Lok Sabha Elections 2019: Big Challenge For Congress For Overcoming 2009 Results - लोकसभा चुनाव 2019 : कांग्रेस के लिए 2009 के नतीजों से आगे निकलना बड़ी चुनौती DA Image

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लोकसभा चुनाव 2019 : कांग्रेस के लिए 2009 के नतीजों से आगे निकलना बड़ी चुनौती

लोकसभा चुनावी महासमर में कांग्रेस के सामने 2009 के चुनावी नतीजों से आगे निकलने की बड़ी चुनौती है। अलबत्ता प्रतिद्वंद्वी दलों के मुकाबले सांगठनिक दृष्टि से बेहद कमजोर पार्टी के नेता खुद मानते हैं कि अगर पार्टी 21 सीट लाकर 2009 लोकसभा चुनाव के नतीजे दोहरा दे तो प्रदेश में लगातार हाशिए पर खड़ी पार्टी के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे अच्छे नहीं रहे: यूपी में 2009 में कांग्रेस ने 21 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। फिरोजाबाद की सीट पार्टी ने उपचुनाव में अपनी झोली में डाल ली थी। यह सीट राज बब्बर ने उपचुनाव में डिम्पल यादव को हराकर जीती थी। इस तरह पार्टी के खाते में 22 सीट आ गई थीं लेकिन 2014 के चुनाव में पार्टी महज अमेठी और रायबरेली सीट पर सिमट कर रह गई।

राजबब्बर और रीता बहुगुणा भी सीटें नहीं जीत सके थे: रायबरेली, अमेठी को छोड़ दें तो 2009 में जीती लोकसभा सीटों में से सिर्फ बाराबंकी, कुशीनगर, डुमरियागंज, कानपुर में दूसरे नंबर पर रही थी।  उन्नाव, गोण्डा, सुलतानपुर, झांसी, महाराजगंज, श्रावस्ती आदि सीटों पर पार्टी के दिग्गज प्रत्याशी चौथे नंबर पर थे। अधिकांश की जमानत भी नहीं बची थी। हालांकि सहारनपुर, लखनऊ और गाजियाबाद सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी दूसरे नंबर पर थी। डुमरियागंज लोकसभा सीट से 2009 में चुनाव जीते जगदम्बिका पाल ने 2014 में पाला बदल कर भाजपा से चुनाव लड़ा और जीता भी लेकिन कांग्रेस के मो. मुकीम रनर रहे। गाजियाबाद में राज बब्बर और लखनऊ में रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस के टिकट पर दूसरे स्थान पर थीं। कांग्रेस से नाता तोड़ चुकीं रीता बहुगुणा जोशी प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और इलाहाबाद लोकसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं।

 श्रीप्रकाश जायसवाल दो लाख वोट पाकर भी हार गए: कुशीनगर लोकसभा सीट से पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरपीएन  सिंह, बाराबंकी से राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग के पूर्व अध्यक्ष पीएल पुनिया और कानपुर से पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल कांग्रेस के ऐसे उम्मीदवार थे, जिन्हें हारने के बावजूद दो लाख से अधिक वोट मिले थे। कुशीनगर से आरपीएन सिंह फिर चुनाव मैदान में हैं। हालांकि भाजपा ने यहां से अपने मौजूदा सांसद राजेश पाण्डे का टिकट काट दिया है। भाजपा ने कानपुर से अपने मौजूदा सांसद मुरली मनोहर जोशी का काट दिया है जबकि कांग्रेस ने तीन बार सांसद रह चुके अपने दिग्गज श्रीप्रकाश जायसवाल को ही टिकट दिया है। बाराबंकी लोकसभा सीट से कांग्रेस ने इस बार राज्यसभा सदस्य पीएल  पुनिया के बेटे तनुज पुनिया को चुनावी महासमर में उतारा है। भाजपा ने यहां भी अपनी मौजूदा सांसद प्रियंका रावत का टिकट काटा है। तनुज 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

गोण्डा लोकसभा सीट कृष्णा पटेल के लिए छोड़ी
गोण्डा लोकसभा सीट से 2009 का चुनाव जीते बेनी प्रसाद वर्मा अब कांग्रेस में नहीं है। पार्टी ने यह सीट अपना दल के संस्थापक स्व. सोने लाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल के लिए छोड़ी है। महाराजगंज में कांग्रेस से हर्षवर्द्धन जीते थे। इस बार पार्टी ने यहां से उनकी पत्रकार बेटी सुप्रिया श्रीनेत को चुनाव मैदान में उतारा है। धौरहरा से पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, खीरी से जफर अली नकवी, सुलतानपुर से डा.संजय सिंह, फरूखाबाद से सलमान खुर्शीद, प्रतापगढ़ से रत्ना सिंह, अकबरपुर से राजाराम पाल, बरेली से प्रवीन सिंह ऐरन, उन्नाव से अन्नू टण्डन,फैजाबाद से निर्मल खत्री फिर चुनाव मैदान में है। झांसी लोकसभा सीट से 2009 में प्रदीप जैन आदित्य चुनाव जीते थे। 2014 में प्रदीप जैन चौथे नंबर पर थे। इस बार यहां से जन अधिकार पार्टी के शिवशरण कुशवाहा को मैदान में उतारा है। फिरोजाबाद सीट कांग्रेस ने सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के लिए छोड़ दी है। मुरादाबाद से क्रिकेटर अजहरूद्दीन की जगह इमरान प्रतापगढ़िया, श्रावस्ती से विनय कुमार पाण्डे की जगह धीरेन्द्र प्रताप सिंह को टिकट दिया है। 

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