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लोकसभा चुनाव 2019 : हरियाणा में इनेलो की टूट से बदले समीकरण

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हरियाणा में इस चुनाव में गैर जाट राजनीति का दबदबा होने के आसार हैं। मजबूत क्षेत्रीय दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में हुई टूट के बाद राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए विपक्षी चुनौती कमजोर हुई है। कांग्रेस भी इस राज्य में अपनी वापसी के लिए जूझ रही है, लेकिन उसमें भी अंदरूनी घमासान काफी ज्यादा है। 

हरियाणा में लोकसभा की 10 सीटें है। बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सात सीटें जीतकर राज्य में इतिहास रचा दिया था। इनेलो को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली थी। भाजपा का गठबंधन कुलदीप विश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस से था जो दो सीटों पर लड़ी थी, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार विश्नोई कांग्रेस में जा चुके हैं। लोकसभा के छह महीने बाद ही हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने राज्य में सफलता को दोहराते हुए पहली बार सरकार बनाई थी। अब भाजपा अपने दम पर राज्य में चुनाव लड़ने जा रही है। 

भाजपा ने पांच सांसदों को फिर दिया मौका
भाजपा ने अंबाला, सोनीपत, भिवानी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम और फरीदाबाद से मौजूदा सांसदों को ही चुनाव मैदान में उतारा है। कुरुक्षेत्र में राजकुमार सैनी के पार्टी से बाहर जाने के बाद नायब सिंह सैनी भाजपा उम्मीदवार हैं। करनाल में अश्विनी चौपड़ा की जगह संजय भाटिया को उतारा गया है। कांग्रेस ने भी अपने एक मात्र सांसद दीपेंद्र हुडा को फिर से रोहतक से मैदान में उतारा है। इसी तरह इनेलो ने भी सिरसा से मौजूदा सांसद को टिकट दिया है। इनेलो में विभाजन के बाद सांसद दुष्यंत चौटाला जननायक जनता पार्टी (जेजीपी ) में चले गए और हिसार से चुनाव मैदान में हैं। जेजीपी का आम आदमी पार्टी से गठबंधन है। 

हिसार और रोहतक में रोचक मुकाबला 
हरियाणा में भाजपा ने एक बार फिर गैर जाट समीकरणों को ज्यादा महत्व दिया है। हालांकि जाट लैंड में वह जाट नेताओं पर ही दांव लगा रही है। हिसार में इस बार जोरदार संघर्ष हो सकता है। जाट लैंड की इस सीट पर जेजीपी के दु्ष्यंत चौटाला व भाजपा से केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह के बेटे वृजेंद्र सिंह के बीच टक्कर है। रोहतक में भाजपा ने कांग्रेस के दीपेंद्र हुडा के मुकाबले कांग्रेस से आए पूर्व सांसद अरविंद शर्मा को उतारा है। भाजपा के दो केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह गुरुग्राम व कृष्णपाल गुर्जर फरीदाबाद सीट से ही चुनाव लड़ रहे हैं। 

संकट में है देवीलाल की विरासत 
हरियाणा के गठन के बाद से ही वहां की राजनीति में चौधरी देवीलाल प्रमुख चेहरे होते थे। देवीलाल जाट राजनीति के केंद्र बने। बाद में उनकी विरासत उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने संभाली। लेकिन ओम प्रकाश चौटाला के जेल जाने के बाद उनके परिवार में पार्टी में वर्चस्व को लेकर शुरू हुए घमासान के कारण पार्टी तो टूटी ही, राज्य की राजनीति भी प्रभावित हुई।  

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  • Web Title:lok sabha elections 2019 break in inld changed political scenarion in haryana