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लोकसभा चुनाव 2019 : चौथे चरण में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की बढ़ सकती है चुनौती

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महाराष्ट्र में 29 अप्रैल को चौथे चरण में 17 सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव में एंटी इंकंबेंसी का खतरा हो सकता है। इससे भाजपा और शिवसेना गठबंधन की चुनौती बढ़ सकती है। 

पहले तीन चरणों में 31 सीटों के लिए मतदान हुआ है। भाजपा-शिवसेना-आरपीआई गठबंधन ने 2014 में सभी 17 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार एनडीए को इनमें से कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है जिनमें मुंबई की सीट भी शामिल है। जानकार बताते हैं कि मराठा समुदाय और किसानों की नाराजगी इस गठबंधन को भारी पड़ सकती है।

कुछ चीजें भाजपा और शिवसेना के पक्ष में है। जैसे भगवा वोट बैंक, मराठी और गैर मराठी वोट को पक्का करने के लिए शिवसेना के एक साथ आने से एनडीए को बड़ा फायदा हो सकता है। पिछले चुनाव में कुछ सीटों पर भाजपा और शिवसेना ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस की कुछ पारंपरिक सीट पर भी जीत मिली थी। हालांकि जानकार इस बार का चुनाव अलग तरीके से देख रहे हैं। 

एनसीपी के एक पदाधिकारी ने कहा कि मुंबई की तीन सीटों के अलावा एनडीए के कई उम्मीदवारों को एंटी इंकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसके अलावा इस बार 2014 जैसा मोदी लहर नहीं है। ऐसे में भाजपा के लिए थोड़ी मुश्किल होगी। नाम न बताने की  शर्त पर भाजपा के एक रणनीतिकार ने  भी माना कि इस बार एंटी  इंकंबेंसी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मोदी की रैली से चीजें बदल जाएंगी। 

किसान हताशा 
पुणे के पास शिरूर में 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिजीत कदम का कहना है कि कृषि संकट ने कई किसानों को हताशा में डाल दिया है। किसान परिवारों के युवा खेतों में काम करना जारी नहीं रखना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पास इंजीनियरिंग की डिग्री है, लेकिन नौकरियां बहुत कम हैं।

व्यापार सुगम हो
इसी तरह से नवी मुंबई में सिविल इंजीनियर धीरज उपाध्याय व्यापार को आसान बनाने की मांग कर रहे हैं। जबकि ठाणे के मतदाता प्रवासी भारतीय जयराज नांबियार  फर्जी समाचार और गलत सूचना से व्यथित हैं।

(Mint से साभार)

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