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लोकसभा चुनाव 2019: जानिए, झारखंड की राजमहल लोकसभा सीट के बारे में

rajmahal railway station  file pic

राजमहल सीट पर चुनावी तस्वीर काफी हदतक साफ हो चुकी है। इस सीट पर हार-जीत की ‘चाबी’ आदिवासी-अल्पसंख्यक वोटरों के हाथों में है। इसके चलते सभी प्रमुख प्रत्याशी उधर ही ताक रहे हैं।

2014 में झामुमो, कांग्रेस और राजद साथ चुनाव लड़े थे। इस बार झाविमो भी इस महागठबंधन में साथ है। इधर, भाजपा को आजसू, लोजपा व जदयू का साथ मिल रहा है। झामुमो व भाजपा की टक्कर में तृणमूल कांग्रेस की मोनिका किस्कू ‘फैक्टर’ बन चुकी हैं। बंगाली मतदाताओं को लुभाने के लिए पश्चिम बंगाल के कई वरीय नेता व मंत्री क्षेत्र में लगातार कैंप कर रहे हैं। बंगला फिल्म के स्टार भी प्रचार करने आ चुके हैं। माकपा प्रत्याशी गोपिन सोरेन को कैडर वोटों पर भरोसा है। वहीं फारवर्ड ब्लॉक के नीरज हेंब्रम व निर्दलीय महेंद्र हांसदा भी राजमहल के चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे हैं।

संसदीय क्षेत्र की पृष्ठभूमि:

छह विधानसभा क्षेत्र में फैले राजमहल सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में साहिबगंज व पाकुड़ जिले के कुल 15 प्रखंड हैं। गोड्डा जिले के दो बोआरीजोर व सुंदरपहाड़ी एवं दुमका जिले के गोपीकांदर प्रखंड आता है। राजमहल सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र शुरू से ही संताल की राजनीति का केंद्र रहा है।

शुरू हुईं बड़ी परियोजनाएं:

पिछले पांच साल में साहिबगंज जिले में कई बड़ी परियोजनाएं शुरू हुई हैं। इनमें समदा में बंदरगाह, साहिबगंज व राजमहल में सीवरेज सिस्टम, महादेवगंज में डेयरी प्रोजेक्ट प्रमुख हैं। बंदरगाह के पहले फेज का काम करीब 80 फीसदी पूरा हो चुका है। सीवरेज का भी काम 90 फीसदी हो चुका है। डेयरी प्लांट का काम चल रहा है। वैसे साहिबगंज-मनिहारी के बीच गंगा पुल का शिलान्यास छह अप्रैल 2017 को पीएम नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। हालांकि समय पर काम शुरू नहीं होने से संबंधित एजेंसी का टेंडर रद्द कर री-टेंडर का निर्णय लिया गया है। पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा में जलापूर्ति योजना का शिलान्यास हुआ है। अगले कुछ सालों में साहिबगंज में काफी कुछ बदलेगा। तेजी से यहां बड़े शहरों की संस्कृति विकसित हो रही है। नए मार्केट बन रहे हैं। शोरूम व होटल खुल रहे हैं।

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ब्रिटिश दौर से ही महत्वपूर्ण है साहिबगंज जिला:

संताल हूल के महानायक सिदो-कान्हू , चांद-भैरव के जन्मस्थल के रूप में देश-विदेश में साहिबगंज जिले की पहचान है। 1857 में हुए सिपाही विद्रोह से दो साल पहले ही 1855 में साहिबगंज जिले के बरहेट प्रखंड के भोगनाडीह गांव के इन चार भाइयों ने ब्रिटिश शासकों से लोहा लेकर उनके दांत खट्टे कर दिए थे। ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने में 1861-62 के आसपास साहिबगंज से किऊल तक रेल लाइन बिछी थी। इसे साहिबगंज रेललूप खंड कहा जाता था। देश के सबसे पुराने रेलखंड में साहिबगंज रेलखंड शामिल है। राजमहल संसदीय क्षेत्र को रेल लाइन से सीधे जुड़े होने का गौरव शुरू से ही हासिल है।

सांस्कृतिक महत्व :

राजमहल को 1594 से 1660 के बीच करीब 44 साल तक तत्कालीन बंगाल, बिहार और उड़ीसा प्रांत की राजधानी होने का गौरव हासिल है। ऐतिहासिक दस्तावेज से पता चलता है कि 1596 से 1614 तक राजमहल राजधानी थी। 1614 में उसे ढाका ले जाया गया। 1617 में वापस राजमहल राजधानी बनी। 1621 से 1639 तक तीसरी बार राजधानी ढाका शिफ्ट हुई। 1639 से 1660 तक चौथी बार राजमहल राजधानी बना था। बंगाल के गवर्नर मीरजुमला उसे वापस ढाका ले गया था। जिले में आज भी मुगलकालीन एवं उससे पहले या बाद के कई ऐतिहासिक महत्व की इमारतें आज भी मौजूद हैं।

धार्मिक महत्व :

राजमहल के मंगलहाट के पास गुप्त वृंदावन के रूप प्रसिद्ध कन्हाई नाट्यशाला (इस्कान मंदिर) है। यहां चैतन्य महाप्रभु को भगवान श्रीकृष्ण ने दर्शन दिए थे। सालभर देश-विदेश के कृष्ण भक्तों का आगमन यहां होता रहता है। बरहेट का शिवगादी, पतना का विंदुधाम मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच आस्था का केंद्र है।

विधानसभा क्षेत्र :

राजमहल (सामान्य), बोरियो (सुरक्षित), बरहेट (सुरक्षित), लिट्टीपाड़ा (सुरक्षित), महेशपुर (सुरक्षित) व पाकुड़ (सामान्य) विधानसभा क्षेत्र राजमहल लोकसभा क्षेत्र में शामिल हैं।

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तीन बार जीते थे ईश्वर :

1957 से 2014 के बीच राजमहल सीट पर 15 बार लोकसभा चुनाव हुए। ईश्वर मरांडी 1962, 1967 व 1971 में लगातार तीन बार चुनाव जीते। पहली बार झारखंड पार्टी एवं दो बार कांग्रेस से वे चुनाव जीते। कांग्रेस के सेत हेंब्रम 1980 व 1964 एवं झामुमो के साइमन मरांडी 1989 व 1991 में लगातार दो बार चुनाव जीते हैं। इनके अलावा यहां से अबतक लगातार कोई दो बार सांसद नहीं बना।

पिछले चुनाव में मुकाबला :

राजमहल की छह में से तीन विस सीटों पर झामुमो का कब्जा है, जबकि राजमहल व बोरियो (सुरक्षित) सीट भाजपा के पास हैं। पाकुड़ सामान्य सीट कांग्रेस के पास है। पिछले आम चुनाव में यहां झामुमो व भाजपा में सीधा मुकाबला था। मोदी लहर के बावजूद झामुमो के विजय हांसदा 41,337 मतों के अंतर से विजयी हुए थे। पिछले चुनाव में झामुमो के विजय हांसदा व भाजपा के हेमलाल मुर्मू दोनों पार्टी बदलकर चुनाव लड़े थे।

2014 का परिणाम

हेमलाल मुर्मू (भाजपा)

वोट मिले 3,38,170

विजय हांसदा (झामुमो)

वोट मिले 3,79,507

डॉ.अनिल मुर्मू (झाविमो)

वोट मिले 97,374

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