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लोकसभा चुनाव 2019 : पहले चरण से ही विवादित बयानों ने माहौल गरमाया

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07 अप्रैल : देवबंद में मायावती की मुस्लिमों से अपील
पहले चरण के मतदान से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने देवबंद की रैली में विवादित बयान देकर सियासी माहौल गरमा दिया। बसपा के हाजी फजलुर्रहमान, कांग्रेस से इमरान मसूद के बीच वोटों का बिखराव देखते हुए उन्होंने मुसलमानों से सीधे बसपा को वोट देने की अपील की। गठबंधन के मंच से मायावती ने कई बार कहा कि किसी भी सूरत में वोट को बंटने नहीं देना है, कांग्रेस इस लायक नहीं है कि वो बीजेपी को टक्कर दे सके, जबकि महागठबंधन के पास मजबूत आधार है। चुनाव आयोग ने उनके प्रचार करने पर 48 घंटे की रोक लगाई। 

09 अप्रैल : अली बनाम बजरंगबली
मायावती के बयान के दो दिन बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की रैली में कहा कि अगर गठबंधन को अली पर विश्वास है तो हमें बजरंगबली पर। योगी के इस बयान से पश्चिम उत्तर प्रदेश में पहले चरण में हो रहे चुनाव में ध्रुवीकरण की आशंका बढ़ गई। चुनाव आयोग ने योगी को इस बयान पर नोटिस जारी कर दिया। इससे पहले मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनाव में भी उन्होंने यह बयान दिया था। उन पर 72 घंटे की रोक लगाई गई।

12 अप्रैल : मेनका ने अल्पसंख्यकों को धमकाया
सुल्तानपुर से भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने दिया। उन्होंने प्रचार के दौरान मुस्लिमों से कहा कि वे जब उनकी पार्टी को वोट नहीं देते हैं तो उनका दिल भी दुखता है। मैं आपके बिना जीत रही हूं, लेकिन जीत आपके बिना अच्छी नहीं लगेगी। जब मुसलमान काम के लिए आते हैं तो मैं सोचती हूं कि रहने दो क्या फर्क पड़ता है। उनके प्रचार पर 15 अप्रैल को 48 घंटे की रोक लगाई गई।

14 अप्रैल : आजम खां की अमर्यादित टिप्पणी
रामपुर में सपा प्रत्याशी आजम खां ने भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक बयान दिया। आजम ने जया का नाम लिए बगैर कहा, 'क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का खून पिया, जिसे उंगली पकड़कर हम रामपुर में लाए, उसने हम पर क्या-क्या इल्जाम नहीं लगाए। क्या आप उसे वोट देंगे?' '10 साल जिसने आपका प्रतिनिधित्व किया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया.......है। आयोग ने उनके प्रचार करने पर 72 घंटे की रोक लगाई।

अपनों के बयान से पार्टी हुई शर्मसार
09 मई : पित्रोदा का हुआ सो हुआ का बयान
दिल्ली और पंजाब में चुनाव के 1984 के सिख दंगों का मामला सुर्खियों में आ गया। कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने सिख विरोधी दंगों के सवाल पर कहा कि 84 में हुआ तो हुआ। कांग्रेस ने इस बयान से तुरंत किनारा कर लिया और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कहने पर सैम पित्रोदा को माफी भी मांगनी पड़ी। 

16 मई : गोडसे को देशभक्त बताकर घिरीं प्रज्ञा
भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने फिर विवादित बयान दिया। उन्होंने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोडसे को देशभक्त बताया। पार्टी के निर्देश के बाद उन्होंने माफी मांग ली। मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे पर सवाल उठाकर भी वह पार्टी को मुसीबत में डाल चुकी थीं। 

27 अप्रैल : भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने एक सभा में भारत के बंटवारे की मांग करने वाले जिन्ना को कांग्रेस परिवार का सदस्य बता डाला। उन्होंने कहा कि जिन्ना का भारत की आजादी और विकास में योगदान रहा है। सपा प्रत्याशी और पत्नी पूनम सिन्हा के लिए लखनऊ में प्रचार करने को लेकर भी वह घिर गए थे।  

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 disputed statements of leaders heat up elections from first phase