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लोकसभा चुनाव 2019 : मैनपुरी शो के बाद अखिलेश बने गठबंधन के बड़े शिल्पकार बनकर उभरे

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मैनपुरी के शो के बाद अखिलेश यादव गठबंधन के बड़े शिल्पकार के तौर पर उभरे हैं। वह  मायावती व मुलायम को एक मंच पर लाने में कामयाब रहे। जैसा संदेश दोनों से वह चाहते थे, वैसा ही संदेश दो पुराने नेताओं ने एक साथ दिया। 

सपा-बसपा गठबंधन इसके बाद अब खुद को और मजबूत अनुभव कर रहा है। इसीलिए अखिलेश यादव दावा कर रहे हैं कि अब आगे के मतदान में वोटों की जमकर बारिश होगी। यूपी की सियासत में मायावती व मुलायम का एक मंच पर आना बड़ी घटना है। बहुत लोगों के मन में संशय था कि मुलायम आएंगे या नहीं? आएंगे तो पता नहीं क्या बात कहे दें। इस अंदेशे की वजह भी थी। मुलायम ने कुछ दिन पहले कहा था कि सपा को बसपा से समझौता नहीं करना चाहिए था, क्योंकि अब उसे आधी सीटों पर लड़ना पड़ रहा है। यह सपा के लिए नुकसानदेह है। 

संसद में उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे। लेकिन शुक्रवार को हुई रैली में यह सब अंदेशे हवा में उड़ गए। मुलायम ने सधे हुए भाषण में वही कहा जो मायावती को अच्छा लगे। उनका सम्मान, अहमियत बनी रहे। यही अखिलेश यादव चाहते थे।  उधर, मायावती ने भी मुलायम का मान रखा। गेस्ट हाउस कांड की टीस को भुला दिया। सपा के गढ़ में वोट ट्रांसफर करने की अपील भी की।

इस तरह देखें कि सपा-बसपा गठबंधन के दोनों दलों के शीर्ष नेता आपसी समझ बनाए हुए हैं और अब दोनों मिल कर एक साथ भाजपा व कांग्रेस को निशाने पर लिए हुए हैं। अभी तक कांग्रेस के प्रति नर्म रुख रखने वाले अखिलेश यादव ने अब इस पार्टी को देश की सबसे बड़ी धोखेबाज पार्टी बताया है। ऐसे में सपा-बसपा की जुगलबंदी यूपी के चुनावी समर में खासी अहम भूमिका निभा सकती है। गठबंधन कितनी सीटें लाएगा, यह तो आगे पता चलेगा। लेकिन इसने भाजपा को दबाव में जरूर ला दिया है। 

मुलायम के उत्तराधिकारी अखिलेश  

सपा की कमान संभाले अखिलेश को दो साल से ज्यादा वक्त हो गया है। वैसे तो वह मुलायम की सियासी विरासत के हकदार बने हुए हैं लेकिन मैनपुरी में मायावती ने भी मुलायम के सच्चे उत्तराधिकारी के तौर पर अखिलेश के नाम पर अपनी सहमति दे दी। ऐसे में शिवपाल प्रकरण भी मैनपुरी रैली के बाद खत्म हो गया लगता है।  

बड़ी भूमिका बसपा को दी 
अखिलेश ने गठबंधन का स्वरूप, सीटों की संख्या, सीटें व रणनीति तय करने में बसपा को बड़ी भूमिका दी। उन्होंने खुद के लिए अपेक्षाकृत कठिन सीटें लेना भी स्वीकार किया। उधर, मायावती भी सपा के गढ़ वाले इलाकों में संयुक्त रैलियां करने पर सहमत हुईं और इसे उन्होंने निभाया भी। मैनपुरी की रैली इसकी गवाह है।  

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 ex up cm and sp president akhilesh yadav emerging as opposition coalition leader