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लोकसभा चुनाव 2019 : चुनावी दंगल में व्यापारियों पर सियासी दांव

प्रदेश में लगभग साढ़े ग्यारह लाख व्यापारी जीएसटी प्रक्रिया में पंजीकृत हो चुके हैं जबकि प्रदेश में अपंजीकृत छोटे व्यापारियों की बात करें तो एक अनुमान के अनुसार लगभग डेढ़ करोड़ की संख्या को पार कर जाते हैं। यह एक ऐसी बड़ी संख्या है जिसे अपने पाले में लाने के लिए सभी दल के नेता सारे पैतरे आजमा रहे हैं। बड़ा सवाल है कि क्या व्यापारियों की समस्याएं और उनके सरोकार चुनावी मुद्दा बनेंगे?

इस बार के लोकसभा चुनाव में व्यापारी से जुड़े मुद्दों को उठाकर विपक्षी और सत्तापक्ष दोनों एक-दूसरे को मात देने के खेल में शामिल हो चुके हैं। विपक्षी दलों ने जहां जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दे को धार देना शुरू किया तो सत्ताधारी दल भाजपा ने छोटे कारोबारियों को पेंशन देने का संकल्प घोषणा पत्र में जारी किया तो दूसरी तरफ प्रदेश स्तर पर पहले से व्यापारी कल्याण बोर्ड बना चुके सत्ता पक्ष ने इसे आगे ले जाकर राष्ट्रीय व्यापार आयोग बनाने की भी घोषणा कर दी। 

भाजपा ने संकल्प पत्र के जरिए साधा बड़ा निशाना: जीएसटी व नोटबंदी जैसे व्यापारियों के मुद्दों को विपक्षी पार्टियों ने बयानबाजी और ट्विटरवार से गरमा रखा है। यही नहीं इन मामलों को कैसे हवा दी जाए    इसके लिए राजनीतिक दल के राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित नेताओं व्यापारियों के संगठनों से बाकायदा मुलाकात भी की है। इसमें चाहे  कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी हों या भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला...।

कुछ नेताओं ने लखनऊ के व्यापारियों को न केवल व्यापारियों की समस्याओं को सुना बल्कि उनके मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस कराने और उन्हें सुलझाने का आश्वासन भी दिया। व्यापारी संगठन भाजपा के संकल्प पत्र में छोटे दुकानदारों को पेंशन और राष्ट्रीय व्यापार आयोग की घोषणा को बड़ा चुनावी मास्टर स्ट्रोक करार दे रहे हैं। 

 उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष बनवारीलाल कंछल कहते हैं कि संगठन इस मांग को पिछले 15 वर्षों से उठा रहा है। हिमाचल, केरल और हरियाणा में इसको लागू भी किया जा चुका है लेकिन राष्ट्रीय स्तर की  इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करना व्यापारिक संगठनों की बढ़ती ताकत का नतीजा है।  उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष श्यामबिहारी मिश्र कहते हैं कि भाजपा ने घोषणा पत्र व्यापारिक मुद्दों को शामिल कर दूसरे राजनीतिक दल को पीछे छोड़ दिया है। इस घोषणा के बाद जीएसटी और नोटबंदी जैसे मुद्दे पीछे छूट जाएंगे।

भाजपा ने जो संकल्प पत्र में व्यापारियों के मुद्दे को शामिल करके पहल की है। ऐसी पहल अन्य दलों को भी करनी चाहिए। व्यापारी जीएसटी से नहीं उसकी प्रक्रिया से परेशान था।
अमरनाथ मिश्र 
वरिष्ठ महामंत्री, लखनऊ व्यापार मंडल

नोटबंदी पुराना हो चुका है। जीएसटी में भी काफी सुधार किया जा रहा है। भाजपा के संकल्प पत्र में छोटे व्यापारियों को पेंशन और राष्ट्रीय व्यापार आयोग की बात  स्वागत योग्य है।
राममोहन अग्रवाल, संयोजक, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019: Business Political bets in election