही सांसद से संतुष्ट दिखाई दे रहे थे। उन्होंने रोजगार मेले और केन्द्रीय विद्यालय की सौगात का श्रेय वर्तमान सांसद को दिया। गठबंधन प्रत्याशी जयंत को भी उनके युवा होने के कारण कुछ लोग मौका देने के पक्ष में थे। यानि बागपत जो जाटों की चौधराहट के नाम से जाना जाता है उनमें ही बिखराव दिखाई दिया।
रमाला, छपरौली परंपरागत ढंग से चौधरी परिवार को ही वोट डॉ.लेंगे, ऐसे संकेत मिले। हमें बागपत सीट की कुछ रोचक बातें भी याद रखनी होंगी। जब सोमपाल शास्त्री से चौधरी अजित सिंह हारे तो वह अप्रत्याशित लगा था। अगले चुनाव में चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए जाटों ने एक बार फिर चौधरी अजित सिंह को संसद तक पहुंचवाया। लेकिन 2014 आते-आते सभी के मानस पटल पर मोदी लहर में परंपरागत वोट छिटक गए। उसका एक कारण 2013 में सटे हुए इलाके मुजफ्फरनगर में हुए दंगों की छाया भी थी। उन दंगों की आंच यहां तक पहुंची थी। हालांकि चौधरी अजित सिंह के हारने के बाद हुक्के के साथ बातें करते हुए जाट बिरादरी हमेशा की तरह पछतावे की मुद्रा में रही।
इस बार ये विरासत जयंत चौधरी को सौंपी गई है, जो 2009 में मथुरा से जीतने वाले जयंत 2014 में अपनी सीट गंवा चुके हैं।
सत्यपाल सिंह केन्द्रीय मंत्री के रूप में अपनी एक पहचान इलाके में बना चुके हैं और मोदी का नाम उनके साथ है। दूसरी ओर जयंत चौधरी गठबंधन की ताकत के साथ मैदान में उतरे हैं। देखते हैं 11 अप्रैल को किसका भाग्य उदय होता है।
बागपत लोकसभा का इतिहास
बागपत लोकसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। पहले चुनाव में यहां से जनसंघ ने और दूसरे चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। इमरजेंसी के बाद 1977 में यहां से हुए चुनाव से ही क्षेत्र की राजनीति पूरी तरह से बदल गई। 1977, 1980 और 1984 में लगातार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह यहां से चुनाव जीते। उनके बाद बेटे चौधरी अजित सिंह भी यहां से छह बार सांसद रह चुके हैं।
जनपद-बागपत संसदीय क्षेत्र
विधानसभा सीटे- छपरौली, बड़ौत, बागपत, सिवालखास मेरठ, मोदीनगर गाजियाबाद
वर्तमान में सांसद- डॉ. सत्यपाल सिंह भाजपा सांसद, केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री
पिछली बार हार-जीत का अंतर- 2,09,866 वोटों का अंतर रहा
विजयी प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह को मिले वोट- 423475 लाख
दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी- सपा प्रत्याशी हाजी गुलाम मोहम्मद, 213609 लाख वोट मिले थे
जनपद में संसदीय क्षेत्र में महिला, पुरूष एवं अन्य वोट-
पुरूष- 8,86,345
महिला- 7,18,824
थर्ड जेंडर- 85
कुल मतदाता: 16,05,254
बागपत लोकसभा सीट पर अभी तक चुने गये सांसद
| वर्ष | विजेता प्रत्याशी का नाम |
| 1952 | कृष्णचंद शर्मा |
| 1957 | विष्णुशरण दुबलिश |
| 1962 | कृष्णचंद शर्मा |
| 1967 | रघुवीर शास्त्री |
| 1971 | राम चन्द्र विकल |
| 1977 | चौधरी चरण सिंह |
| 1980 | चौधरी चरण सिंह |
| 1984 | चौधरी चरण सिंह |
| 1989 | चौधरी अजित सिंह |
| 1991 | चौधरी अजित सिंह |
| 1996 | चौधरी अजित सिंह |
| 1998 | सोमपाल सिंह शास्त्री |
| 1999 | चौधरी अजित सिंह |
| 2004 | चौधरी अजित सिंह |
| 2009 | चौधरी अजित सिंह |
| 2014 | डॉ. सत्यापल सिंह |
1998 में पहली बार भगवा ध्वज लहाराया था बागपत पर
बागपत लोकसभा सीट पर भाजपा ने सबसे 1998 में जीत हासिल की थी। इस सीट पर तब भाजपा के प्रत्याशी सोमपाल शास्त्री ने चौधरी अजित सिंह को हराया था। इस चुनाव में सोमपाल शास्त्री को जहां 2,64,736 वोट मिले थे, वहीं अजित सिंह को 2,20,030 वोट ही मिले थे। उसके बाद दूसरी बार 2014 में भाजपा के सिंबल पर सत्यपाल सिंह यहां पर चुनाव जीते और इस चुनाव में चौधरी अजित सिंह तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे।
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