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पश्चिम बंगाल: वामदलों ने दिया कांग्रेस को झटका, गठबंधन के आसार क्षीण

पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे ने गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत के बीच अपने 25 उम्मीदवारों की घोषणा कर कांग्रेस को झटका दिया है। माना जा रहा है कि इसके बाद राज्य में गठबंधन की संभावनाएं क्षीण पड़ गई हैं।

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पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे ने गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत के बीच अपने 25 उम्मीदवारों की घोषणा कर कांग्रेस को झटका दिया है। माना जा रहा है कि इसके बाद राज्य में गठबंधन की संभावनाएं क्षीण पड़ गई हैं। हालांकि दोनों तरफ से यह कहा जा रहा कि बातचीत अभी जारी है। वाम सूत्रों के अनुसार गठबंधन को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया उत्साहजनक नहीं होने के साथ ही कुछ ऐसी सीटों पर दावेदारी जताई गई थी, जिन्हें वाम मोर्चे के घटक खुद रखना चाहते हैं। इनमें पुरुलिया, बारासात तथा वशीरहाट सीटें शामिल हैं। शुक्रवार को जारी सूची में पुरुलिया और बारासात सीटें फारवर्ड ब्लॉक को दी गई है। जबकि वशीरहाट सीट पर सीपीआई का दावा है। कांग्रेस की तरफ से हालांकि कहा गया है कि गठबंधन की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। 

वरिष्ठ नेता ने किया गठबंधन नहीं होने का इशारा
लेकिन वाम दलो ने दो बातें साफ कर दी है कि बाकी बची सभी सीटें कांग्रेस के लिए नहीं है। कुछ सीटों पर वामदल अगले कुछ दिनों में अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे, जबकि कुछ सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ेंगे। यह भी कहा है कि जिन चार सीटों पर कांग्रेस पिछला चुनाव जीती थी, वहां उम्मीदवार नहीं उतारेगी। बदले में वह यह भी चाहते हैं कि जो दो सीटें वामदलों की है, कांग्रेस भी वहां उम्मीदवार न उतारे। दूसरी तरफ कांग्रेस भले ही गठबंधन की संभावनाओं को खारिज नहीं कर रही हो लेकिन एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वाम की दो सीटें हैं और वे 25 पर लड़ेंगे। हमारी चार सीटें हैं, लेकिन हमें वह 17 सीटें भी देने को तैयार नहीं। ऐसे में गठबंधन का क्या औचित्य है? दरअसल, दोनों पक्ष अपनी जिद पर अड़े हैं।

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तीन राज्यों की मिली जीत के बाद कांग्रेस उत्साहित
तीन राज्यों की जीत के बाद कांग्रेस उत्साहित है। राज्य यूनिट ने हाईकमान को फीडबैक दिया है कि राज्य में भी स्थिति सुधरने जा रही है। इसलिए ज्यादा फायदा अकेले लड़ने में है। वाम को लगता है कि अपने पुराने गढ़ में वे फिर मजबूत होने जा रहे हैं। इसलिए रुख दोनों तरफ से अड़ियल है। सूत्रों की मानें तो पश्चिम बंगाल में वाम-कांग्रेस गठबंधन अब कुछ सीटों तक ही सीमित रहने की संभावना है। इसका नफा-नुकसान किसे होगा, यह तो समय बताएगा लेकिन एक आकलन यह है कि भाजपा का मत प्रतिशत इस बार बढ़ेगा। लेकिन देखना यह है कि वह किसके मतों में सेंध लगाती है। यदि भाजपा तृणमूल के मतों को काटती है तो फायदा वामदलों को होगा क्योंकि तृणमूल और वाम के मतों के बीच महज नौ फीसदी का अंतर था। वाम को 30 और तृणमूल को 39 फीसदी वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस को 10 फीसदी मत मिले थे। 

त्रिकोणीय मुकाबले में वामदलों को फायदे की उम्मीद
दूसरे शब्दों में कहे तो त्रिकोणीय मुकाबले में वामदलों को फायदे की उम्मीद है लेकिन जिन सीटों पर कांग्रेस मुकाबले में होगी वहा तृणमूल को फायदा होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में यही हुआ था। लेकिन इसी बार यदि भाजपा का मत प्रतिशत 15 फीसदी से बढ़ता है तो चौकोणीय मुकाबले का फायदा मिलेगा। वामदलों की ओर से गठबंधन नहीं होने कि स्थिति में इस रणनीति पर काम किया जा सकता है कि जहां कांग्रेस का उम्मीदवार जीतता दिखे वहां अपने उम्मीदवार को वापस लेकर उसका समर्थन कर दे। इस पर उसने पहल भी शुरू कर दी है। अभी जिन 25 सीटों पर टिकट दिए हैं उनमें बीरभूम सीट एक कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार रिजाउल करीम को दी गई है। जबकि 15 सीटें सीपीएम, तीन-तीन सीटें फारवर्ड ब्लाक, आरएसपी तथा सीपीआई को दी गई हैं। आगे यह फार्मूला कुछ और सीटों पर दिखेगा।

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019 In West Bengal Congress and Left Parties Alliance possibilities is getting dim