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लोकसभा चुनाव 2019 : झंझारपुर में फिर त्रिकोणीय संघर्ष में उलझी लड़ाई

jhanjharpur

झंझारपुर लोकसभा सीट लंबे समय तक किसी एक पार्टी के खाते में नहीं रही है। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां से बाजी मारी थी। इस बार एनडीए में यह सीट भाजपा की जगह जदयू के खाते में गई है। जदयू ने रामप्रीत मंडल को मैदान में उतारा है। महागठबंधन के उम्मीदवार झंझारपुर के राजद विधायक गुलाब यादव हैं। पांच बार इस क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं। इसबार निर्दलीय उतरे यादव पिछले चुनाव में जदयू के उम्मीदवार थे। 

एनडीए और महागबंधन को यहां अपने-अपने समीकरण का भरोसा है। वहीं देवेंद्र यादव को  उम्मीद है कि लोग समीकरण से ऊपर उठकर वोट करेंगे । उन्हें सीपीआई का भी समर्थन है। इस सीट पर  18.25 लाख वोटरों में यादव वोटरों की संख्या करीब 2.80 लाख है। वहीं मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग ढाई लाख है।  

राजद को माई के अलावा नए समीकरण में कुशवाहा, सहनी और दलितों के एक वर्ग के वोट की उम्मीद है। इनकी संख्या लगभग दो लाख है। वहीं,एनडीए अपने समीकरण को जोड़ रहा है। यादव को छोड़कर पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के वोटरों की संख्या करीब 3.5 लाख है। सवर्ण वोटरों की संख्या लगभग 2.5 लाख है।

वैश्य की 1.25 लाख और दलितों की संख्या 4 लाख से अधिक है। अतिपिछड़ा और दलित वोट पर सबकी नजर है। यही कारण है कि यहां आने वाले सभी स्टार प्रचारकों के भाषण के केन्द्र में आरक्षण का मुद्दा रहता है। पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के प्रभाव का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मंडल आयोग की सिफारिश लागू होने के बाद से अब तक इस सीट का प्रतिनिधित्व इसी वर्ग के उम्मीदवार करते आ रहे हैं। 

झंझारपुर का इतिहास रहा है कि चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले उम्मीदवार ने किस समीकरण से कितना वोट लिया इसी पर जीत और हार तय होती है। 2014 में भी त्रिकोणीय संघर्ष में बीजेपी के उम्मीदवार वीरेंद्र कुमार चौधरी ने जीत दर्ज की थी।  2014 में जदयू, बीजेपी और राजद अलग-अलग लड़ाई में थे। 

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 jhanjharpur third phase poll battle is a triangular conflict