DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:
asianpaints

लाकसभा चुनाव 2019 : लोकतंत्र की मजबूती के लिए किए गए ये 5 बड़े प्रयास, जानें क्या हैं यह

election commission of india  file pic

भारत में लोकतंत्र की मजबूती के लिए समय-समय पर कई प्रयास हुए हैं। ईवीएम में नोटा विकल्प की शुरुआत से लेकर दोषी करार दिए जाने के साथ ही सदस्यता रद्द करने जैसे तमाम प्रावधानों ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत आधार दिया है। 

1. ईवीएम का इस्तेमाल
धांधली रोकने और मतगणना को आसान बनाने के लिए संसद ने 1988 में जनप्रतिनिधि कानून में धारा-61ए शामिल की, जिससे ईवीएम के इस्तेमाल का रास्ता साफ हुआ
1998 में पहली बार प्रायोगिक तौर पर 16 विधानसभा सीटों (मध्य प्रदेश-5, राजस्थान-5, दिल्ली-6) पर हुए चुनाव में ईवीएम का प्रयोग किया गया, 2014 में वीवीपैट मशीनों से लैस ईवीएम पेश की गई
2019 में हर विधानसभा क्षेत्र की पांच ईवीएम को मतदान पर्ची निकालने वाली वीवीपैट मशीन से जोड़ा गया है, नतीजे ईवीएम में पड़े वोट और वीवीपैट पर्चियों के मिलान के बाद जारी होंगे।

2. सजा पर सदस्यता रद्द
जुलाई 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आपराधिक मामलों में दोषी करार और कम से कम दो साल सजा पाए सांसद-विधायक तत्काल प्रभाव से अयोग्य हो जाएंगे
पहले आपराधिक मुकदमों में दोषी करार दिए जा चुके सांसद और विधायक ऊपरी अदालत में अपील लंबित रहने तक अयोग्य नहीं घोषित किए जाते थे
अक्तूबर 2013 में भ्रष्टाचार के आरोपों में चार साल की सजा पाने वाले कांग्रेस के तत्कालीन राज्यसभा सांसद रशीद मसूद इस कानून के तहत सदस्यता गंवाने वाले पहले सांसद बने

3. नोटा का विकल्प
सितंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतपत्रों/ईवीएम में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प उपलब्ध कराने का आदेश दिया
हालांकि भारत में नोटा सिर्फ प्रत्याशियों के प्रति अस्वीकार्यता दर्शाने का जरिया, नोटा को सर्वाधिक वोट पड़ने के बावजूद सबसे ज्यादा मत प्रतिशत वाला उम्मीदवार विजेता माना जाता है
2013 में पहली बार छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में नोटा बटन के इस्तेमाल का विकल्प दिया गया था

4. आपराधिक रिकॉर्ड बताना
सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों को अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों और देनदारियों की जानकारी अखबारों-टीवी चैनलों में तीन बार विज्ञापन देकर बतानी होगी
नाम वापसी की अवधि खत्म होने के बाद प्रत्याशी मतदान से दो दिन पहले तक कभी भी विज्ञापन दे सकते हैं, फैसले का मकसद मतदाताओं को आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के बारे में जानकारी देना है, ताकि वे सही फैसला ले सकें

5. चुनाव खर्च की सीमा तय
भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव में धन-बल के प्रयोग पर लगाम को प्रत्याशियों के लिए चुनाव खर्च की सीमा तय कर रखी है
बड़े राज्यों में लोकसभा चुनाव में खर्च सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि छोटे प्रदेशों में यह 54 लाख है
विधानसभा चुनावों की बात करें तो पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़ सभी राज्यों में उम्मीदवार अधिकतम 28 लाख खर्च कर सकते हैं

स्रोत : एजेंसियां

इसे भी पढ़ें : लोकसभा चुनाव 2019 : 7 केंद्रीय मंत्रियों की परीक्षा कल, जानें कौन हैं सातवें चरण के बड़े चेहरे

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:lok sabha elections 2019 election commission s these 5 big step for free and fair polls