लोकसभा सीट : बठिंडा में हैट्रिक लगाने की तैयारी में हरसिमरत कौर

नई दिल्ली हिटी
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भारत के सबसे बड़े अनाज बाजार के लिए मशहूर पंजाब के बठिंडा लोकसभा सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के गढ़ से जहां केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल हैट्रिक लगाने को...

लोकसभा सीट : बठिंडा में हैट्रिक लगाने की तैयारी में हरसिमरत कौर

भारत के सबसे बड़े अनाज बाजार के लिए मशहूर पंजाब के बठिंडा लोकसभा सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के गढ़ से जहां केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल हैट्रिक लगाने को तैयार हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से अमरिंदर सिंह राजा वंडिंग हरसिमरत को चुनौती दे रहे हैं।  आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और तलवंडी साबो से मौजूदा विधायक प्रो. बलजिंदर कौर और पंजाब एकता पार्टी के सुखपाल खैरा मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

हरसिमरत पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल की बहू और शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हैं। प्रकाश सिंह बादल खुद बहू हरसिमरत के लिए प्रचार कर रहे हैं। शिअद ने इस सीट से लगभग दो दशक से ज्यादा समय में छह लोकसभा चुनावों में से पांच में जीत दर्ज की है। हरसिमरत ने 2014 में शिअद छोड़कर आए अपने देवर और पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल को 19 हजार वोटो से कम अंतर से हराया था। जबकि 2009 में उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रनिंदर सिंह को हराकर पहली बार लोकसभा पहुंची थीं। हालांकि, इस बार कांग्रेस ने हरसिमरत के मुकाबले राजा वडिंग को उतारकर मुकाबले को कड़ा बना दिया है। इसके साथ ही हरसिमरत को पंजाब की राजनीति में दलबदलू नेता की छवि वाले सुखपाल खैरा और आप नेता बलजिंदर कौर से कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि मुख्य मुकाबला शिअद और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। 

एक ओर वडिंग और खैरा गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, बहबलकलां तथा कोटकपूरा पुलिस फायरिंग के बल पर जीतने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी राजा वडिंग का कहना है कि पंथ के दोषी बादलों से जनता बहुत नाराज है, विशेषकर बरगाडी तथा कोटकपूरा गोलीकांड मामले में जनता बादलों को नहीं बख्शेगी। वहीं हरसिमरत मोदी सरकार के कामकाज, बठिंडा में अभूतपूर्व विकास कराने, एम्स बनाने, सड़कें, पेयजल आदि सुविधायें मुहैया कराने के साथ कहती हैं कि उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी को लोगों के दरवाजे पर ला खड़ा किया। 

शिअद के सामने बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती
शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी साल 2017 में हुए विधानसभा में राज्य की 117 सीटों में केवल 15 सीट पर सिमट गई। हालात देखते हुए इस बार पार्टी और पार्टी अध्यक्ष दोनों के लिए यह चुनाव परीक्षा से कम नहीं है। साल 2014 में शिरोमणी अकाली दल ने पंजाब की चार लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त की थी। जबकि दो सीटें भाजपा के खाते में आई थी। इस बार पिछले प्रदर्शन को और बेहतर करने की इनके सामने चुनौती होगी। 

कांग्रेस-शिअद की निगाह ‘आप’ के वोट पर 
सुखपाल खैरा जिन्होंने आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर पंजाब एकता पार्टी बनाई। वहीं बलजिंदर आप के साथ खड़ी हैं। हालांकि आप ने पिछले संसदीय चुनावों में यहां काफी खराब प्रदर्शन किया था। लेकिन, 2017 के विधानसभा चुनावों में आप ने बठिंडा की नौ विधानसभा सीटों में पांच पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं शिअद और कांग्रेस को दो-दो सीटें मिलीं। आप के अंदर विवाद से एक बार फिर आप की साख दांव पर है। वडिंग, हरसिमरत और खैरा एक 2017 में आप को वोट देने वाले मतदाताओं के समर्थन का  दावा कर रहे हैं। 

केंद्रीय मंत्री के सामने तीन विधायक 
बठिंडा सीट पर केंद्रीय मंत्री हरसिमरत को इस बाद तीन मौजूदा विधायक चुनौती दे रहे हैं। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ कांग्रेस से मौजूदा विधायक अमरिंदर सिंह राजा वडिंग हैं तो वहीं पंजाब एकता पार्टी से सुखपाल खैरा और आप उम्मीदवार बलजिंदर कौर भी विधायक हैं। हालांकि इस चुनाव में वडिंग शिअद की हरसिमरत के सामने मुख्य चुनौती पेश कर रहे हैं। 

27 साल से इस सीट को नहीं जीत पाई है कांग्रेस
पंजाब में पिछले 27 साल में तीन बार कांग्रेस सत्ता में आई लेकिन इसके बावजूद वह अकाली के मजबूत गढ़ बठिंडा लोकसभा सीट अब तक नहीं जीत पाई है। कांग्रेस ने अंतिम बार 1992 में इस सीट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इसके बाद इस सीट पर लगातार अकाली दल का प्रभाव रहा है। हांलाकि1999 के चुनाव में सिर्फ एक बार सीपीआई के भान सिंह भौरा इस सीट पर जीते। जबकि कांग्रेस इस दौरान भी तीसरे स्थान पर रही। 

9 विधानसभा सीटें 
01    :    लांबी
02    :    भुचो मंडी 
03    :    बठिंडा शहरी
04    :    बठिंडा ग्रामीण
05    :    तलवंडी साबो
06    :    मौर
07    :    मानसा
08    :    सरदूलगढ़
09    :    बुधलाड़ा 

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